<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss
version="2.0"
xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
><channel><title>Bhuvnesh Sharma Archives - हिंदी पथ</title> <atom:link href="https://hindipath.com/tag/bhuvnesh-sharma/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" /><link>https://hindipath.com/tag/bhuvnesh-sharma/</link> <description>हिंदी का संसार</description> <lastBuildDate>Mon, 12 Sep 2022 07:00:59 +0000</lastBuildDate> <language>en-US</language> <sy:updatePeriod> hourly </sy:updatePeriod> <sy:updateFrequency> 1 </sy:updateFrequency> <generator>https://wordpress.org/?v=6.3.10</generator><image> <url>https://hindipath.com/wp-content/uploads/2019/09/HindiPath-Site-Icon-New.png</url><title>Bhuvnesh Sharma Archives - हिंदी पथ</title><link>https://hindipath.com/tag/bhuvnesh-sharma/</link> <width>32</width> <height>32</height> </image> <item><title>सफलता के लिए जीवनदृष्टि व संबंधों की कला सिखाने वाली सर्वश्रेष्ठ पुस्तक</title><link>https://hindipath.com/how-to-win-friends-influence-people-hindi-bhuvnesh-sharma/</link> <comments>https://hindipath.com/how-to-win-friends-influence-people-hindi-bhuvnesh-sharma/#comments</comments> <dc:creator><![CDATA[HindiPath]]></dc:creator> <pubDate>Mon, 26 Nov 2018 09:52:40 +0000</pubDate> <category><![CDATA[पुस्तक चर्चा]]></category> <category><![CDATA[Bhuvnesh Sharma]]></category> <category><![CDATA[Dale Carnegie]]></category> <category><![CDATA[Hindi Books]]></category> <guid
isPermaLink="false">https://hindipath.com/?p=488</guid><description><![CDATA[<p>यूं तो किताबें पढ़ना पिछले कुछ समय में कम हुआ है, पहले जहां कुछ भी जो उपलब्&#x200d;ध हुआ पढ़ लेते</p><p>The post <a
rel="nofollow" href="https://hindipath.com/how-to-win-friends-influence-people-hindi-bhuvnesh-sharma/">सफलता के लिए जीवनदृष्टि व संबंधों की कला सिखाने वाली सर्वश्रेष्ठ पुस्तक</a> appeared first on <a
rel="nofollow" href="https://hindipath.com">हिंदी पथ</a>.</p> ]]></description> <content:encoded><![CDATA[<p><em>यूं तो किताबें पढ़ना पिछले कुछ समय में कम हुआ है, पहले जहां कुछ भी जो उपलब्&#x200d;ध हुआ पढ़ लेते थे वहीं अब चुनिंदा पुस्&#x200d;तकें ही पढ़ता हूं। चुनिंदा पुस्&#x200d;तकें मैं उन्&#x200d;हें मानता हूं जिन्&#x200d;होंने वाकई जीवन को, सोचने के तरीके को गहरे तौर पर प्रभावित किया है और जिनमें लिखी बातों की प्रासंगिकता समय गुजरने के बावजूद कायम रहती है, जब भी उनको पलटें तब पढ़ते पढ़ते कितना समय बीत गया पता ही नहीं लगता।