Zindagi Na Milegi Dobara Poetry: ZNMD Poems in Hindi

“ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा” हममें से बहुतों की पसंदीदा फ़िल्म है। इसमें फ़रहान अख़्तर ने जो शेर कहे हैं (Zindagi Na Milegi Dobara Poetry), वे आज भी लोगों के दिलो-दिमाग़ को गहराई से छूते हैं। दरअस्ल ये शेर लिखे हैं मश्हूर गीतकार और फ़रहार के पिता जावेद अख़्तर ने। फ़िल्म की ये चारों कविताएँ जज़्बात को छूती हैं और एक जादू-सा समाँ पैदा कर देती हैं। एक ऐसा समाँ जिसमें सुनने वाला कहीं खो जाता है।

हिंदीपथ पर हमारी कोशिश है कि आप ये कविताएँ (ZNMD Poems) देवनागरी में पढ़ें और उसी जादू को एक बार फिर महसूस करें, जो फिल्म जिंदगी न मिलेगी दोबारा देखते वक़्त आपने महसूस किया होगा। पढ़ें ये शेर–

हिंदी में ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा की कविताएँ
Zindagi Na Milegi Dobara Shayri

ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा की यह शायरी (Zindagi Na Milegi Dobara Shayri) इमरान स्कूबा डाइविंग के तजुर्बे के बाद कहता है। देखिए, एक-एक शब्द में किस तरह गहराई भरी हुई है–

1. First Of ZNMD Poems: पिघले नीलम-सा बहता हुआ ये समाँ

पिघले नीलम-सा बहता हुआ ये समाँ,
नीली-नीली सी ख़ामोशियाँ,
न कहीं है ज़मीं, न कहीं आसमाँ,
सरसराती हुई टहनियाँ, पत्तियाँ,
कह रही हैं कि बस एक तुम हो यहाँ,
सिर्फ़ मैं हूँ, मेरी साँसें हैं, मेरी धड़कनें,
ऐसी गहराइयाँ, ऐसी तन्हाइयाँ,
और मैं, सिर्फ़ मैं,
अपने होने पे मुझको यक़ीन आ गया।

फिल्म में नसिरुद्दीन शाह ने फरहान के पिता का किरदार किया है। जब इमरान (फरहान अख्तर) अपने पिता से मिलता है और उसे कई कड़वे सवालात के जवाब मिलते हैं, तो वह यह कविता कहता है। पढ़ें ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा की यह शायरी (Zindagi Na Milegi Dobara Poetry)–

2. Second Of ZNMD Poems: दिल आख़िर तू क्यों रोता है

जब-जब दर्द का बादल छाया,
जब ग़म का साया लहराया,
जब आँसू पलकों तक आया,
जब ये तन्हा दिल घबराया,
हमने दिल को ये समझाया,
दिल आख़िर तू क्यों रोता है!
दुनिया में यूँ ही होता है,
ये जो गहरे सन्नाटे हैं,
वक़्त ने सब को ही बांटे हैं,
थोड़ा ग़म है सबका क़िस्सा,
थोड़ी धूप है सबका हिस्सा,
आँख तेरी बेकार ही नम है,
हर पल एक नया मौसम है,
क्यूँ तू ऐसे पल खोता है,
दिल आख़िर तू क्यूँ रोता है!

ज़िंदादिल लैला की भूमिका कैटरीना कैफ ने बहुत ख़ूबसूरती से अदा की है। अर्जुन (रितिक रोशन) जब लैला से दूर हो रहा होता है, तब ये ZNMD poem भावनाओं को बख़ूबी व्यक्त करती है–

3. Third Of Zindagi Na Milegi Dobara Poetry: एक बात होठों तक

एक बात होठों तक है जो आई नहीं,
बस आँखों से है झाँकती,
तुमसे कभी मुझसे कभी,
कुछ लफ़्ज़ है वो मांगती,
जिनको पहन के होठों तक आ जाए वो,
आवाज़ की बाहों में बाहें डालके इठलाये वो,
लेकिन जो ये एक बात है एहसास-ही-एहसास है,
ख़ुश्बू-सी जैसे हवा में है तैरती,
ख़ुश्बू जो बेआवाज़ है,
जिसका पता तुमको भी है, जिसकी ख़बर मुझको भी है,
दुनिया से भी छुपता नहीं, ये जाने कैसा राज़ है।

आख़िर का दृश्य वाक़ई दिल छूने वाला है। एक तरह से वह पूरी फ़िल्म का सार है। इसमें जब तीनों दोस्त–कबीर, अर्जुन और इमरान–स्पेन में हो रही सांड़ों की दौड़ सुरक्षित बच निकलते हैं, तब ये कविता सुनाई देती है–

4. Fourth Of Zindagi Na Milegi Dobara Poems: तो ज़िंदा हो तुम

दिलों में तुम अपनी बेताबियाँ लेके चल रहे हो तो ज़िंदा हो तुम,
नज़र में ख़्वाबों की बिजलियाँ लेके चल रहे हो तो ज़िंदा हो तुम,
हवा के झोकों के जैसे आज़ाद रहना सीखो,
तुम एक दरिया के जैसे लहरों में बहना सीखो,
हर एक लम्हे से तुम मिलो खोले अपनी बाहें,
हर एक पल एक नया समाँ देखें ये निगाहें,
जो अपनी आँखों में हैरानियाँ लेके चल रहे हो तो ज़िंदा हो तुम,
दिलों में तुम अपनी बेताबियाँ लेके चल रहे हो तो ज़िंदा हो तुम।

दोस्तो, आपको Zindagi Na Milegi Dobara Poetry पर हमारी यह पोस्ट कैसी लगी, कृपया हमें टिप्पणी करके ज़रूर बताएँ। लुत्फ़ उठाएँ ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा शायरी (Zindagi Na Milegi Dobara Shayri) का और यूँ ही हमसे अपने विचार साझा करते रहें।

2 thoughts on “Zindagi Na Milegi Dobara Poetry: ZNMD Poems in Hindi

  • July 29, 2021 at 9:00 pm
    Permalink

    Bohot Bohot Dhanyawad Admin Ka! Ye lines sach mai dil ko chhoo leti hai. Aapka din shubh ho

    Reply
    • September 20, 2021 at 1:04 pm
      Permalink

      टिप्पणी करके उत्साह बढ़ाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, तुषार जी। ऐसे ही हिंदीपथ पढ़ते रहें और हमें अपने विचारों से अवगत कराते रहें।

      Reply

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