खाद्याखाद्य का विचार कैसे करना होगा
खाद्याखाद्य का विचार कैसे करना होगा – मांसाहार किसे करना उचित है – भारत के वर्णाश्रम धर्म का किस रूप में फिर से उद्धार होने की आवश्यकता है।
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Read Moreस्थान, काल आदि की शुद्धता का विचार कब तक – आत्मा के प्रकट होने के विघ्नों को जो विनष्ट करती है वही साधना है – निष्काम कर्म किये कहते हैं।
Read Moreस्थान – बेलुड़ मठवर्ष – १८९९ ईसवी के प्रारम्भ मेंविषय – स्वामीजी की नागमहाशय से भेंट – आपस में एक
Read Moreस्वामीजी का कलकत्ता जुबिली आर्ट एकेडेमी के अध्यापक श्री रणदाप्रसाद दासगुप्त के साथ शिल्प के सम्बन्ध में वार्तालाप आदि।
Read Moreस्वामीजी का इन्द्रियसंयम, शिष्यप्रेम, रन्धन में कुशलता तथा असाधारण स्मृति – राय गुणाकार भारतचन्द्र व माइकेल मधुसूदन दत्त के सम्बन्ध में राय।
Read Moreभारत की बुरी दशा का कारण – उसे दूर करने का उपाय -वैदिक ढाँचे में देश को फिर से ढालना और मनु, याज्ञवल्कय आदि जैसे मनुष्योंको तैयार करना।
Read Moreयह देखकर कि इच्छा के अनुसार कार्य अग्रसर नहीं हो रहा है स्वामीजी के चित्त में खेद – धारावाहिक कल्याण-चिन्तन द्वारा जगत् का कल्याण करना आदि।
Read Moreस्वामीजी जीवन के अन्तिन दिनों में किस भाव से मठ में कहाकरते थे – उनकी दरिद्रनारायणसेवा – देश के गरीब दुःखियों के प्रति उनकी जीती आदि।
Read Moreवराहनगर मठ में श्रीरामकृष्णदेव के संन्यासी शिष्यों का साधन भजन – मठ की पहली स्थिति – स्वामीजी के जीवन के कुछ दुःखके दिन आदि।
Read Moreस्वामीजी का मनःसंयम – स्त्री-मठ की स्थापना के संकल्प के सम्बन्ध में शिष्य से बातचीतधर्म को शिक्षा की नींव बनानी होगी आदि।
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