मेथी के फायदे – Benefits Of Methi In Hindi

मेथी के फायदे अनेक हैं। हरी मेथी एक लाभकारी साग तथा सब्जी है। जबकि मेथी के दाने मसालों के रूप में प्रयुक्त होते हैं। कुल 13-14 मसालों में मेथी का विशेष व अग्रणी स्थान है। यह अनेक दवाइयां बनाने के काम आती है। इसका प्रयोग प्रचुर मात्रा में किया जाता है। जाड़े के दिनों में मेथी के आटे को गेहूं के आटे में मिलाकर लड्डू बनाकर खाए जाते हैं। ये लड्डू रुचिकर व बलदायक होते हैं। अचार और कलौंजी में इसका प्रयोग अग्रणी है। मेथी को अंग्रेजी में Fenugreek कहा जाता है।

यह दोमट मिट्टी में बीजी जाती है। सर्दी का मौसम शुरू होने के दिनों में इसे बीजा जाता है। सर्दी के अन्त के साथ ही इन पौधों पर बारीक फलियां दाने लिये लग चुकी होती हैं। बसंत के मध्य में इसका दाना तैयार होकर, फली फटने लगती है। दोमट मिट्टी के अतिरिक्त काली और मजबूत मिट्टी में भी यह लगाई, उगाई जाती है। कसूर (अब पाकिस्तान में) की मेथी जिसे कसूरी मेथी (Kasuri Methi) के नाम से जाना जाता है, इसे सारा हिन्दुस्तान पसंद करता रहा है। उस मेथी की तो पत्ती सुखाकर, पैकेट बन्द बेची जाती है।

इसका दाना पीला, वजनी तथा तिकोना होता है। यह अन्य सभी मसालों से कठोर होती है। इसमें चिकना पदार्थ होता है जो भिगोने तथा उबालने के बाद पानी में आ जाता हैं।

दाल, सब्जियों के अलावा अचार, कलौंजी में भी इसका प्रयोग होता है। औषधि गुण बहुत होने के कारण मेथी के फायदे और भी बढ़ जाते हैं। अनेक रोगों में मेथी स्वतन्त्र रूप से प्रयोग में लाई जाती है। एलोपैथी दवाइयों के लिए भी मेथी का प्रयोग होता है। देसी दवाइयों में तो निरन्तर प्रयुक्त हो ही रहा है।

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Kasoori Methi Ke Fayde – मेथी को वैद्यराज कहना गलत नहीं

मेथी के फायदे और संक्षेप में कुछ प्रयोग दिए जा रहे हैं–

(1) यदि कमर-दर्द अक्सर बना रहे, मेथी के बने लड्डू के सेवन से 30-35 दिनों में ही पूर्ण लाभ होगा।

(2) जहां कहीं दर्द रहता हो। मेथी के तेल की मालिश करें। शीघ्र लाभ होगा। विशेषकर कमर व पीठ पर।

(3) अांखें आने लगें तो गर्मी का प्रकोप शांत किया जा सकता है। मेथी का अंजन आंख में लगाने से दो ही दिनों में लाभ होगा। पीतल की थाली पर सरसों के शुद्ध तेल से कुछ सरसों के दाने रगड़ें हाथ से ही। 20-25 मिनट में अंजन तैयार हो जाएगा। इसे आँख में लगाया जा सकता है। इसे बनाकर सीप में रखा जा सकता है।

(4) भूख कम लगे। भोजन न पचे। खट्टे डकार आएं। शुद्ध देसी घी में मेथी धीरे-धीरे भूनें। लाल होते ही उतार लें। इसे पीसकर छान लें। प्रतिदिन प्रातः शहद के साथ यह चूर्ण लेने से मंदाग्नि पर काबू पाया जा सकता है।

