अमृत मंथन की समाप्ति – महाभारत का उन्नीसवाँ अध्याय (आस्तीक पर्व)
“अमृत मंथन की समाप्ति” नामक महाभारत की यह कथा आदि पर्व के अन्तर्गत आस्तीक पर्व में आती है। इस अध्याय
Read More“अमृत मंथन की समाप्ति” नामक महाभारत की यह कथा आदि पर्व के अन्तर्गत आस्तीक पर्व में आती है। इस अध्याय
Read More“समुद्र मंथन की कथा” महाभारत में आदिपर्व के अन्तर्गत आस्तीक पर्व में आती है। पढ़ें समुद्र मंथन की कथा और
Read More“समुद्र मंथन की चर्चा” नामक यह कथा महाभारत के आदिपर्व के अन्तर्गत आस्तीक पर्व में आती है। यह महाभारत का
Read More“कश्यप के पुत्रों की उत्पत्ति” नामक यह कथा महाभारत के आदि पर्व के अन्तर्गत आस्तीक पर्व में आती है। इसमें
Read More“आस्तीक का जन्म” नामक यह कथा महाभारत महाकाव्य के आदि पर्व के अन्तर्गत आस्तीकपर्व में आती है। इसमें पिछले अध्याय
Read More“जरत्कारु का विवाह” नामक यह कथा महाभारत के आदिपर्व के अन्तर्गत आस्तीक पर्व में आती है। पिछले अध्याय में विवाह
Read Moreविभीषण प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त थे। उनकी कथा यहाँ रामायण महाकाव्य के अनुसार प्रस्तुत की जा रही है।
Read More“जरत्कारु से पितरों का अनुरोध” नामक महाभारत की यह कथा आदिपर्व के अन्तर्गत आस्तीक पर्व में आती है। यह महाभारत
Read Moreयुवराज अंगद सुग्रीव के बड़े भाई बाली के पुत्र थे। बाली इनसे सर्वाधिक प्रेम करता था। ये परम बुद्धिमान, अपने
Read Moreआस्तीक पर्व महाभारत के प्रथम पर्व आदिपर्व का पाँचवाँ उपपर्व है। इसमें 46 अध्याय और कुल 1108 श्लोक हैं। आस्तीक
Read More