राजयोग पर चतुर्थ पाठ – स्वामी विवेकानंद
राज योग के इस चतुर्थ पाठ में स्वामी विवेकानंद ने मन को नियंत्रित करने के उपायों की चर्चा की है।
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राज योग के इस चतुर्थ पाठ में स्वामी विवेकानंद ने मन को नियंत्रित करने के उपायों की चर्चा की है।
Read Moreइस अध्याय में स्वामी विवेकानंद कुंडलिनी जागरण के उपायों की चर्चा कर रहे हैं।
Read Moreपढ़ें स्वामी विवेकानंद की पुस्तक “राजयोग पर छः पाठ” का द्वितीय पाठ व जानें योग की बुनियादी बातें।
Read Moreपढ़ें स्वामी विवेकानंद कृत “राजयोग पर छः पाठ” का प्रथम पाठ और जानें योगाभ्यास में दृढ़ होने के लिए आवश्यक नियम।
Read Moreयह “राज योग पर छः पाठ” की प्रस्तावना है। इसमें स्वामी विवेकानंद बता रहे हैं योग के अभ्यास के लिए मूलभूत आवश्यक बातें कौन-सी हैं।
Read Moreपढ़ें स्वामी विवेकानंद कृत “राज योग पर छः पाठ” और जानें योग साधना की प्रक्रिया व रहस्य।
Read Moreस्वामी विवेकानंद इस व्याखान में कर्म के रहस्य को बता रहे हैं। वे आपको इस लेख में न केवल कर्म से सफलता पाने का सूत्र देते हैं, बल्कि कर्म से मुक्ति तक की यात्रा की कुंजी भी थमाते हैं।
Read Moreपढ़ें क्या था स्वामी विवेकानंद के जीवन का ध्येय और कैसे उसी रूप-रेखा से भारत बन सकता है विश्वशक्ति।
Read Moreस्वामी विवेकानंद ने ईसा मसीह पर यह प्रसिद्ध व्याख्यान सन् 1900 में लॉस एंजिलिस, कैलीफ़ोर्निया में दिया था। इसमें स्वामी जी ने यीशू या ईसा मसीह के जीवन और उपदेशों की प्राच्य दृष्टिकोण से व्याख्या की है।
Read Moreयहाँ स्वामी विवेकानंद अपने गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस की कहानी और उनकी शिक्षाओं पर प्रकाश डाल रहे हैं।
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