आत्मा अति निकट है, फिर भी उसकी अनुभूति आसानी से क्यों नहीं होती
आत्मा अति निकट है, फिर भी उसकी अनुभूति आसानी सेक्यों नहीं होती – स्वामीजी कीध्यानतन्मयता आदि।
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Read Moreमठ के सम्बन्ध में नैष्ठिक हिन्दुओं की पूर्व धारणा – स्वामीजी जैसे ब्रह्मज्ञ पुरुष द्वारा देव-देवी की पूजा करना सोचने की बात है आदि।
Read Moreश्रीरामकृष्ण का जन्मोत्सव भविष्य में सुन्दर बनाने की योजना – शिष्य को आशीर्वाद, “जब यहाँ पर आया है तो अवश्य ही ज्ञान प्राप्त होगा” आदि।
Read Moreस्थान – बेलुड़ मठ वर्ष – १९०२ ईसवी विषय – मठ में कठिन विधि-नियमों का प्रचलन – “आत्माराम कीडिबिया” व
Read Moreस्थान – बेलुड़ मठ वर्ष – १९०२ ईसव विषय – बेलुड़ मठ में जप-ध्यान का अनुष्ठान – विद्यारूपिणी कुण्डलिनी के
Read Moreस्थान – कलकत्ते से मठ में जाते हुए नाव पर वर्ष – १९०२ ईसवी विषय – स्वामीजी की अहंकार शून्यता
Read Moreस्थान – बेलुड़ मठ (निर्माण के समय) वर्ष – १८९८ ईसवी विषय – ब्रह्मचर्य रक्षा के कठोर नियम – सात्त्विक
Read Moreकाँधि मा धराली राधा, खैर की गँज्याल़ि राधा।मुण्ड मा धराली राधा, द्यो रिंगाल़ि सुपि राधा। रूम-जाँदि ठुम राधा, मैतुड़ैऽ मँज्युल़ि
Read Moreमथुरा के प्रसिद्ध श्री प्रेमानंद महाराज का कहना है कि “कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः।” इस
Read More“अतुलितबलधामं” एक प्रसिद्ध ग्रंथ है जो भगवान हनुमान की अद्वितीय शक्ति और भक्ति को दर्शाता है। इसमें हनुमान जी की
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