(5) यदि किसी का पुरुषत्व समाप्त हो गया हो और हर प्रकार की कमजोरी महसूस होने लगे तथा गृहस्थ बिगड़ने लगे तो मेथी से बड़ा डॉक्टर कोई नहीं। एक किलो मेथी को डेढ़ किलो गाय के दूध में डालकर रात भर चांदनी में रख दें। सुबह मेथी निकालकर सुखा लें। इसे बारीक पीसकर छान लें। 250 ग्राम सूखा सेमल कुचल कर दो किलो पानी में काढ़ा बनाएं। जब एक तिहाई रह जाए तो कपड़छान कर लें।

एक किलो गाय का दूध लेकर, उसमें यह पानी व मेथी का पाउडर घोल लें। इसे सुखाकर बरफी/खोया बना लें। 150 ग्राम देसी घी में यह खोया भूनें। इसे ठंडा कर, डेढ़ किलो चीनी में मिलाकर खाने से वीर्य गाढ़ा होगा और पुरुषत्व लौट आएगा तथा कमजोरी दूर होगी।

(6) इसके दानों के काठे में शहद मिलाकर पीने से छाती के सब रोगों में लाभ होता है।

(7) बवासीर में भी यह अचूक दवा का काम करती है। मेथी के दानों का काढ़ा बनाकर पीने से या दूध में डालकर पीने से बवासीर में अत्यन्त लाभ होता है।

(8) मेथी के पत्तों का पुलटिस बनाकर बांधने से चोट की सूजन खत्म होती है।

(9) इसके पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होती है।

(10) बदगांठ को बिठाने के लिए इसके दानों और असालू को पीसकर लेप करें। यह एक सरल इलाज है।

(11) यदि कान से पीप बहता हो तो मेथी के दानों को गाय के दूध मे पीसकर, छानकर, कुनकुना करके कान में टपकाने से आराम मिलेगा।

(12) प्रसूता स्त्री के लिए मेथी का विधिवत् सेवन बहुत जरूरी है। गर्भाशय की गन्दगी दूर करने, इसे साफ और शुद्ध करने के लिए मेथी के दानों को अन्य कुछ चीजों के साथ पाक बनाकर देना चाहिए। उसकी भूख भी खुल जाएगी तथा दस्त साफ होंगे।

(13) यदि शरीर में बाहरी जलन रहती हो तो इसके पत्तों को पीसकर लेप करें। शीघ्र लाभ होगा।

(14) मेथी के पत्तों का रस देने से पित्त-ज्वर में शांति मिलती है।

(15) यदि आमातिसार से परेशान हों तो मेथी के पत्तों को घी में तलकर खाने से लाभ होता है।

(16) यदि कब्ज से परेशान रहते हों तो मेथी से आसान इलाज और कोई नही। मेथी के पत्तों का साग, तरकारी, भुजिया बनाकर खाएं। ठीक हो जाएंगे।

(17) यदि गालों पर सूजन आ जाए तो इसे उतारने के लिए मेथी के दाने और जौ के आटे को सिरके में पीस लें। गालों पर पतला लेप करें।

(18) किसी भी अंग के जल जाने से, फफोले न हों और पीड़ित अंग को शांति मिले, मेथी के दानों को पानी में पीस लें। जले अंग पर लेप करें।

(19) यदि शरीर में अन्दर जलन हो रही हो, अन्तर्दाह की शिकायत हो तो मेथी के पत्तों को पीसकर, ठंडाई की तरह पेयजल बनाकर पी लें। शांति मिलेगी।

(20) यदि शरीर के किसी भाग में जलन और सूजन लगे तो मेथी के पत्तों को पीसकर लेप करें। फायदा होगा।

(21) मेथी के दानों को लें। कूटकर फांट बनाकर देवें। रक्तातिसर के रोगी का रक्त गिरना बन्द हो जाएगा। पोटी का रंग भी ठीक होने लगेगा।

(22) मान लो पेट में अक्सर गैस बनती है। खाने को मन नहीं करता। हर चीज में अरुचि होने लगी है। हाजमा भी ठीक नहीं रहता। सुबह एक कप मेथी की चाय, दो सप्ताह तक लेने से ये सारी दिक्कतें दूर हो जाएंगी।। (मेथी की चाय और चटनी बनाने की विधियां आगे दी जा रही हैं।)