</em></p><p>आज मैं उन्&#x200d;हीं चुनिंदा पुस्&#x200d;तकों में से अपनी एक पसंदीदा पुस्&#x200d;तक के बारे में लिखूंगा। वैसे तो मैंने बहुत सी बेस्&#x200d;टसेलर श्रेणी में आने वाली पुस्&#x200d;तकें पढ़ी हैं पर जब इस पुस्&#x200d;तक को पढ़ा तो समझ में आया कि क्&#x200d;यों ये पुस्&#x200d;तक प्रकाशित होने के लगभग अस्&#x200d;सी वर्ष बाद भी सर्वाधिक पढ़े जाने वाली और बिकने वाली पुस्&#x200d;तकों में गिनी जाती है। विदेशी लेखकों की श्रेणी में मैं इन्&#x200d;हें अपना पसंदीदा लेखक मानता हूं। हालांकि विदेशी शब्&#x200d;द का यहां प्रयोग करना ठीक तो नहीं है क्&#x200d;योंकि कोई भी लेखक किसी देश-विशेष या भाषा-विशेष भर से ही संबंध नहीं रखता। उसकी कही बातें सभी सीमाओं से परे और सबके लिए उपयोगी होती हैं।</p><p>चलिए बात करते हैं उस पुस्&#x200d;तक की जिसका नाम है- ‘हाउ टू विन फ्रेंड्स एण्&#x200d;ड इनफ्लुएंस पीपुल’ और इसके लेखक हैं डेल कारनेगी। इस पुस्&#x200d;तक के हिन्&#x200d;दी अनुवाद की प्रति मेरे पास सबसे पहले एक मित्र के माध्&#x200d;यम से पहुंची। वह मित्र मार्केटिंग की नौकरी किया करते थे और खास बात कि उनकी पुस्&#x200d;तकें या साहित्&#x200d;य पढ़ने में कोई रुचि मैंने नहीं देखी। जब उनके यहां इस पुस्&#x200d;तक को मैंने देखा तो मुझे आश्&#x200d;चर्य हुआ। उन्&#x200d;होंने इस पुस्&#x200d;तक की प्रशंसा की और मुझे भी इसे पढ़ने को दिया। उसके बाद से उनसे मुलाकातें बहुत कम हुईं और पुस्&#x200d;तक मेरे पास ही रखी रही। वे मित्र कहीं बाहर रहने लगे परंतु उनकी पुस्&#x200d;तक अब तक एक अनमोल तोहफे के रूप में रखी है जो कि अनजाने में ही मेरे पास रह गई। बाद में इस पुस्&#x200d;तक की मूलभाषा अंग्रेजी में भी मैंने ये पुस्&#x200d;तक खरीदी हालांकि आज भी मैं इसे हिन्&#x200d;दी में ही पढ़ता हूं।</p><p>इस पुस्&#x200d;तक का हिन्&#x200d;दी अनुवाद ‘लोक व्&#x200d;यवहार’ के नाम से उपलब्&#x200d;ध है। हालांकि हिन्&#x200d;दी में पढ़ते हुए कहीं से ये नहीं लगता कि इसे मूलत: किसी और भाषा में लिखा गया है। इतनी सरल भाषा और इतनी आसानी से समझ में आने वाली यह पुस्&#x200d;तक उन लोगों को भी आकर्षित करती है जो पढ़ने के शौकीन नहीं जैसा कि मेरे मित्र के साथ भी हुआ। इस पुस्&#x200d;तक की असल खासियत है इसकी उपयोगिता। इस पुस्&#x200d;तक को पढ़ने का सुझाव मेरे कार्यक्षेत्र में बहुत ही उम्रदराज मेरे सीनियर ने भी दिया था जिन्&#x200d;होंने लगभग आधी सदी पहले इसे पढ़ा होगा। इसी बात से अंदाजा लग जाता है कि इसमें कुछ तो खास है जो इतना समय गुजरने के बावजूद ये पुरानी नहीं लगती।</p><p>हम अपने जीवन में किस तरह लोगों से व्&#x200d;यवहार करते हैं, उनसे बातचीत करते हैं ये ऐसा विषय है जो हमारे संबंधों, कार्यक्षेत्र, हमारे पारिवारिक और सामाजिक जीवन को बहुत हद तक प्रभावित करता है। अमेरिका के सबसे सफल उद्योगपतियों में से एक जॉन डी. रॉकफेलर ने कहा था कि लोगों से व्&#x200d;यवहार करने की कला भी उसी तरह खरीदी जाने वाली एक वस्&#x200d;तु है जैसे कि शक्&#x200d;कर या कॉफी और मैं इस कला के लिए दुनिया की किसी भी चीज से ज्&#x200d;यादा कीमत देने को तैयार हूं।