Author: सुरभि भदौरिया

धर्मस्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद की संस्कृत रचना

स्वामीजी की संस्कृत रचना – श्रीरामकृष्णदेव के आगमन सेभाव व भाषा में प्राण का संचार – भाषा में किस प्रकार से ओजस्विता लानीहोगी आदि।

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धर्मस्वामी विवेकानंद

निर्विकल्प समाधि पर स्वामी विवेकानंद का व्याख्यान

निर्विकल्प समाधि पर स्वामीजी का व्याख्यान – इस समाधि से कौन लोग फिर संसार में लौटकर आ सकते हैं- शिष्य द्वारा स्वामीजी की पूजा आदि।

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धर्मस्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद द्वारा शिष्य को व्यापार वाणिज्य करने के लिए प्रोत्साहित करना

स्वामीजी द्वारा शिष्य को व्यापार वाणिज्य करने के लिएप्रोत्साहित करना – वास्तविक शिक्षा किसे कहते हैं – वास्तविक शिक्षा किसे कहते हैं आदि।

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स्वामी विवेकानंद

“उद्बोधन” पत्र की स्थापना – इस पत्र के लिए स्वामी त्रिगुणातीतानन्दजी का अमित कष्ट तथा त्याग

स्थान – बेलुड़, किराये का मठ वर्ष – १८९८ ईसवी विषय – “उद्बोधन” पत्र की स्थापना – इस पत्र के

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धर्मस्वामी विवेकानंद

भगिनी निवेदिता आदि के साथ स्वामी विवेकानंद का अलीपुर पशुशालादेखने जाना

भगिनी निवेदिता आदि के साथ स्वामीजी का अलीपुर पशुशालादेखने जाना – पशुशाला देखते समय वार्तालाप तथा हँसी – सम्बन्ध में महामुनि पतंजलि का मत आदि।

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धर्मस्वामी विवेकानंद

श्रीरामकृष्ण मठ को अद्वितीय धर्मक्षेत्र बना लेने की स्वामी विवेकानंद की इच्छा

श्रीरामकृष्ण मठ को अद्वितीय धर्मक्षेत्र बना लेने की स्वामीजी की इच्छा – मठ में ब्रह्मचारियों को किस प्रकार शिक्षा देने का संकल्प था आदि।

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धर्मस्वामी विवेकानंद

भारत की उन्नति का उपाय क्या है?

भारत की उन्नति का उपाय क्या है? – दूसरों के लिए कर्म काअनुष्ठान या कर्मयोग। आप भी पढ़ें और समझने की कोशिश करे भारत की उन्नति का उपाय।

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धर्मस्वामी विवेकानंद

शुद्ध ज्ञान व शुद्ध भक्ति एक हैं

शुद्ध ज्ञान व शुद्ध भक्ति एक हैं – पूर्णप्रज्ञ न होने पर प्रेम कीअनुभूति असम्भव है – यथार्थ ज्ञान और भक्ति प्राप्त न हो, तभी तक विवाद है आदि।

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धर्मस्वामी विवेकानंद

धर्म प्राप्त करना हो तो गृहस्थ व संन्यासी दोनों के लिएकामकांचन के प्रति आसक्त्ति का त्याग करना एक जैसा ही आवश्यक है

धर्म प्राप्त करना हो तो गृहस्थ व संन्यासी दोनों के लिएकामकांचन के प्रति आसक्त्ति का त्याग करना एक जैसा ही आवश्यक है -कृपासिद्ध किसे कहते हैं।

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