राष्ट्र पर्व (15 अगस्त 1959)
“राष्ट्र पर्व” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। आज़ादी के बाद की विसंगतियों की चर्चा इस कविता में की गयी है। अवश्य पढ़ें।
Read More“राष्ट्र पर्व” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। आज़ादी के बाद की विसंगतियों की चर्चा इस कविता में की गयी है। अवश्य पढ़ें।
Read More“इतिहास नया बनने को है” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी खड़ी बोली की कविता है। इसमें देशवासियों को बाधाएँ पार कर आगे बढ़ने का संदेश है।
Read More“सृजन के वास्ते” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया ‘नवल’ द्वारा हिंदी भाषा में रचित को दर्शाती कविता है।
Read More“सभ्य हो जायेंगे” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी खड़ी बोली में रचित कविता है। इस कविता में सभ्यता के स्वरूप और दशा का चित्रण है।
Read More“आजादी का आदि पर्व” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया हिंदी खड़ी बोली में रचित कविता है। इस कविता की एक-एक पंक्ति देशभक्ति का जज़्बा जगाती है।
Read More“सोने वालो जागो” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया द्वारा हिंदी खड़ी बोली में रचित कविता है। इसमें निद्रा को छोड़ देश के नवनिर्माण का आह्वान किया है।
Read Moreओम् जय जगदीश हरे बहुत ही प्रसिद्ध विष्णु भगवान की आरती है। यह आरती जो भी गाता है, उसके दुःख दूर हो जाते हैं।
Read Moreआरती रघुवर लला की भगवान श्री राम को समर्पित बहुत ही सुंदर आरती है। इसे गाने से जीवन में तेजस्विता बढ़ती है।
Read Moreहनुमान जी की आरती भय, कष्ट और अड़चनों पर प्रहार करके उन्हें नष्ट कर देती है। इसे गाने से कोई काम कठिन नहीं रहता।
Read Moreकृष्ण आरती से भक्ति हृदय में उमड़ने लगती है। मन शुद्ध होता है और इच्छानुसार चीजें घटित होने लगती हैं।
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