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><channel><title>ताजमहल Archives - हिंदी पथ</title> <atom:link href="https://hindipath.com/tag/taj-mahal/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" /><link>https://hindipath.com/tag/taj-mahal/</link> <description>हिंदी का संसार</description> <lastBuildDate>Mon, 12 Sep 2022 07:38:27 +0000</lastBuildDate> <language>en-US</language> <sy:updatePeriod> hourly </sy:updatePeriod> <sy:updateFrequency> 1 </sy:updateFrequency> <generator>https://wordpress.org/?v=6.3.10</generator><image> <url>https://hindipath.com/wp-content/uploads/2019/09/HindiPath-Site-Icon-New.png</url><title>ताजमहल Archives - हिंदी पथ</title><link>https://hindipath.com/tag/taj-mahal/</link> <width>32</width> <height>32</height> </image> <item><title>ताज महल को लेकर यूरोपियन पर्यटकों के वृत्तान्त</title><link>https://hindipath.com/taj-mahal-related-european-travelers-writings-pn-oak/</link> <comments>https://hindipath.com/taj-mahal-related-european-travelers-writings-pn-oak/#comments</comments> <dc:creator><![CDATA[HindiPath]]></dc:creator> <pubDate>Thu, 19 Dec 2019 14:05:55 +0000</pubDate> <category><![CDATA[इतिहास]]></category> <category><![CDATA[ताजमहल]]></category> <category><![CDATA[मंदिर]]></category> <guid
isPermaLink="false">https://hindipath.com/?p=834</guid><description><![CDATA[<p>इस अध्याय में श्री पी.एन. ओक बात कर रहे हैं अनेक विदेशी पर्यटकों की जिनके ब्यौरे उजागत करते हैं ताज महल का रहस्य और वास्तविकता।</p><p>The post <a
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href="/taj-mahal-is-temple-palace-hindi-summary-pn-oak/">ताज महल: एक शिव मंदिर</a>।</em></p><h4 class="wp-block-heading">टॅव्हरनिए का ब्यौरा</h4><p>टॅव्हरनिए नाम के फ्रांस के एक सर्राफ ने अपनी यात्रा टिप्पणी में उल्लेख किया है कि “शाहजहाँ के मुमताज को ताज-इ-मकान के निकट दफ़नाने का कारण यह था कि वहाँ आने वाले विदेशी यात्री उस दफन स्थल की तारीफ करें। वह ताज-इ-मकान छह चौक वाला बाजार था। लकड़ी न मिलने के कारण शाहजहाँ को कमानों को इंटों के ही आधार देने पड़े। कब्र पर जो रकम खर्च हुई उसमें मचाण का ख़र्चा सर्वाधिक था। कब्र का निर्माण कार्य मेरा उपस्थिति में आरम्भ होकर मेरी उपस्थिति में ही समाप्त हुआ। बीस हजार मज़दूर लगातार 22 वर्ष काम करते रहे।”</p><p>टॅव्हरनिए के पूर्वोक्त कथन का इतिहासकारों ने ग़लत अर्थ लगाया है। टॅव्हरनिए को भारतीय भाषाओं का अज्ञान होने के कारण वह बाजार को ही ताजमहल समझा। उस बाजार में आने वाले विदेशी यात्री जिस मानसिंह मंज़िल को दंग होकर देखते थे उसमें शाहजहाँ ने मुमताज को इसी उद्देश्य से दफनाया कि उस दफनस्थल का सर्वत्र बोलबाला हो। इससे यह बात स्पष्ट है कि एक बड़ा सुन्दर मानसिंह महल वहाँ आरम्भ से ही बना था। वास्तव में ताज-इ-मकान (उर्फ ताजमहल यानि तेजोमहालय) यह उस इमारत का नाम है जिसमें मुमताज की कब्र है। वह अति सुन्दर प्रेक्षणीय गुम्बद वाली इमारत थी। ऐसा स्वयं शाहजहाँ के बादशाहनामे में वर्णन है।