महाभारत का कर्ण पर्व – Mahabharat Karn Parv in Hindi
“कर्ण पर्व” महाभारत का आठवाँ पर्व है। इस पर्व में 79 अध्याय हैं। पढ़ें कर्ण पर्व हिंदी अर्थ सहित और आनंद ले महाभारत कथा का।
Read More“कर्ण पर्व” महाभारत का आठवाँ पर्व है। इस पर्व में 79 अध्याय हैं। पढ़ें कर्ण पर्व हिंदी अर्थ सहित और आनंद ले महाभारत कथा का।
Read More“द्रोण पर्व” महाभारत का सातवाँ पर्व है। इसमें कुल 8 उपपर्व हैं। पढ़ें द्रोण पर्व हिंदी अर्थ सहित और आनंद ले महाभारत कथा का।
Read More“भीष्म पर्व” महाभारत का छठा पर्व है। इसमें कुल 4 उपपर्व हैं। पढ़ें भीष्म पर्व हिंदी अर्थ सहित और आनंद ले महाभारत कथा का।
Read More“उद्योग पर्व” महाभारत का पाँचवाँ पर्व है। इसमें कुल 10 उपपर्व हैं। पढ़ें उद्योग पर्व हिंदी अर्थ सहित और आनंद ले महाभारत कथा का।
Read More“विराट पर्व” महाभारत का चौथा पर्व है। इसमें कुल 5 उपपर्व हैं। पढ़ें विराट पर्व हिंदी अर्थ सहित और आनंद ले महाभारत कथा का।
Read More“अरयण्क पर्व” महाभारत का तीसरा पर्व है। इसमें कुल 22 उपपर्व हैं। पढ़ें अरयण्क पर्व हिंदी अर्थ सहित और आनंद ले महाभारत कथा का।
Read More“सभा पर्व” महाभारत का दूसरा पर्व है, जिसमें 10 उपपर्व हैं। इसमें इंद्रप्रस्थ के निर्माण से युधिष्ठिर के द्युतक्रीड़ा में हार तक की कथा है।
Read Moreविमलनाथ चालीसा में भव-बंधन को काटने की शक्ति है। जो श्रद्धा से भरकर इसका पाठ करता है, उसकी सारी कामनाएँ अवश्य ही पूरी होती हैं।
Read Moreवासुपूज्य चालीसा का पाठ कर्मों के बंधन से छुटकारा दिलाता है। जो उन्हें हृदय में स्थापित कर इस चालीसा को पढ़ता है, उसकी कामनाएँ पूर्ण होती हैं।
Read Moreश्रेयांसनाथ चालीसा मन की सभी इच्छाओं को पूरा करने वाली है। इसके नित्य पाठ से ऐसे काम भी बनने लगते हैं, जिनमें पहले अनेक विघ्न दिखाई देते हों।
Read More