(23) यदि पत्नी असन्तुष्ट रहने लगे। आपकी सम्भोग शक्ति में कमी आ जाए तो मेथी आपका सहारा बन सकती है और घर में नई खुशी लौट सकती है।

(24) सुबह और सोते समय इसकी बर्फी का एक टुकड़ा एक गिलास गुनगुने दूध के साथ खाना शुरू कर दें। यह कोर्स केवल डेढ़ महीना लगातार करना चाहिए। पुरुषत्व लौट आएगा। (बर्फी बनाने का तरीका आगे दिया जा रहा है।) इसी के साथ-साथ एक और उपाय भी करें-जो नीचे दिया जा रहा हैं।

(25) ‘मेथी के कपड़े’ को अकरकरा के तेल में भिगोकर रात के समय अपने लिंग पर बांध दें। दो घंटों तक बंधा रहे। (इसे बनाने का तरीका भी आगे दिया गया है।)

आइए जानते हैं मेथी से जुड़ी कुछ विधियां–

मेथी की चाय (Fenugreek Tea) बनाने का तरीका

इसे हल्का भूनकर चूर्ण बना लें। अधिक बारीक न करें। दो कप चाय में एक चम्मच इस पिसे मोटे पाउडर की डालकर उबालें। जब पानी आधा सूख जाए तो इसे उतार लें। छान-पुनकर, आधे नींबू का रस डालें। जब पीने योग्य तापमान हो जाए तो दो चम्मच शहद भी डाल लें। इससे बहुत फायदे होते हैं।

चटनी बनाने का तरीका Methi Ki Chatni

मेथी के फायदे इसकी चटनी बनाकर और भी बढ़ जाते हैं, क्योंकि इसमें मेथी के अतिरिक्त और भी बहुत-सी उपयोगी वस्तुएं डाली जाती हैं।

सामान–एक चम्मच मेथी का भुना हुआ चूर्ण। तीन-तीन माशे सूखा आंवला, काली मिर्च, सौंठ, अजवायन, काला नमक, 5 दाने खजूर, पांच तोले दही तथा एक तोला चीनी।

बनाने का तरीका–साफ खजूर की गुठली अलग कर दें। ऊपर की सब चीजों को एक साथ सिल पर पीस लें। इसे दही में मिला लें।

प्यास शांत होना, पित्त व वायु की वृद्धि को रोकना, खाने-पीने में रुचि पैदा करना तथा पाचन शक्ति को बढ़ाना इसके लाभ हैं।

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मेथी की बर्फी बनाना Methi Ki Barfi

सामान–मेथी एक सेर। गाय का दूध डेढ़ सेर। सेमल के सूखे कन्द एक पाव। पानी दो सेर। दूध एक सेर और भी मिलाया जा सकता है। कुल अढाई सेर। घी आधा पाव। खांड़ 2 सेर। एक सेर सिंघाड़े के कच्चे फलों का रस। सौंठ, काली मिर्च, पीपल, अकरकरा, तुलसी की जड़, कान्त लोह भस्म, कुलंजन, एक-एक तोला सातों चीजें।

तरीका–डेढ़ सेर दूध में यह मेथी चूर्ण रात को भिगोकर रख दें। इसे छानकर सुखा लें। इसे पीसकर छान लें बिलकुल बारीक। सेमल के कन्द को कूटकर पानी में भिगो दें। अब इसका काढ़ा बना लें। जब पानी एक चौथाई रह जाए (आधा सेर के करीब), इस काढ़े को छान लें। इस काढ़े की एक सेर दूध में डालकर मिला दें। इसी में मेथी का तैयार किया चूर्ण घोलकर, आंच पर सुखाकर खोया तैयार कर लें।

अब आधा पाव घी में खोये को भून लें। इसे ठंडा होने दें। अब दो सेर खांड़ को एक सेर सिंघाड़े के कच्चे फलों के रस में एकतार की चाशनी तैयार करें। अब इसमें मेथी से तैयार खोये को डालें। इसे आंच पर ही तैयार कर लें। जैसे ही तैयार हो जाए, इसमें सोंठ आदि की सातों चीजों का बारीक चूर्ण मिला दें। इसे घी से चुपड़ी थाली पर निकालकर ठंडी कर, टुकड़ियां बना लें।