</p><p>तथापि एक पराए अनजान सर्राफ यात्री के नाते टॅव्हरनिए बाहरले बाजार को ही ताज-इ-मकान समझकर उसके निकट वाली मुमताज की कब्र विदेशी यात्रियों का मन लुभाया करती ऐसा लिखता है। मचाण के लिए जिस शाहजहाँ को फट्टे, खम्भे आदि प्राप्य नहीं थे वह भला संगमरमरी ताजमहल क्या बनवाएगा! कमानों के ऊपर लगी मूर्तियाँ, संस्कृत शिलालेख आदि उतारकर वहाँ कुरान जड़ देने के लिए कमानों को हजारों ईंटों का आधार देना पड़ा। अतः एक प्रकार से मचाण के रूप में चौड़ी दीवार के आकार की ईंटों की राशि तेजोमहालय के चारों ओर गुम्बद तक खड़ी करनी पड़ी। उस पर खड़े होकर <a
href="/quran-in-hindi/">कुरान</a> जड़ने का खर्चा मामूली था। उसकी तुलना में हजारों ईंटों का चौड़ा उत्तुंग मचाण खड़ा करना बड़ा खर्चीला कार्य था। अतः टॅव्हरनिए ने ठीक ही लिखा है कि कब्र पर जितना खर्चा हुआ उसमें मचाण का खर्चा अत्यधिक था।</p><p>यदि शाहजहाँ संगमरमरी ताजमहल सचमुच बनाता तो उसकी तुलना में मचाण का खर्चा अत्यल्प होता। ताज महल का निर्माण-कार्य टॅव्हरनिए की उपस्थिति में ही आरम्भ हुआ और समाप्त हुआ ऐसा टॅव्हरनिए ने लिखा है। मुमताज सन् 1631 के जून में मरी। किन्तु टॅव्हरनिए भारत में पहली बार सन् 1641 में पहुंचा। अतः मुमताज की कब्र का कार्य टॅव्हरनिए की उपस्थिति में आरम्भ हुआ यह टॅव्हरनिए का कथन झूठा साबित होता है। उसी प्रकार वह निर्माण कार्य 22 वर्षा में समाप्त हुआ यह टॅव्हरनिए की टिप्पणी भी झूठी है क्योंकि टॅव्हरनिए भारत में लगातार 22 वर्ष कभी रहा ही नहीं।</p><p>इसी कारण टॅव्हरनिए की टिप्पणी विश्वास-योग्य नहीं है। उसका यात्रा-वर्णन गपशप और धौंसबाजी से भरा रहता है, उस पर विश्वास नहीं करना चाहिए ऐसा इतिहासकारों का प्रकट मत ठीक ही है। हजारों मज़दूर काम पर अवश्य लगे थे किन्तु वे ताजमहल के निर्माण के लिए नहीं बल्कि कब्र वाली मंजिल को छोड़कर शेष साढ़े सात मंजिली इमारतों के सैकड़ों कमरे, छज्जे, जीने, द्वार, खिड़कियां आदि चुनवाकर बन्द करवाने में लगे थे। इस प्रकार टॅव्हरनिए की टिप्पणी से भी यह सिद्ध होता है कि शाहजहाँ ने बना-बनाया ताजमहल जयसिंह से हड़प लिया।</p><h4 class="wp-block-heading">पीटर मंडी और द लायट का मत</h4><p>पीटर मंडी नाम का एक अंग्रेज़ पर्यटक शाहजहाँ के काल में आगरा नगर में आया था। इसने निजी संस्मरण लिखे हैं। मुमताज की मृत्यु के पश्चात् एक-डेढ़ वर्ष में ही वह विलायत को लौट गया। तथापि उसने लिखा है कि आगरा नगर तथा आसपास प्रेक्षणीय इमारतों में मुमताज तथा अकबर के दफन-स्थल प्रेक्षणीय हैं।</p><p>द लायट नाम के हालैण्ड के एक अफसर ने उल्लेख किया है कि आगरे के किले से एक मील की दूरी पर शाहजहाँ के पूर्व ही मानसिंह भवन था। शाहजहाँ के दरबारी इतिवृत्त &#8216;बादशाहनामा&#8217; में उसी मानसिंह भवन में मुमताज को दफनाने की बात लिखी गई है।