Author: सुरभि भदौरिया

धर्मस्वामी विवेकानंद

खाद्याखाद्य का विचार कैसे करना होगा

खाद्याखाद्य का विचार कैसे करना होगा – मांसाहार किसे करना उचित है – भारत के वर्णाश्रम धर्म का किस रूप में फिर से उद्धार होने की आवश्यकता है।

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धर्मस्वामी विवेकानंद

स्थान, काल आदि की शुद्धता का विचार कब तक

स्थान, काल आदि की शुद्धता का विचार कब तक – आत्मा के प्रकट होने के विघ्नों को जो विनष्ट करती है वही साधना है – निष्काम कर्म किये कहते हैं।

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धर्मस्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद की नागमहाशय से भेंट

स्थान – बेलुड़ मठवर्ष – १८९९ ईसवी के प्रारम्भ मेंविषय – स्वामीजी की नागमहाशय से भेंट – आपस में एक

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धर्मस्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद का कलकत्ता जुबिली आर्ट एकेडेमी के अध्यापक श्री रणदाप्रसाद दासगुप्त के साथ शिल्प के सम्बन्ध में वार्तालाप

स्वामीजी का कलकत्ता जुबिली आर्ट एकेडेमी के अध्यापक श्री रणदाप्रसाद दासगुप्त के साथ शिल्प के सम्बन्ध में वार्तालाप आदि।

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धर्मस्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद का इन्द्रियसंयम, शिष्यप्रेम, रन्धन में कुशलता तथा असाधारण स्मृति

स्वामीजी का इन्द्रियसंयम, शिष्यप्रेम, रन्धन में कुशलता तथा असाधारण स्मृति – राय गुणाकार भारतचन्द्र व माइकेल मधुसूदन दत्त के सम्बन्ध में राय।

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धर्मस्वामी विवेकानंद

भारत की बुरी दशा का कारण

भारत की बुरी दशा का कारण – उसे दूर करने का उपाय -वैदिक ढाँचे में देश को फिर से ढालना और मनु, याज्ञवल्कय आदि जैसे मनुष्योंको तैयार करना।

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धर्मस्वामी विवेकानंद

यह देखकर कि इच्छा के अनुसार कार्य अग्रसर नहीं हो रहा है स्वामी विवेकानंद के चित्त में खेद

यह देखकर कि इच्छा के अनुसार कार्य अग्रसर नहीं हो रहा है स्वामीजी के चित्त में खेद – धारावाहिक कल्याण-चिन्तन द्वारा जगत् का कल्याण करना आदि।

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धर्मस्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद जी जीवन के अन्तिन दिनों में किस भाव से मठ में कहा करते थे

स्वामीजी जीवन के अन्तिन दिनों में किस भाव से मठ में कहाकरते थे – उनकी दरिद्रनारायणसेवा – देश के गरीब दुःखियों के प्रति उनकी जीती आदि।

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धर्मस्वामी विवेकानंद

वराहनगर मठ में श्रीरामकृष्णदेव के संन्यासी शिष्यों का साधन भजन – मठ की पहली स्थिति

वराहनगर मठ में श्रीरामकृष्णदेव के संन्यासी शिष्यों का साधन भजन – मठ की पहली स्थिति – स्वामीजी के जीवन के कुछ दुःखके दिन आदि।

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धर्मस्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद का मनःसंयम

स्वामीजी का मनःसंयम – स्त्री-मठ की स्थापना के संकल्प के सम्बन्ध में शिष्य से बातचीतधर्म को शिक्षा की नींव बनानी होगी आदि।

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