तुम जो भी गीत उजाले का गाओ कम है
“तुम जो भी गीत उजाले का गाओ कम है” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें जीवन में सर्वत्र सकारात्मकता फैलाने का संदेश है।
Read Moreहिंदी की कविताएँ, काव्य का रस और गीत की बुहार
“तुम जो भी गीत उजाले का गाओ कम है” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें जीवन में सर्वत्र सकारात्मकता फैलाने का संदेश है।
Read More“दीप जलाओ तो” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया ‘नवल’ द्वारा रचित हिंदी कविता है। यह कविता साथ मिलकर हर तरह के अंधेरे को मिटाने का आह्वान करती है।
Read More“क्रान्तिकारी सुभाष” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। यह महान क्रांतिकारी सुभाषचंद्र बोस को उनके जन्म-दिवस पर समर्पित की गयी है।
Read More“हस्ती मेरे वतन की” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें देशप्रेम के रस में डुबाकर देश के मूल स्वरूप को दर्शाया गया है।
Read More“जनतंत्र जवान हो गया” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें संविधान लागू होने के 20 वर्ष होने पर आयी परिपक्वता का वर्णन है।
Read More“आजादी पाई” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें संविधान के माध्यम से सच्ची स्वतंत्रता पाने का सुंदर वर्णन है।
Read More“दर्द ने मुझे पुकारा है” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी रचित कविता है। इसमें अपनों के हाथों देश ने जो धोखा खाया, उसका वर्णन है।
Read More“सौ-सौ नमन करो” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने वालों के प्रति कृतज्ञता झलकती है।
Read More“वर्षगाँठ आजादी की” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया ‘नवल’ द्वारा हिंदी खड़ी बोली में रचित कविता है। इसमें आज़ादी का मूल्य समझाने की चेष्टा झलकती है।
Read More“जौहर दिखलाओ” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। यह पाकिस्तान आक्रमण के समय की रचना है। इसमें देशवासियों से वीरता का आह्वान है।
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