</p><h4 class="wp-block-heading">बर्निए का विवरण</h4><p>तत्कालीन फ्रेंच पर्यटक बर्निए ने लिखा है कि ताजमहल के (संगमरमरी) तहखाने में चकाचौंध करने वाला कोई दृश्य था। और उस कक्ष में मुसलमानों के अतिरिक्त किसी अन्य को प्रवेश नहीं करने देते थे। इससे स्पष्ट है कि वहां मयूर सिंहासन, चाँदी के द्वार, सोने के खम्भे इत्यादि थे और ऊपरले अष्टकोनी कक्ष में शिवलिंग पर पानी टपकने वाला सुवर्ण घट और संगमरमरी जालियों में जवाहरात इत्यादि थे। इतनी सारी सम्पत्ति हड़प करने के उद्देश्य से ही तो शाहजहां ने मृत मुमताज को उस मानसिंह महल में ही दफनाने की धृष्टता तथा दुराग्रह किया ताकि उस बहाने उस इमारत पर कब्जा कर अन्दर की सम्पत्ति लूटी जा सके।</p><h4 class="wp-block-heading">मंडेलस्लो के विवरण में ताज महल के निर्माण का उल्लेख नहीं</h4><p>जे० ए० मण्डेलस्लो ने मुमताज की मृत्यु के सात वर्ष पश्चात् <a
href="https://archive.org/details/voyagestravellso00olea/page/n9" target="_blank" rel="noreferrer noopener" aria-label="Voyages &amp; Travels into the East Indies (opens in a new tab)">Voyages &amp; Travels into the East Indies</a> नाम के निजी पर्यटन के संस्मरणों में आगरे का उल्लेख तो अवश्य किया है किन्तु ताजमहल निर्माण का कोई उल्लेख नहीं किया। टॅव्हरनिए के कथन के अनुसार 20 हजार मजदूर यदि 22 वर्ष तक ताजमहल का निर्माण करते रहते तो मॅण्डेलस्लो भी उस विशाल निर्माण कार्य का उल्लेख अवश्य करता।</p><h4 class="wp-block-heading">शिलालेख का साक्ष्य</h4><p>ताजमहल के हिन्दू निर्माण का साक्ष्य देने वाला काले पत्थर पर उत्कीर्ण एक संस्कृत शिलालेख लखनऊ के वस्तु-संग्रहालय (Museum) के ऊपरितम मंजिल में धरा हआ है। वह सन 1155 का है। उसमें राजा परमर्दिदेव के मन्त्री सलक्षण द्वारा यह कहा गया है कि “स्फटिक जैसा शुभ्र इन्दुमौलीश्वर (शंकर) का मंदिर बनाया गया। (वह इतना सुन्दर था कि) उसमें निवास करने पर शिवजी को कैलास लौटने की इच्छा ही नहीं रही। वह मन्दिर आश्विन शुक्ल पंचमी, <a
href="/aaj-ravivar-hai-bhajan-lyrics/">रविवार</a> को बनकर तैयार हुआ। ताजमहल के उद्यान में काले पत्थरों का एक मण्डप था ऐसा एक ऐतिहासिक उल्लेख है। उसी में वह संस्कृत शिलालेख लगा था ऐसा अनुमान है। उस शिलालेख को कनिंगहम ने जान-बूझकर बटेश्वर शिलालेख कहा है ताकि इतिहासज्ञों को भ्रम में डाला जा सके और ताजमहल के हिन्दू निर्माण का रहस्य गुप्त रहे। आगरे से 70 मील की दूरी पर बटेश्वर में वह शिलालेख नहीं पाया गया था। अतः उसे बटेश्वर शिलालेख कहना अंग्रेजी षड्यन्त्र है।</p><p>शाहजहाँ ने ताजमहल परिसर में जो तोड़मरोड़ और हेराफेरी की उसका एक सूत्र सन् 1874 में प्रकाशित पुरातत्व खाते (आर्किओलोजिकल सर्वे आफ इण्डिया) के वार्षिक वृत्त के चौथे खण्ड में पृष्ठ 216-217 पर अंकित है। उसमें लिखा है कि हाल में आगरे के वस्तुसंग्रहालय के आँगन में जो चौखुंटा काले बसस्ट प्रस्तर का स्तम्भ खड़ा है। वह स्तम्भ तथा उसी की जोड़ी का दूसरा स्तम्भ उसके शिखर तथा चबुतरे सहित कभी ताजमहल के उद्यान में प्रस्थापित थे। इससे स्पष्ट है कि लखनऊ के वस्तुसंग्रहालय में जो संस्कृत शिलालेख है वह भी काले पत्थर का होने से ताजमहल उद्यानमण्डप में प्रदर्शित था।</p><p>The post <a
