गोलू चालीसा – Golu Chalisa

गोलू चालीसा का पाठ भक्तों को न्यायोचित रूप से समृद्धि प्रदान करता है और सभी कष्टों से रक्षा करता है। वस्तुतः गोलू देवता को गोलू महाराज या गोल्ज्यू महाराज के नाम से भी जाना जाता है। विशेषतः पर्वतीय क्षेत्रों यथा उत्तराखंड में उनकी पूजा-अर्चना विशेष रूप से की जाती है। उन्हें गौर भैरव तथा भगवान शिव का अवतार भी माना जाता है। जो व्यक्ति शुद्ध चित्त से गोलू चालीसा का पाठ करता है, उसके सारे कष्ट मिट जाते हैं, मेधा तीव्र होती है और उसके लिए सभी सुखों का द्वार खुल जाता है। पढ़ें गोलू चालीसा–

यह भी पढ़ें गोलू देवता की आरती

॥ दोहा ॥
बुद्धिहीन हूँ नाथ मैं, 
करो बुद्धि का दान।
सत्य न्याय के धाम तुम, 
हे गोलू भगवान॥

जय काली के वीर सुत, 
हे गोलू भगवान।
सुमिरन करने मात्र से, 
कटते कष्ट महान॥

जप कर तेरे नाम को, 
खुले सुखों के द्वार।
जय जय न्याय गौरिया 
नमन करे स्वीकार॥

॥ चौपाई ॥
जय जय ग्वेल महाबलवाना।
हम पर कृपा करो भगवाना॥

न्याय सत्य के तुम अवतारा।
दुखियों का दुख हरते सारा॥

द्वार पे आके जो भी पुकारे।
मिट जाते पल में दुख सारे॥

तुम जैसा नहीं कोई दूजा।
पुनित होके भी बिन सेवा पूजा॥

शरण में आये नाथ तिहारी।
रक्षा करना हे अवतारी॥

माँ की सौत थी अत्याचारी।
तुमको कष्ट दिये अतिभारी॥

झाड़ी में तुमको गिरवाया।
विविध भांतिथा तुम्हे सताया॥

नदी मध्य जल में डुबवाया।
फिर भी मार तुम्हें नहीं पाया॥

सरल हृदय था धेवरहे का।
हरिपद रति बहुनिगुनविवेका॥

भाना नाम सकल जग जाना।
जल में देख बाल भगवाना॥

मन प्रसन्न तन कुलकित भारी।
बोला जय हे नाथ तुम्हारी॥

कर गयी बालक गोद उठायो।
हृदय लगा किहीं अति सुख पायो॥

मन प्रसन्न मुख वचन न आवा।
मन हूँ महानिधि धेवर पावा॥

उरततेहि शिशु द्रिह ले आयो।
नाम गौरिया तब रखवायो॥

सकल काज तज शिशु संगरहयी।
देखी बाल लीला सुख लहयी॥

करत खेल या चरज अनेका।
देखी चकित हुई बुद्धि विवेका॥

ध्यालु कथा सुनी जब काना।
देखन चले ग्वेल भगवाना॥

देखनपति बालक मुस्काया।
जन्मकाल यें कांड सुनाया॥

सौतेली जननी की करनी।
ग्वेल पति संग मुख सब बरनी॥

निपति ग्वेल निज हृदय लगायो।
प्रेम पुरत नय नन जल पायो॥

चल हूँ तात अब निजरज धामी।
दंड देव में सातों: रानी॥

काट – काट सिर कठिन कृपाना।
कुटिल नारी हरि लेहूँ में प्राणा॥

हृदय कम्प ऊपजा अति क्रोधा।
दंड देहु सुत नारी अबोधा॥

सुन हूँ तात एक बात हमारी।
क्षमा करोहुँ ये सब नारी बिचारी॥

हम ही देखी होई मृतक समाना।
जब लगी जियें पड़ी पछताना॥

अयशतात केहि कारण लेहूँ।
मात सौत कह दंड न देहुँ॥

दया वन्त प्रिय ग्वेल सुझाना।
मनुज नहीं तुम देव महाना॥

अमर सदा हो नाम तुम्हारा।
ग्वेल गौरिया गोलू प्यारा॥

राज करहुँ चम्पावत वीरा।
हरहुँ तात जन-जन की पीरा॥

मात – पिता भय धन्य तुम्हारें।
उदय आज हुए पुण्य हमारे॥

पितुआ ज्ञाधर सविनय शीशा।
ग्वेल बनें चम्पावत ईशा॥

सत्य न्याय है तुम्हें प्यारा।
तीनों हित तुमने कनधारा॥

दुखियों के दुख देखन पाते।
सुनी पुकार तुम उस थल जाते॥

विश्व विविध है न्याय तुम्हारे।
निर्बल के तुम एक सहारे॥ 

चितई नमला मंदिर तेरे।
बजते घंटे जहाज घनेरे॥

घोड़ाखाल प्रिय धाम तुम्हारा।
चमड़खान तुमको अति प्यारा॥

ताड़ीखेत में महिमा न्यारी।
चम्पावत रजधानी प्यारी॥

गाँव – गाँव में थान तुम्हारें।
न्याय हेतु जन तुम ही पुकारें॥

सदा कृपा करना हे स्वामी।
ग्वेल देव हे अन्तर्यामी॥

ये दस बार पाठ कर जोई।
विपदा टरें सदा सुख होई॥

॥ दोहा ॥
जय गोलू जय गौरिया, 
जय काली के लाल।
मौसानी ना कर सकी, 
तेरा बांका बाल॥

सुमिरन करके नाम का, 
मिटते कष्ट हजार।
जय हे न्यायी देवता, 
हे गोलू अवतार॥

विदेशों में बसे कुछ हिंदू स्वजनों के आग्रह पर गोलू चालीसा (Golu Chalisa) को हम रोमन में भी प्रस्तुत कर रहे हैं। हमें आशा है कि वे इससे अवश्य लाभान्वित होंगे। पढ़ें गोलू चालीसा रोमन में–