मेथी का कपड़ा तैयार करना  Methi Ka Kapda

इसे एक छटांक लें। कूटकर एक सेर पानी में भिगो दें। इस घोल मे 8-9 इंच चौड़ा साफ कपड़ा दो फुट लम्बा डालकर भिगो दें। रात भर भीगा रहने दे। सुबह चूल्हे पर काढ़े की तरह पकाएं। कपड़ा भी बीच में ही रहे। एक सेर पानी का जब आधी छटांक ही बचे तो ही आंच से उतारें। जब ठंडा हो जाए तो कपड़े को बिना निचोड़े छाया में ही सुखा लें। इस कपड़े को रोजाना उपर्युक्त विधि से भिगोते, उबालते तथा सुखाते रहें। यह क्रिया एक सप्ताह तक चलती रहे।

इसे लिंग पर बांधे। जैसा पहले बताया गया है। इसमें निम्न अकरकरा के तेल का प्रयोग भी होगा।

अकरकरा का तेल कैसे बनाएँ?  Akarakara Oil

सामान–एक-एक तोला पांच चीजें–(i) बिनौले की गुद्दी, (ii) अकरकरा, (iii) पलाश के बीज, (iv) असगन्ध, (v) सिंघाड़े की गिरी।

20 तोले तिल का तेल। आधा सेर गाय का दूध। कड़ाही। पानी आधा सेर।

बनाने का तरीका–बिनौला आदि पांचों को पानी की मदद से पूरी तरह पीस लें। जब चटनी तैयार हो जाए। इसे अब दूध तथा पानी में घोलकर रखे। कड़ाही में तेल को इतना गरम करें कि धुआं निकलने लगे। इसे एक घंटा तक ठंडा होने के लिए पड़ा रहने दें। अब दूध में घुली दवाइयों को आंच पर पकाएं। जब केवल एक छटांक तेल रह जाए, तो इसे उतार दें। जब ठंडा हो जाए तो इसे छान लें।

अब तैयार किए। मेथी के कपड़े को इस तेल से तर करें। इसे लिंग पर लपेटकर, सूत से बांध दें। इसे डेढ़-दो घण्टे बंधा रखना चाहिए, तभी प्रभाव होगा।

कैसे बनाएं इसका तेल Methi Ka Tel

सामान–मेथी एक किलो (1 KG Methi)। रेंड़ी का तेल 750 ग्राम, पानी 7 किलो। 200 ग्राम मेथी की लुगदी। कड़ाही।

तरीका–कड़ाही में डालकर रेंड़ी का तेल खूब गरम कर लें। तब तक, जब तक धुंआ न निकलने लगे। इसे उतारकर एक घण्टा तक ठंडा होने दें। रात को इसे पानी में भिगोकर रख दें। प्रातः इसे चटनी की तरह पीस लें। इसमें लुगदी (मेथी की) 200 ग्राम डालें। इसमें पानी में कुचली मेथी मिला दे। अब इसे इतना पकाएं कि यह 7-8 किलो सामान केवल 2 किलो रह जाए। जब जल पूरा खत्म हो जाए, और तेल ही नजर आने लगे तो आंच बंद कर दें। ठंडा होने पर छान ले।

इसके प्रयोग से पेट तथा शरीर में बन रही वायु से छुटकारा मिलता है।

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मेथी का लड्डू बनाने की विधि  Methi Ka Laddu

सामान–मेथी 250 ग्राम। दूध 250 ग्राम। घी 50 ग्राम। गेहूं या कनक का आटा 250 ग्राम। थोड़ा घी और भी। चीनी एक किलो। पीपल, काली मिर्च, सोंठ, कुलंजन तथा अजवायन सभी 10-10 ग्राम।

तरीका–रात के समय दूध और मेथी भिगोकर रख दें। मेथी को छानकर धूप मे सुखा, पीस लें। इसे घी में भून लें। अलग से कनक के आटे को घी में भून ले।