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isPermaLink="false">https://hindipath.com/?p=795</guid><description><![CDATA[<p>पढ़ें क्यों ताजमहल है तेजोमहालय नामक शिव मंदिर श्री पी.एन. ओक के अनुसार।</p><p>The post <a
rel="nofollow" href="https://hindipath.com/taj-mahal-is-tejomahalay-shiv-mandir-hindi-pn-oak/">तेजोमहालय शिव मंदिर है “ताज महल”</a> appeared first on <a
rel="nofollow" href="https://hindipath.com">हिंदी पथ</a>.</p> ]]></description> <content:encoded><![CDATA[<h2 class="wp-block-heading">Taj Mahal Is Originally Tejomahalay Shiva Mandir In Hindi By P.N. Oak</h2><p><em>आइए नज़र डालते हैं श्री पी.एन. ओक द्वारा चिह्नित कुछ बिंदुओं पर, जिनके अनुसार ताजमहल कोई कब्र नहीं, बल्कि भगवान शिव को समर्पित तेजोमहालय नामक एक मंदिर है। लेखक के मुताबिक़ जहाँ आज कब्र है, वहाँ शिवलिंग हुआ करता था। </em></p><p><em>दृष्टिपात करते हैं ऐसे ही कुछ बिंदुओं पर। ताजमहल के रहस्य से संबंधित अन्य तथ्य जानने व किताब के दूसरे अध्याय पढ़ने के लिए कृपया यहाँ जाएँ – <a
href="/taj-mahal-is-temple-palace-hindi-summary-pn-oak/"><strong>ताज महल का रहस्य: ताजमहल है हिंदू मंदिर</strong></a>।</em></p><ol><li>ताजमहल नाम का उल्लेख औरंगज़ेब तक के किसी भी तवारीखों में या दरबारी दस्तावेज़ों में कहीं भी नहीं मिलता है।<br></li><li>इसे ताज-ए-महल याने महलों का ताज कहने का प्रयास करना हास्यास्पद है, क्योंकि यह तो इस्लामी कब्र है। कब्र को कभी महल नहीं कहा जाता।<br></li><li>इसका अन्तिम पद &#8216;महल&#8217; इस्लामी शब्द ही नहीं है, क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान से लेकर अलजीरिया तक फैले विस्तृत इस्लामी प्रदेशों में &#8216;महल&#8217; नाम की एक भी इमारत नहीं है।<br></li><li>सामान्य धारणा यह है कि इसमें दफ़नाई महिला मुमताज़ महल के नामानुसार इसका नाम ताज महल रखा गया है। यह दो दृष्टियों से असंगत है। एक बात तो यह है कि शाहजहाँ की उस पत्नी का नाम मुमताज महल नहीं अपितु मुमताज़-उल-जमानी या अर्जुमंद बानो था द्वितीयत: मुमताज़ की स्मृति में बने उस भवन को नामांकित करते समय दो आद्य अक्षर &#8216;मुम्&#8217; उड़ा देना हास्यास्पद है। एक महिला के नाम के आरम्भ के दो अक्षर हटाकर शेष हिस्सा इमारत का नाम बनता है, यह किस व्याकरण का नियम है?<br></li><li>फिर भी उस महिला का नाम मुमताज़ होने के कारण यदि उससे इमारत का नाम पड़ता तो वह इमारत ताज़महल कहलाती, न कि ताजमहल।