Author: सुरभि भदौरिया

स्वामी विवेकानंद

आत्मा अति निकट है, फिर भी उसकी अनुभूति आसानी से क्यों नहीं होती

आत्मा अति निकट है, फिर भी उसकी अनुभूति आसानी सेक्यों नहीं होती – स्वामीजी कीध्यानतन्मयता आदि।

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धर्मस्वामी विवेकानंद

मठ के सम्बन्ध में नैष्ठिक हिन्दुओं की पूर्वधारणा

मठ के सम्बन्ध में नैष्ठिक हिन्दुओं की पूर्व धारणा – स्वामीजी जैसे ब्रह्मज्ञ पुरुष द्वारा देव-देवी की पूजा करना सोचने की बात है आदि।

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धर्मस्वामी विवेकानंद

श्रीरामकृष्ण का जन्मोत्सव भविष्य में सुन्दर बनाने की योजना

श्रीरामकृष्ण का जन्मोत्सव भविष्य में सुन्दर बनाने की योजना – शिष्य को आशीर्वाद, “जब यहाँ पर आया है तो अवश्य ही ज्ञान प्राप्त होगा” आदि।

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कविता

राधा – Radha Song (Pandavaas) पण्डौ

काँधि मा धराली राधा, खैर की गँज्याल़ि राधा।मुण्ड मा धराली राधा, द्यो रिंगाल़ि सुपि राधा। रूम-जाँदि ठुम राधा, मैतुड़ैऽ मँज्युल़ि

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धर्म

कृष्णाय वासुदेवाय – Krishnaya Vasudevaya Haraye Paramatmane Mantra

मथुरा के प्रसिद्ध श्री प्रेमानंद महाराज का कहना है कि “कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः।” इस

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हिंदी पथ
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