प्रेतराज चालीसा – Pretraj Chalisa

प्रेतराज चालीसा सभी दुःखों व कष्टों को हरने वाली है। इसका गायन हृदय की इच्छाओं की पूर्ति करता है। जो भी भक्त प्रेम से प्रेतराज चालीसा गाता है, उसके लिए कुछ भी अप्राप्य नहीं रहता। प्रेतराज सरकार अर्थात ऋषि नीलासुर बालाजी हनुमान के महामंत्री हैं।

आकाशगामी सूक्ष्म शक्तियों पर उनका अधिकार है। प्रेतराज चालीसा (Pretraj Chalisa) का पाठ कर अपना जीवन धन्य बनाएँ–

॥ दोहा ॥
गणपति की कर वंदना,
गुरु चरनन चितलाय।
प्रेतराज जी का लिखूं,
चालीसा हरषाय॥

जय जय भूताधिप प्रबल,
हरण सकल दुःख भार।
वीर शिरोमणि जयति,
जय प्रेतराज सरकार॥

॥ चौपाई ॥
जय जय प्रेतराज जग पावन,
महा प्रबल त्रय ताप नसावन।

विकट वीर करुणा के सागर,
भक्त कष्ट हर सब गुण आगर।

रत्न जटित सिंहासन सोहे,
देखत सुन नर मुनि मन मोहे।

जगमग सिर पर मुकुट सुहावन,
कानन कुण्डल अति मन भावन।

धनुष कृपाण बाण अरु भाला,
वीरवेश अति भृकुटि कराला।

गजारुढ़ संग सेना भारी,
बाजत ढोल मृदंग जुझारी।

छत्र चंवर पंखा सिर डोले,
भक्त बृन्द मिलि जय जय बोले।

भक्त शिरोमणि वीर प्रचण्डा,
दुष्ट दलन शोभित भुजदण्डा।

चलत सैन काँपत भूतलहू,
दर्शन करत मिटत कलि मलहू।

घाटा मेंहदीपुर में आकर,
प्रगटे प्रेतराज गुण सागर।

लाल ध्वजा उड़ रही गगन में,
नाचत भक्त मगन ही मन में।

भक्त कामना पूरन स्वामी,
बजरंगी के सेवक नामी।

इच्छा पूरन करने वाले,
दुःख संकट सब हरने वाले।

जो जिस इच्छा से आते हैं,
वे सब मन वांछित फल पाते हैं।

रोगी सेवा में जो आते,
शीघ्र स्वस्थ होकर घर जाते।

भूत पिशाच जिन्न वैताला,
भागे देखत रूप कराला।

भौतिक शारीरिक सब पीड़ा,
मिटा शीघ्र करते है क्रीड़ा।

कठिन काज जग में हैं जेते,
रटत नाम पूरन सब होते।

तन मन धन से सेवा करते,
उनके सकल कष्ट प्रभु हरते।।

हे करुणामय स्वामी मेरे,
पड़ा हुआ हूँ चरणों में तेरे।

कोई तेरे सिवा न मेरा,
मुझे एक आश्रय प्रभु तेरा।

लज्जा मेरी हाथ तिहारे,
पड़ा हूँ चरण सहारे।

या विधि अरज करे तन मन से,
छुटत रोग शोक सब तन से।

मेंहदीपुर अवतार लिया है,
भक्तों का दुःख दूर किया है।

रोगी, पागल सन्तति हीना,
भूत व्याधि सुत अरु धन हीना।

जो जो तेरे द्वारे आते,
मन वांछित फल पा घर जाते।

महिमा भूतल पर है छाई,
भक्तों ने है लीला गाई।

महन्त गणेश पुरी तपधारी,
पूजा करते तन मन वारी।

हाथों में ले मुगदर घोटे,
दूत खड़े रहते हैं मोटे।

लाल देह सिन्दूर बदन में,
काँपत थर-थर भूत भवन में।

जो कोई प्रेतराज चालीसा,
पाठ करत नित एक अरु बीसा।

प्रातः काल स्नान करावै,
तेल और सिन्दूर लगावै।

चन्दन इत्र फुलेल चढ़ावै,
पुष्पन की माला पहनावै।

ले कपूर आरती उतारै,
करै प्रार्थना जयति उचारै।

उनके सभी कष्ट कट जाते,
हर्षित हो अपने घर जाते।

इच्छा पूरण करते जनकी,
होती सफल कामना मन की।

भक्त कष्ट हर अरिकुल घातक,
ध्यान धरत छूत सब पातक।

जय जय जय प्रेताधिप जय,
जयति भूपति संकट हर जय।

जो नर पढ़त प्रेत चालीसा,
रहत कबहूँ दुख लवलेशा।

कह भक्त ध्यान धर मन में,
प्रेतराज पावन चरणन में।

॥ दोहा ॥
दुष्ट दलन जग अघ हरन,
समन सकल भव शूल।
जयति भक्त रक्षक प्रवल,
प्रेतराज सुख मूल॥

विमल वेश अंजिन सुवन,
प्रेतराज बल धाम।
बसहु निरंतर मम हृदय,
कहत भक्त सुखराम॥

विदेशों में बसे कुछ हिंदू स्वजनों के आग्रह पर प्रेतराज चालीसा (Pretraj Chalisa) को हम रोमन में भी प्रस्तुत कर रहे हैं। हमें आशा है कि वे इससे अवश्य लाभान्वित होंगे। पढ़ें प्रेतराज चालीसा चालीसा रोमन में–