<br></li><li>शाहजहाँ के समय भारत में आए हुए यूरोप के कई पर्यटकों ने इस भवन का उल्लेख ताज-ए-महल नाम से किया है, जो शिव मंदिर सूचित करने वाले संस्कृत शब्द तेजोमहालय का बिगड़ा रूप है। स्वयं मुग़ल बादशाह शाहजहाँ और औरंगज़ेब के दरबारी दस्तावेज़ों में या तत्कालीन तवारीखों में ताजमहल शब्द का उल्लेख भी नहीं है, क्योंकि तेजोमहालय उर्फ़ ताजमहल संस्कृत शब्द है।<br></li><li>कब्र का अर्थ विशाल इमारत नहीं अपितु केवल इमारत के अन्दर स्थित मृतक के शव पर बना टीला होता है। इससे पाठकों को ज्ञात होगा कि हुमायूँ, अकबर, मुमताज़, एतमाद्-उद्-दौला, सफ़दरजंग आदि व्यक्ति हिन्दुओं से कब्ज़ा किये हुए विशाल भवनों में ही<br> दफ़नाए गये हैं।<br></li><li>यदि ताजमहल मकबरा होता तो उसे महल नहीं कहा जाता, क्योंकि महल में तो सजीव व्यक्ति ही रहते हैं।<br></li><li>चूँकि ताजमहल का उल्लेख शाहजहाँ तथा औरंगज़ेब-कालीन किसी भी मुग़ली लेखों में नहीं है, ताजमहल के निर्माण का श्रेय शाहजहाँ को देना उचित नहीं। उन्होंने ताज महल शब्द का उल्लेख जान-बूझकर इसलिए टाल दिया है क्योंकि वह मूलत: तेजोमहालय ऐसा पवित्र हिन्दू संस्कृत शब्द है।<br></li><li>ताजमहल संस्कृत शब्द तेजोमहालय यानि शिव मंदिर का अपभ्रंश होने से पता चलता है कि अग्रेश्वर महादेव अर्थात् अग्रनगर के नाथ ईश्वर शंकर जी को यहाँ स्थापित किया गया है।<br></li><li>शाहजहाँ के पूर्व समय से जब ताज एक शिव मंदिर था तब से ही जूते खोलकर अन्दर प्रवेश करने की परम्परा आज भी मौजूद है। यदि यह भवन मकबरा ही होता तो इसमें प्रवेश करते समय जूते उतार देने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती, बल्कि कब्रस्तान में तो जूते पहनना आवश्यक होता है।<br></li><li>पर्यटक देख सकते हैं कि संगमरमरी तहखानों में बनी मुमताज के कब्र की आधारशिला सादी सफेद है, जबकि पड़ोस की शाहजहाँ की कब्र और ऊपरले मंज़िल में बनी शाहजहाँ-मुमताज़ की कब्र पर हरे बेल-बूटे जड़े हैं। इससे निष्कर्ष यह निकलता है कि वह सफेद संगमरमरी शिला मूलतः शिवलिंग की आधारशिला थी। वह अभी अपनी जगह पर है और मुमताज़ वहाँ दफ़नाए जाने की कहानी कपोलकल्पित है।<br></li><li>संगमरमरी जाली के शिखर पर बने कलश कुल 108 हैं, जो संख्या पवित्र हिन्दू मंदिरों की परम्परा है।<br></li><li>ताजमहल के संगमरमरी तहखाने के नीचे जो लाल पत्थर की बनी मंज़िलें शाहजहाँ द्वारा आबड़-खाबड़ चुनवा दी गई हैं उनमें से कई बार पूरातत्वीय कर्मचारियों को मूर्तियाँ मिली हैं। दरारों में से अन्दर झाँकने वाले व्यक्तियों को अन्दरूनी अंधेरे दालानों में मूर्तियों से अंकित स्तम्भ भी दिखाई दिए थे। ऐसे कई रहस्य सरकारी आदेशों द्वारा गुप्त रखे गये हैं। सरकारी पुरातत्व कर्मचारी तथा अन्य पुरातत्ववेत्ता, ऐतिहासिक तथ्यों को उजागर करने के अपने कर्तव्य के प्रति सचेत हो पर्यवेक्षण करने की बजाय, इस सम्बन्ध में विचार पूर्वक, सभ्य तरीक़े एवं कूटनीति से चुप्पी साधे बैठे हुए हैं।