</p><p>डेल कारनेगी ने कहा है कि जो कला दुनिया की किसी भी चीज से ज्&#x200d;यादा कीमती है, उसे सिखाने के लिए दुनिया के हर कॉलेज में कोर्स चलने चाहिए परंतु मैंने ऐसे किसी कोर्स या कॉलेज का नाम नहीं सुना और जब उन्&#x200d;होंने स्&#x200d;वयं इस पर एक कोर्स बनाने के लिए पुस्&#x200d;तकों की खोज शुरू की तो उन्&#x200d;हें एक भी पुस्&#x200d;तक नहीं मिली और तभी इस विषय पर लिखने की जरूरत उन्&#x200d;हें महसूस हुई।</p><p>हमारे जीवन की सफलता और समृद्धि इस बात पर निर्भर करती है कि लोगों से हम किस तरह से व्&#x200d;यवहार कर रहे हैं। लोग सफल बनना चाहते हैं, लोकप्रिय बनना चाहते हैं, लोगों का चहेता बनना चाहते हैं, उनसे अपनी बात मनवाना चाहते हैं तो ऐसी कौन सी बातें हैं जो हमें अमल में लानी चाहिए इस विषय पर लिखी गई ये सबसे प्रेक्&#x200d;टीकल और सबसे बेहतरीन पुस्&#x200d;तक है। हम अक्&#x200d;सर बहस करते हैं, दूसरों की गलतियां निकालते हैं, उनकी आलोचना करते हैं पर फिर भी बात बनने की बजाय और बिगड़ती जाती है। ऐसे में दूसरे किस तरीके से सोचते हैं और क्&#x200d;या चाहते हैं ये हमें जानना बहुत जरूरी है बजाय इसके कि हम उनके बारे में क्&#x200d;या सोचते हैं।</p><p>मानवीय संबंधों के मनोविज्ञान को समझाने वाली इस आसान सी पुस्&#x200d;तक को पढ़ने का मैं सभी को सुझाव दूंगा। आप चाहे सार्वजनिक जीवन में हो, किसी भी व्&#x200d;यवसाय या क्षेत्र में काम करते हों, आप इसे पढ़कर अपने जीवन को निश्चित तौर पर बेहतर बनाने के गुर सीखेंगे और आपके संबंध चाहे निजी हों, पारिवारिक हों या सामाजिक पहले से अधिक प्रगाढ़ और मधुर होंगे।</p><figure
class="wp-block-image alignright size-full wp-image-490 is-style-rounded"><img
decoding="async" width="100" height="100" src="https://hindipath.com/wp-content/uploads/2018/11/bhuvnesh-sharma.jpg?cde07f&amp;cde07f" alt="भुवनेश शर्मा" class="wp-image-490"/><figcaption><strong>भुवनेश शर्मा</strong></figcaption></figure><blockquote
class="wp-block-quote has-white-color has-text-color"><p>भुवनेश शर्मा हिन्दी के पुराने ब्लॉगर्स में से एक हैं। वे पेशे से अधिवक्ता हैं और पठन-पाठन में गहरी रुचि रखते हैं। भुवनेश ने हिन्दी की कई चर्चित ई-पुस्तकों को एकत्रित कर इंटरनेट पर जन-सामान्य के लिए उपलब्ध कराने का काम किया है। वे अपने विचारों को <a
href="http://hindipanna.blogspot.com/">हिन्दी पन्ना</a> पर लिपिबद्ध करते हैं, हालाँकि अब लंबे अरसे से यहाँ सन्नाटा छाया हुआ है। इस लेख में भुवनेश अपनी प्रिय हिंदी पुस्तक के बारे में चर्चा कर रहे हैं।</p></blockquote><p><strong>&#8212; भुवनेश शर्मा</strong></p><p>The post <a
rel="nofollow" href="https://hindipath.com/how-to-win-friends-influence-people-hindi-bhuvnesh-sharma/">सफलता के लिए जीवनदृष्टि व संबंधों की कला सिखाने वाली सर्वश्रेष्ठ पुस्तक</a> appeared first on <a
rel="nofollow" href="https://hindipath.com">हिंदी पथ</a>.</p> ]]></content:encoded> <wfw:commentRss>https://hindipath.com/how-to-win-friends-influence-people-hindi-bhuvnesh-sharma/feed/</wfw:commentRss> <slash:comments>2</slash:comments> </item> </channel> </rss>