Read Pretraj Chalisa

॥ dohā ॥
gaṇapati kī kara vaṃdanā,
guru caranana citalāya।
pretarāja jī kā likhūṃ,
cālīsā haraṣāya॥

jaya jaya bhūtādhipa prabala,
haraṇa sakala duḥkha bhāra।
vīra śiromaṇi jayati,
jaya pretarāja sarakāra ।।

॥caupāī॥
jaya jaya pretarāja jaga pāvana,
mahā prabala traya tāpa nasāvana।

vikaṭa vīra karuṇā ke sāgara,
bhakta kaṣṭa hara saba guṇa āgara।

ratna jaṭita siṃhāsana sohe,
dekhata suna nara muni mana mohe।

jagamaga sira para mukuṭa suhāvana,
kānana kuṇḍala ati mana bhāvana।

dhanuṣa kṛpāṇa bāṇa aru bhālā,
vīraveśa ati bhṛkuṭi karālā।

gajāruḍha़ saṃga senā bhārī,
bājata ḍhola mṛdaṃga jujhārī।

chatra caṃvara paṃkhā sira ḍole,
bhakta bṛnda mili jaya jaya bole।

bhakta śiromaṇi vīra pracaṇḍā,
duṣṭa dalana śobhita bhujadaṇḍā।

calata saina kā~pata bhūtalahū,
darśana karata miṭata kali malahū।

ghāṭā meṃhadīpura meṃ ākara,
pragaṭe pretarāja guṇa sāgara।

lāla dhvajā uḍa़ rahī gagana meṃ,
nācata bhakta magana hī mana meṃ।

bhakta kāmanā pūrana svāmī,
bajaraṃgī ke sevaka nāmī।

icchā pūrana karane vāle,
duḥkha saṃkaṭa saba harane vāle।

jo jisa icchā se āte haiṃ,
ve saba mana vāṃchita phala pāte haiṃ।

rogī sevā meṃ jo āte,
śīghra svastha hokara ghara jāte।

bhūta piśāca jinna vaitālā,
bhāge dekhata rūpa karālā।

bhautika śārīrika saba pīḍa़ā,
miṭā śīghra karate hai krīḍa़ā।

kaṭhina kāja jaga meṃ haiṃ jete,
raṭata nāma pūrana saba hote।

tana mana dhana se sevā karate,
unake sakala kaṣṭa prabhu harate।।

he karuṇāmaya svāmī mere,
paḍa़ā huā hū~ caraṇoṃ meṃ tere।

koī tere sivā na merā,
mujhe eka āśraya prabhu terā।

lajjā merī hātha tihāre,
paḍa़ā hū~ caraṇa sahāre।

yā vidhi araja kare tana mana se,
chuṭata roga śoka saba tana se।

meṃhadīpura avatāra liyā hai,
bhaktoṃ kā duḥkha dūra kiyā hai।

rogī, pāgala santati hīnā,
bhūta vyādhi suta aru dhana hīnā।

jo jo tere dvāre āte,
mana vāṃchita phala pā ghara jāte।

mahimā bhūtala para hai chāī,
bhaktoṃ ne hai līlā gāī।

mahanta gaṇeśa purī tapadhārī,
pūjā karate tana mana vārī।

hāthoṃ meṃ le mugadara ghoṭe,
dūta khaḍa़e rahate haiṃ moṭe।

lāla deha sindūra badana meṃ,
kā~pata thara-thara bhūta bhavana meṃ।

jo koī pretarāja cālīsā,
pāṭha karata nita eka aru bīsā।

prātaḥ kāla snāna karāvai,
tela aura sindūra lagāvai।

candana itra phulela caḍha़āvai,
puṣpana kī mālā pahanāvai।

le kapūra āratī utārai,
karai prārthanā jayati ucārai।

unake sabhī kaṣṭa kaṭa jāte,
harṣita ho apane ghara jāte।

icchā pūraṇa karate janakī,
hotī saphala kāmanā mana kī।

bhakta kaṣṭa hara arikula ghātaka,
dhyāna dharata chūta saba pātaka।

jaya jaya jaya pretādhipa jaya,
jayati bhūpati saṃkaṭa hara jaya।

jo nara paḍha़ta preta cālīsā,
rahata kabahū~ dukha lavaleśā।

kaha bhakta dhyāna dhara mana meṃ,
pretarāja pāvana caraṇana meṃ।

॥ dohā ॥
duṣṭa dalana jaga agha harana,
samana sakala bhava śūla।
jayati bhakta rakṣaka pravala,
pretarāja sukha mūla॥

vimala veśa aṃjina suvana,
pretarāja bala dhāma।
basahu niraṃtara mama hṛdaya,
kahata bhakta sukharāma॥

सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

2 thoughts on “प्रेतराज चालीसा – Pretraj Chalisa

  • March 22, 2022 at 12:03 pm
    Permalink

    I need the copy to read

    Reply
    • August 9, 2022 at 2:19 pm
      Permalink

      रमेश जी, शीघ्र ही हम आपको इसकी हार्ड कॉपी का लिंक भेजेंगे। आप चाहें तो पीडीएफ डाउनलोड कर बिना इंटरनेट के भी इसे पढ़ सकते हैं।

      Reply

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