<br></li><li>भारतवर्ष में बारह ज्योतिर्लिंग अर्थात् मुख्य शिव मंदिर हैं। यह तेजोमहालय याने तथाकथित ताजमहल उनमें से एक है, क्योंकि ताजमहल की ऊपरली किनारे में नाग-नागिन की आकृतियाँ जड़ी होने से लगता है कि यह मंदिर नागनाथेश्वर के नाम से भी जाना जाता था। शाहजहाँ के अधिग्रहण के बाद से इसने अपनी हिन्दू महत्ता खो दी।<br></li><li>विश्वकर्मा वास्तुशास्त्र नामक वास्तुकला के विवेचनात्मक प्रसिद्ध ग्रन्थ में उल्लिखित विविध प्रकार के शिवलिंगों में तेजोलिंग का उल्लेख करता है, जो हिन्दुओं के आराध्यदेव शिवजी का चिह्न होता है। वैसा तेजोलिंग ही ताजमहल के अन्दर प्रतिष्ठित हुआ था। अत: यह तथाकथित ताजमहल तेजोमहालय ही है।<br></li><li><a
href="https://agra.nic.in/hi/" target="_blank" rel="noreferrer noopener" aria-label="आगरा शहर (opens in a new tab)">आगरा शहर</a> जहाँ ताजमहल अवस्थित है वह प्राचीन काल में शिव पूजा का केन्द्र रहा है। यहाँ की धार्मिक जनता श्रावण मास में रात्रि का भोजन करने से पूर्व पाँच शिव मंदिरों के दर्शन लेती थी। पिछली कुछ शताब्दियों में आगरा के निवासियों को बल्केश्वर, पृथ्विनाथ, मनकामेश्वर और राज-राजेश्वर इन चार शिव मंदिरों के ही दर्शन से सन्तुष्ट होना पड़ रहा है, क्योंकि उनके पूर्वजों का आराध्य पाँचवें मंदिर का देवता उनसे छीना गया। स्पष्टत: अग्रेश्वर महादेव नाग-नाथेश्वर ही उनके पाँचवें आराध्य थे जो तेजोमहालय अर्थात् तथाकथित ताजमहल में विराजमान थे।<br></li><li>आगरे की आबादी ज़्यादातर जाटों की है। वे भगवान शंकर को तेजाश्री कहकर पुकारते हैं। इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ़ इण्डिया 28 जून, 1971, जो जाट विशेषांक था, कहता है कि जाटों के तेज मंदिर होते थे। शिवलिंग के विविध प्रकारों में तेजोलिंग भी एक है। इससे स्पष्ट होता है कि ताजमहल तेजोमहालय अर्थात शिव का विशाल मंदिर है।</li></ol><p></p><p>The post <a
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isPermaLink="false">https://hindipath.com/?p=792</guid><description><![CDATA[<p>जानें ताज महल का रहस्य। क्या ताजमहल हिंदू शिव मंदिर है? जानें तेजोमहालय को पीएन ओक की किताब से।</p><p>The post <a
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href="/taj-mahal-is-tejomahalay-shiv-mandir-hindi-pn-oak/">तेजोमहालय शिव मंदिर है &#8220;ताज महल&#8221;</a></li><li><a
href="/documents-proving-taj-mahal-temple/">ताज महल के मंदिर होने संबंधी दस्तावेज़</a></li><li><a
href="/taj-mahal-related-european-travelers-writings-pn-oak/">ताज को लेकर यूरोपियन पर्यटकों के वृत्तांत</a></li><li>हाथी की मूर्तियाँ</li><li>स्थापत्य के साक्ष्यों से मंदिर होने की पुष्टि</li><li>प्रचलित भ्रामक बातें</li><li>मुमताज से जुड़ी तारीख़ों में त्रुटियाँ</li><li>शाहजहाँ-मुमताज के प्यार का झूठ</li><li>ताजमहल के निर्माण का हिसाब-किताब</li><li>निर्माण की अवधि</li><li>वास्तुकारों के मनगढ़ंत नाम</li><li>ताज महल के नक्शे कहाँ हैं?