स्वामी विवेकानंद के पत्र – श्री प्रमदादास मित्र को लिखित (19 नवंबर, 1888)
स्वामी विवेकानंद ने यह पत्र वराहनगर मठ से श्री प्रमदादास मित्र को 19 नवंबर, 1888 को लिखा था। पढ़ें स्वामी विवेकानंद जी का यह पत्र हिंदी में।
Read Moreधर्म, दर्शन और अध्यात्म आदि से जुड़ी किताबें पढ़ें यहाँ
स्वामी विवेकानंद ने यह पत्र वराहनगर मठ से श्री प्रमदादास मित्र को 19 नवंबर, 1888 को लिखा था। पढ़ें स्वामी विवेकानंद जी का यह पत्र हिंदी में।
Read Moreस्वामी विवेकानंद ने यह पत्र वृन्दावन से श्री प्रमदादास मित्र को 20 अगस्त, 1888 को लिखा था। पढ़ें विवेकानंद जी की यह चिठ्ठी हिंदी में।
Read Moreअयोध्या से वृन्दावन धाम पहुँचने पर स्वामी विवेकानंद ने यह पत्र श्री प्रमदादास मित्र को 12 अगस्त, 1888 को लिखा था।
Read Moreनवग्रह मनुष्य-जीवन के हर पहलू को प्रभावित करते हैं। ये जीवंत देव-शक्तियाँ हैं। पढ़ें नव ग्रह की कथा, मंत्र, पूजाविधि आदि विस्तार से हिंदी में।
Read Moreकेतु ग्रह अनिष्टकारी होने से व्यक्ति रोगी होता है। इसकी प्रतिकूलता से दाद-खाज व कुष्ठ जैसे रोग होते हैं। जानें केतु की शांति के उपाय।
Read Moreराहु ग्रह को कार्य-सिद्धि में बाधा पैदा करने वाला व दुर्घटनाओं का यह जनक माना जाता है। पढ़ें राहु की शांति का उपाय, मंत्र व अन्य जानकारियाँ।
Read Moreशनि देव राजा को रंक और रंक को राजा बनाने की सामर्थ्य रखते हैं। पढ़ें शनि महाराज की शांति के उपाय, मंत्र तथा कथा आदि समस्त उपयोगी जानकारियाँ।
Read Moreबुध भगवान ग्रहों में विद्या-बुद्धि व व्यावहारिकता के स्वामी माने जाते हैं। उनकी उपासना जीवन को सुगम बनाती है। पढ़ें बुध देव संबंधी जानकारियाँ।
Read Moreबृहस्पति देव बुद्धि और ज्ञान के स्वामी हैं। ये भक्तों पर प्रसन्न हो उन्हें सम्पत्ति व बुद्धि देते हैं और विपत्ति में रक्षा करते हैं।
Read Moreशुक्र भगवान भक्तों को ऐश्वर्य और धन-धान्य देने वाले हैं। वे औषधियों, मन्त्रों तथा रसों के भी स्वामी हैं। इनकी सामर्थ्य अद्भुत है।
Read More