स्वामी विवेकानंद का मनःसंयम
स्वामीजी का मनःसंयम – स्त्री-मठ की स्थापना के संकल्प के सम्बन्ध में शिष्य से बातचीतधर्म को शिक्षा की नींव बनानी होगी आदि।
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स्वामीजी का मनःसंयम – स्त्री-मठ की स्थापना के संकल्प के सम्बन्ध में शिष्य से बातचीतधर्म को शिक्षा की नींव बनानी होगी आदि।
Read Moreआत्मा अति निकट है, फिर भी उसकी अनुभूति आसानी सेक्यों नहीं होती – स्वामीजी कीध्यानतन्मयता आदि।
Read Moreमठ के सम्बन्ध में नैष्ठिक हिन्दुओं की पूर्व धारणा – स्वामीजी जैसे ब्रह्मज्ञ पुरुष द्वारा देव-देवी की पूजा करना सोचने की बात है आदि।
Read Moreश्रीरामकृष्ण का जन्मोत्सव भविष्य में सुन्दर बनाने की योजना – शिष्य को आशीर्वाद, “जब यहाँ पर आया है तो अवश्य ही ज्ञान प्राप्त होगा” आदि।
Read Moreस्थान – बेलुड़ मठ वर्ष – १९०२ ईसवी विषय – मठ में कठिन विधि-नियमों का प्रचलन – “आत्माराम कीडिबिया” व
Read Moreस्थान – बेलुड़ – किराये का मठ वर्ष – १८९८ ईसवी विषय – मठ में श्रीरामकृष्णदेव की जन्मतिथिपूजा – ब्राह्मणजाति
Read Moreस्थान – बेलुड़ मठ वर्ष – १९०२ ईसव विषय – बेलुड़ मठ में जप-ध्यान का अनुष्ठान – विद्यारूपिणी कुण्डलिनी के
Read Moreस्थान – कलकत्ते से मठ में जाते हुए नाव पर वर्ष – १९०२ ईसवी विषय – स्वामीजी की अहंकार शून्यता
Read Moreस्थान – बेलुड़ मठ (निर्माण के समय) वर्ष – १८९८ ईसवी विषय – ब्रह्मचर्य रक्षा के कठोर नियम – सात्त्विक
Read Moreमथुरा के प्रसिद्ध श्री प्रेमानंद महाराज का कहना है कि “कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः।” इस
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