॥ dohā ॥
buddhihīna hū~ nātha maiṃ,
karo buddhi kā dāna।
satya nyāya ke dhāma tuma,
he golū bhagavāna॥

jaya kālī ke vīra suta,
he golū bhagavāna।
sumirana karane mātra se,
kaṭate kaṣṭa mahāna॥

japa kara tere nāma ko,
khule sukhoṃ ke dvāra।
jaya jaya nyāya gauriyā
namana kare svīkāra॥

॥ caupāī ॥
jaya jaya gvela mahābalavānā।
hama para kṛpā karo bhagavānā॥

nyāya satya ke tuma avatārā।
dukhiyoṃ kā dukha harate sārā॥

dvāra pe āke jo bhī pukāre।
miṭa jāte pala meṃ dukha sāre॥

tuma jaisā nahīṃ koī dūjā।
punita hoke bhī bina sevā pūjā॥

śaraṇa meṃ āye nātha tihārī।
rakṣā karanā he avatārī॥

mā~ kī sauta thī atyācārī।
tumako kaṣṭa diye atibhārī॥

jhāड़ī meṃ tumako giravāyā।
vividha bhāṃtithā tumhe satāyā॥

nadī madhya jala meṃ ḍubavāyā।
phira bhī māra tumheṃ nahīṃ pāyā॥

sarala hṛdaya thā dhevarahe kā।
haripada rati bahunigunavivekā॥

bhānā nāma sakala jaga jānā।
jala meṃ dekha bāla bhagavānā॥

mana prasanna tana kulakita bhārī।
bolā jaya he nātha tumhārī॥

kara gayī bālaka goda uṭhāyo।
hṛdaya lagā kihīṃ ati sukha pāyo॥

mana prasanna mukha vacana na āvā।
mana hū~ mahānidhi dhevara pāvā॥

uratatehi śiśu driha le āyo।
nāma gauriyā taba rakhavāyo॥

sakala kāja taja śiśu saṃgarahayī।
dekhī bāla līlā sukha lahayī॥

karata khela yā caraja anekā।
dekhī cakita huī buddhi vivekā॥

dhyālu kathā sunī jaba kānā।
dekhana cale gvela bhagavānā॥

dekhanapati bālaka muskāyā।
janmakāla yeṃ kāṃḍa sunāyā॥

sautelī jananī kī karanī।
gvela pati saṃga mukha saba baranī॥

nipati gvela nija hṛdaya lagāyo।
prema purata naya nana jala pāyo॥

cala hū~ tāta aba nijaraja dhāmī।
daṃḍa deva meṃ sātoṃ: rānī॥

kāṭa – kāṭa sira kaṭhina kṛpānā।
kuṭila nārī hari lehū~ meṃ prāṇā॥

hṛdaya kampa ūpajā ati krodhā।
daṃḍa dehu suta nārī abodhā॥

suna hū~ tāta eka bāta hamārī।
kṣamā karohu~ ye saba nārī bicārī॥

hama hī dekhī hoī mṛtaka samānā।
jaba lagī jiyeṃ paड़ī pachatānā॥

ayaśatāta kehi kāraṇa lehū~।
māta sauta kaha daṃḍa na dehu~॥

dayā vanta priya gvela sujhānā।
manuja nahīṃ tuma deva mahānā॥

amara sadā ho nāma tumhārā।
gvela gauriyā golū pyārā॥

rāja karahu~ campāvata vīrā।
harahu~ tāta jana-jana kī pīrā॥

māta – pitā bhaya dhanya tumhāreṃ।
udaya āja hue puṇya hamāre॥

pituā jñādhara savinaya śīśā।
gvela baneṃ campāvata īśā॥

satya nyāya hai tumheṃ pyārā।
tīnoṃ hita tumane kanadhārā॥

dukhiyoṃ ke dukha dekhana pāte।
sunī pukāra tuma usa thala jāte॥

viśva vividha hai nyāya tumhāre।
nirbala ke tuma eka sahāre॥

citaī namalā maṃdira tere।
bajate ghaṃṭe jahāja ghanere॥

ghoड़ākhāla priya dhāma tumhārā।
camaड़khāna tumako ati pyārā॥

tāड़īkheta meṃ mahimā nyārī।
campāvata rajadhānī pyārī॥

gā~va – gā~va meṃ thāna tumhāreṃ।
nyāya hetu jana tuma hī pukāreṃ॥

sadā kṛpā karanā he svāmī।
gvela deva he antaryāmī॥

ye dasa bāra pāṭha kara joī।
vipadā ṭareṃ sadā sukha hoī॥

॥ dohā ॥
jaya golū jaya gauriyā,
jaya kālī ke lāla।
mausānī nā kara sakī,
terā bāṃkā bāla॥

sumirana karake nāma kā,
miṭate kaṣṭa hajāra।
jaya he nyāyī devatā,
he golū avatāra॥

सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: यह सामग्री सुरक्षित है !!