श्री यमुना जी – ब्रज भाषा की कविता
“श्री यमुना जी” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया “नवल” द्वारा ब्रज भाषा में रचित यमुना मैया को समर्पित कविता है। इस अद्भुत कविता का आनंद लें।
Read Moreहिंदी की कविताएँ, काव्य का रस और गीत की बुहार
“श्री यमुना जी” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया “नवल” द्वारा ब्रज भाषा में रचित यमुना मैया को समर्पित कविता है। इस अद्भुत कविता का आनंद लें।
Read More“श्री बटेश्वरनाथ महिमा” श्री नवल सिंह भदौरिया “नवल” द्वारा ब्रज भाषा में रचित भगवान शिव को समर्पित कविता है। इस अद्भुत कविता का आनंद लें।
Read More“अमृत ध्वनि छन्द” श्री नवल सिंह भदौरिया “नवल” द्वारा ब्रज भाषा में रचित भगवान शिव को समर्पित कविता है। इस अद्भुत कविता का आनंद लें।
Read More“घनस्याम की रूप माधुरी” कविता में स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया “नवल” ने श्रीकृष्ण के दिव्य रूप और लीलाओं का ब्रज भाषा में बड़ा सजीव वर्णन किया है।
Read More“घनश्याम की आँखें” श्री नवल सिंह भदौरिया रचित ब्रज भाषा की मधुर कविता है, जिसमें श्रीकृष्ण की आँखों का सुंदर वर्णन पढ़ने को मिलता है।
Read More“कन्हैया की बाँसुरी” कवियों व भक्तों को हमेशा से आकर्षित करती रही है। इसी विषय पर पढ़ें स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की यह ब्रज भाषा में कविता।
Read Moreब्रज-महिमा कविता में ब्रज के योगदान और इसकी महिमा का गायन है। स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया द्वारा रचित ब्रज भाषा की इस कविता का आनन्द लें।
Read Moreमाहीन की कविता “कुछ ख़ास बदला नहीं है” बताती है कि किसी ख़ास के ज़िन्दगी से जाने के बाद जो ठहराव आता है, वह कभी नहीं जाता।
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