धर्म

मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान – Maine Tere Hi Bharose Hanuman – Hanuman Ansh

मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान,
सागर में नैया डार दई।

काहे की या नाव बनाई,
काहे की पतवार,
रामा काहे की लगा दी जंजीर,
सागर में नैया डार दई,
मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान,
सागर में नैया डार दई।

राम नाम की नाव बनाई,
भक्ति की पतवार,
ओ रामा ज्ञान की लगा दी जंजीर,
सागर में नैया डार दई,
मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान,
सागर में नैया डार दई।

कौन सखी वामें बैठनहारी,
कौन है खेवनहार,
रामा कौन लगाहे बेड़ा पार,
सागर में नैया डार दई,
मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान,
सागर में नैया डार दई।

सीता मैया बैठनहारी,
लक्ष्मण खेवनहार,
मोरे राम जी लगावे बेड़ा पार,
सागर में नैया डार दई,
मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान,
सागर में नैया डार दई।

तुलसीदास आस रघुवर की,
चरणन में बलिहार,
मोरे बालाजी लगाहे बेडा पार,
सागर में नैया डार दई,
मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान,
सागर में नैया डार दई।

मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान,
सागर में नैया डार दई।

विदेशों में बसे कुछ हिंदी सज्जनों के आग्रह पर भजन को रोमन में भी प्रस्तुत कर रहे हैं। हमें आशा है कि ये इससे अवश्य लाभान्वित होंगे। पढ़ें यह हनुमान भजन (Hnauman Bhajan) रोमन में।

Maine Tere Hi Bharose Hanuman Bhajan

maiṃne tere hī bharose hanumāna,
sāgara meṃ naiyā ḍāra daī।।

kāhe kī yā nāva banāī,
kāhe kī patavāra,
rāmā kāhe kī lagā dī jaṃjīra,
sāgara meṃ naiyā ḍāra daī,
maiṃne tere hī bharose hanumāna,
sāgara meṃ naiyā ḍāra daī।।

rāma nāma kī nāva banāī,
bhakti kī patavāra,
o rāmā jñāna kī lagā dī jaṃjīra,
sāgara meṃ naiyā ḍāra daī,
maiṃne tere hī bharose hanumāna,
sāgara meṃ naiyā ḍāra daī।।

kauna sakhī vāmeṃ baiṭhanahārī,
kauna hai khevanahāra,
rāmā kauna lagāhe beḍa़ā pāra,
sāgara meṃ naiyā ḍāra daī,
maiṃne tere hī bharose hanumāna,
sāgara meṃ naiyā ḍāra daī।।

sītā maiyā baiṭhanahārī,
lakṣmaṇa khevanahāra,
more rāma jī lagāve beḍa़ā pāra,
sāgara meṃ naiyā ḍāra daī,
maiṃne tere hī bharose hanumāna,
sāgara meṃ naiyā ḍāra daī।।

tulasīdāsa āsa raghuvara kī,
caraṇana meṃ balihāra,
more bālājī lagāhe beḍā pāra,
sāgara meṃ naiyā ḍāra daī,
maiṃne tere hī bharose hanumāna,
sāgara meṃ naiyā ḍāra daī।।

maiṃne tere hī bharose hanumāna,
sāgara meṃ naiyā ḍāra daī।।

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सुरभि भदौरिया

सात वर्ष की छोटी आयु से ही साहित्य में रुचि रखने वालीं सुरभि भदौरिया एक डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी चलाती हैं। अपने स्वर्गवासी दादा से प्राप्त साहित्यिक संस्कारों को पल्लवित करते हुए उन्होंने हिंदीपथ.कॉम की नींव डाली है, जिसका उद्देश्य हिन्दी की उत्तम सामग्री को जन-जन तक पहुँचाना है। सुरभि की दिलचस्पी का व्यापक दायरा काव्य, कहानी, नाटक, इतिहास, धर्म और उपन्यास आदि को समाहित किए हुए है। वे हिंदीपथ को निरन्तर नई ऊँचाइंयों पर पहुँचाने में सतत लगी हुई हैं।

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