कविता

मेरे जीवन का समय चक्र – Mere Jeevan Ka Samay Chakra Hindi Emotional Poem

महिमा भट्ट एक अनुभवी एवं समर्पित विद्यालय प्रधानाचार्या हैं, जिन्होंने शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएँ प्रदान की हैं। वे सरल, सहज और हृदयस्पर्शी कविताएँ लिखना पसंद करती हैं, जो पाठकों के मन को सीधे स्पर्श करती हैं और गहन भावों को सहज भाषा में अभिव्यक्त करती हैं।

कहते हैं समय चक्र चलता रहता है,
और सुख-दुःख आते-जाते हैं।
कुछ को पहले मिलता है सुख,
कुछ दुःख को पहले पाते हैं।

रुकते नहीं कहीं पर भी,
ये सुख-दुःख आते-जाते हैं।

आँसू बहते हैं आँखों से,
हर बार नया ही अर्थ लिए —
या खुशियों की मुस्कान के लिए,
या दुनिया भर का दर्द लिए।

सौ बार चला हो तन कर पर,
एक बार गिरा ही करता है,
इंसान गिरा जो होता है,
फिर उठकर वही संभलता है।

रात के अँधेरे को सूर्य की किरण भगाएगी,
दिन की झुलसती धूप फिर तारों में छिप जाएगी।
जो आया है फिर जाएगा,
और जाकर फिर से आएगा,
उसे आना है जाने के लिए,
ये यूँ ही चलता जाएगा।

परंतु यह सत्य मुझे क्यों
असत्य प्रतीत होता है,
जो कुछ भी अनुमानित है,
सब उससे विपरीत होता है।

जिसे सब समय चक्र कहते हैं,
वह लगती है एक सुरंग है,
मुझको बस चलते जाना है,
नहीं इसका कोई अंत है।

आँसू बहते कल भी,
और आज भी बहते रहते हैं,
खुशियाँ खोजे अब मन मेरा,
हाँ दुःख तो मिलते रहते हैं।

ढूँढने चली जो खुशियाँ मैं,
तब ठोकर एक मैंने खाई,
गिरी वहीं पर मुँह के बल,
नहीं अभी तक उठ नहीं पाई।

नज़र नहीं आता अब कुछ,
चारों तरफ अँधेरा है,
दुःख के इस अँधियारे के पीछे क्या कोई सुखद सवेरा है???

कहते हैं समय चक्र चलता रहता है, परंतु……????

सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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