अब (इन दोनों) मेथी और गेहूं के भूने हुए आटे को मिला लें। चीनी की एक तार चाशनी तैयार करें। पीपल आदि पांचों चीजों को पीसकर चूर्ण तैयार कर ले। पीपल आदि पांचों चीजों को पीसकर चूर्ण तैयार कर लें। इस चूर्ण की अलग रख लें। उधर चाशनी में दोनों आटों को मिलाकर भून लें। इसमें इन पांचों चीजों का चूर्ण डाल दें। इसे ठीक तरह मिलाकर, ठंडा कर, लड्डू बना लें। कोई 10-12 ग्राम प्रति लड्डू का वजन हो।

इस लड्डू को प्रातः व सायं खाते रहें। कोई डेढ़ महीना तक नियमित खाए। लड्डू के साथ गरम दूध अवश्य लें। इससे वायु के सारे दोष भाग खड़े होंगे तथा कमर की पीड़ा भी खत्म होगी।

इसके गुणों की संक्षेप में चर्चा Benefits Of Methi

मेथी की गुणों के आधार पर भोजन तथा दवाइयों में उपयोगिता नकारी नही जा सकती। इसमें इतने गुण हैं कि यह मनुष्य के शरीर के लिए वैद्य का काम करती है।

यह वायुनाशक है। तासीर में गरम है। मंदाग्नि वालों के लिए बहुत लाभकारी है। यदि भोजन करने को मन न करे, मगर भूख हो, तो मेथी के छौंक वाली दाल-सब्जी का प्रयोग करने से, एक ही सप्ताह में पूर्ण लाभ होता है। भोजन में स्वाद बनता है। यह भोजन को रुचिकर बनाती है। इसका स्वाद कड़वा होता है। तेज तथा चिपचिपी होती है। पित्त को बढ़ाने वाली होती है।

यह हरी पत्तेदार अवस्था में अथवा सूखी दानेदार अवस्था में, दोनों खूब उपयोगी होती हैं। सर्दियों में हरी सब्जी मिलती है जो साग, भाजी के तौर पर अवश्य खानी चाहिए। कस्तूरी मेथी में अत्यधिक गुण निहित हैं।

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न

मेथी खाने से क्या नुकसान होता है?

कभी-कभी इसके उपयोग से पेट से जुड़ी समस्याएँ हो सकती हैं, जैसे कि खट्टी डकार आना, अपच और एसिडिटी आदि। इसका मुख्य कारण है मात्रा में आवश्यकता से अधिक मेथी खाना। ऐसा करने से बचें।

सुबह खाली पेट मेथी खाने के क्या फायदे हैं?

मेथी वायु-नाशक है। इसे सुबह-सुबह खाली पेट लेने से अपच की समस्या में लाभ मिलता है, भूख बढ़ती है और एसिडिटी में फ़ायदा होता है।

मेथी की चटनी खाने से क्या लाभ होता है?

मेथी की चटनी से प्यास शांत होती है, पित्त और वायु की वृद्धि रुकती है, खाने-पीने में रुचि पैदा होने लगती है व हाज़मा सुधरता है।

मेथी से सूजन कैसे ठीक होती है?

शरीर के जिस अंग में सूजन हो, उसपर मेथी को पीसकर लेप करें। सूजन धीरे-धीरे कम होने लगती है।

क्या मेथी दाने से वजह कम होता है?

हाँ, मेथी दाना वजन कम करने में उपयोगी है। खाली पेट इसे गर्म पानी के साथ लेने से तेज़ी-से फैट बर्न होता है और मोटापा कम होता है।

2 thoughts on “मेथी के फायदे – Benefits Of Methi In Hindi

  • January 24, 2021 at 8:43 pm
    Permalink

    very helpful content.. thanks for share it

    Reply
    • January 25, 2021 at 11:37 am
      Permalink

      मनोज जी, प्रोत्साहित करने के लिए धन्यवाद। इसी तरह हिंदीपथ पढ़ते रहें।

      Reply

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