नवल सिंह भदौरिया – कवि परिचय

नाम – नवल सिंह भदौरिया

उपनाम – ‘नवल’

जन्म-स्थान – ग्राम ठा. ज्वालासिंह की गढ़ी मौजा-रामपुर, चन्द्रसैनी, तहसील बाह, जनपद – आगरा (उत्तर प्रदेश)

जन्म-तिथि – 25 जून सन् 1924 ई.

पिता – स्व. ठा. रूपसिंह भदौरिया

शिक्षा – श्री नवल सिंह भदौरिया की प्रारम्भिक शिक्षा प्राइमरी पाठशाला रामपुर चन्द्रसैनी में हुई। मिडिल तक की शिक्षा तहसील स्तर के मिडिल स्कूल बाह में हुई। इण्टरमीडिएट तक की शिक्षा दामोदर इण्टर कॉलेज, होलीपुरा (आगरा) में ग्रहण की। बी. ए., एम. ए. हिन्दी, एम. ए. संस्कृत की परीक्षायें शिक्षक परीक्षार्थी के रूप में आगरा विश्वविद्यालय से तथा साहित्य रत्न की परीक्षा हि. सा. स. प्रयाग से उत्तीर्ण की।

सम्मान – अखिल भारतीय ब्रज साहित्य संगम, मथुरा द्वारा ‘ब्रजविभूति’ की उपाधि से सम्मानित।

आजीविका – इण्टर परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ही दामोदर इण्टर कॉलेज में शिक्षक के रूप में नियुक्ति और 30 जून 1986 ई. को प्रवक्ता पद से अवकाश ग्रहण।

काव्य रचना – सन् 1942 ई. से ही प्रारम्भ। श्री नवल सिंह भदौरिया की प्रारम्भिक रचनाओं में देश की दासता से असन्तोष, क्रान्ति का स्वर मुखरित। वीर रस से ओत-प्रोत देशप्रेम की भावना। तत्पश्चात् प्रेम-शृंगार, व्यंग्य और भक्ति की रचनायें भी।

हिन्दी खड़ी बोली और ब्रजभाषा दोनों में ही काव्य रचनायें। ब्रज भाषा की रचनायें आकाशवाणी मथुरा से प्रसारित। गीत तथा कवितायें पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित । लोकगीत, मुक्तक और गज़लों को भी भावाभिव्यक्ति का माध्यम बनाया मंच के योग्य कई नाटक लिखकर उनका सफल मंचन कराने वाले कुशल निर्देशक के रूप में प्रख्यात। ‘साहित्य संगम’ बाह की साहित्यिक संस्था के संस्थापक। कवि सम्मेलनों में काव्य पाठ की अलग पहचान। हिन्दी की समस्त विधाओं गीत, गज़ल, छन्द, सवैया, लोकगीत, मुक्त छन्द आदि में लेखन। कई खण्ड काव्य तथा काव्य ग्रन्थ अप्रकाशित

कहानी, नाटक, निबन्ध एवं व्याख्यान के सफल लेखक। अनेक पत्र-पत्रिकाओं के सफल सम्पादक, दर्जनों कवियों के प्रेरणास्रोत, जिनकी देश-विदेश में ख्याति है।

वे देह-त्याग के समय छन्दों के माध्यम से ब्रजभाषा में श्रीरामचरित लिखने में संलग्न थे।

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