</li><li>मज़दूरी और सामग्री के दस्तावेज़ नदारद</li><li>बग़ीचे में पवित्र हिंदू पुष्प वृक्ष</li><li>ताज के निकट यमुना तट हिंदू मंदिरों की पहचान</li><li>गुंबद का हिंदू वैशिष्ट्य</li><li>मुर्दे का टीला कब्र कहलाती है, न कि महल</li><li>हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ ताज महल में</li><li>शाहजहाँ से पहले ताजमहल के उल्लेख</li><li>छत्रपति शिवाजी रहे थे ताज महल के समीप?</li><li>तेजोमहालय का &#8220;श्री&#8221; द्वार और आनंद वाटिकाएँ</li><li>आगरे के क़िले में लगे शीशे</li><li>शाहजहाँ का काल था अन्याय व दरिद्रता का युग</li><li>ताज महल को लेकर नक़ली दस्तावेज़</li></ol><p>2 मार्च 1917 को इंदौर में जन्मे श्री पुरुषोत्तम नागेश ओक कई पुस्तकें लिख चुके हैं। द्वितीय विश्व-युद्ध के दौरान वे सिंगापुर में नियुक्त रहे हैं। इसके बाद उन्होंने सुभाषचन्द्र बोस की <a
rel="noreferrer noopener" aria-label="आज़ाद हिंद फ़ौज (opens in a new tab)" href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%86%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6_%E0%A4%AB%E0%A4%BC%E0%A5%8C%E0%A4%9C" target="_blank">आज़ाद हिंद फ़ौज</a> में हिस्सा लिया और सौगौन में आज़ाद हिन्द रेडियो में निदेशक का पद संभाला। भारत की स्वतंत्रता के बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स और स्टेट्समैन जैसे अख़बारों में पत्रकारिता की तथा भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय में भी काम किया। दुनिया भर में और देश के विभिन्न भागों में घूमते हुए उन्होंने ऐतिहासिक स्थानों का गहरा अध्ययन किया और इसी दौरान पुरातात्विक मामलों में धीरे-धीरे उनकी संकल्पनाएँ विकसित हुईं। इन्हीं विषयों पर उन्होंने बहुत-सी किताबें भी लिखीं। प्रस्तुत पुस्तक का सारांश इनमें से एक किताब पर आधारित है, जिसका ज़िक्र ऊपर किया ही जा चुका है।</p><p>Is Taj Mahal a Hindu temple? Did Shah Jahan build it? Is this so-called Mughal architectural wonder a Shiva temple in reality? If it is true, what are the evidences in this regard? Was there a Hindu king who built Taj? Are there any old books that prove it? P.N. Oak&#8217;s book &#8220;The Taj Mahal Is A Temple Palace&#8221; tries to answer all of these questions. Read the summary of this book here, which may force you to rethink history as it is written. Find out Taj Mahal Ka Rahasya: The Secret Of Taj Mahal.</p><p>The post <a
rel="nofollow" href="https://hindipath.com/taj-mahal-is-temple-palace-hindi-summary-pn-oak/">ताज महल का रहस्य – ताजमहल है हिंदू मंदिर</a> appeared first on <a
rel="nofollow" href="https://hindipath.com">हिंदी पथ</a>.</p> ]]></content:encoded> <wfw:commentRss>https://hindipath.com/taj-mahal-is-temple-palace-hindi-summary-pn-oak/feed/</wfw:commentRss> <slash:comments>0</slash:comments> </item> </channel> </rss>