ज्ञानयोग पर षष्ठ प्रवचन – स्वामी विवेकानंद
“ज्ञानयोग पर षष्ठ प्रवचन” में स्वामी विवेकानंद ज्ञान प्राप्ति प्रक्रिया में विचार के महत्व पर प्रकाश डाल रहे हैं।
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“ज्ञानयोग पर षष्ठ प्रवचन” में स्वामी विवेकानंद ज्ञान प्राप्ति प्रक्रिया में विचार के महत्व पर प्रकाश डाल रहे हैं।
Read More“ज्ञानयोग पर पंचम प्रवचन” में स्वामी विवेकानंद आत्म-साक्षात्कार को गहराई से समझाते हैं। इसमें विभिन्न स्तर की अभिव्यक्तियों की भी चर्चा है।
Read More“ज्ञानयोग पर चतुर्थ प्रवचन” में स्वामी विवेकानंद ने अद्वैतवाद के अनुसार सत्य की कसौटी पर विचार किया है। अवश्य पढ़ें और मनन करें।
Read More“ज्ञानयोग पर तृतीय प्रवचन” में स्वामी विवेकानंद त्याग का अर्थ समझाते हैं। साथ ही वे ज्ञानयोगी के लक्षणों पर चर्चा कर रहे हैं।
Read More“ज्ञानयोग पर द्वितीय प्रवचन” में विवेकानंद वेदांत के सिद्धांतों की व्याख्या कर रहे हैं। वे सिद्धांतों के तार्किक पक्ष की विवेचना करते हैं।
Read More“ज्ञानयोग पर प्रथम प्रवचन” में विवेकानंद जी ज्ञान योग के आधारभूत तत्त्वों को समझाते हैं। साथ ही समझाते हैं कि यह अन्य योगों से कैसे भिन्न है।
Read More“ज्ञानयोग का परिचय” नामक इस व्याख्यान में स्वामी विवेकानंद ज्ञान योग के मूलभूत तत्त्वों की व्याख्या कर रहे हैं।
Read Moreओम् जय जगदीश हरे बहुत ही प्रसिद्ध विष्णु भगवान की आरती है। यह आरती जो भी गाता है, उसके दुःख दूर हो जाते हैं।
Read Moreआरती रघुवर लला की भगवान श्री राम को समर्पित बहुत ही सुंदर आरती है। इसे गाने से जीवन में तेजस्विता बढ़ती है।
Read Moreहनुमान जी की आरती भय, कष्ट और अड़चनों पर प्रहार करके उन्हें नष्ट कर देती है। इसे गाने से कोई काम कठिन नहीं रहता।
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