जितना पाया, उससे ज़्यादा स्वदेश को लौटाया जाए : पूनम गुप्ता

कोरोना महामारी के दौरान भारत में एक वाक्य, “आपदा में अवसर” इतना प्रचलित हुआ कि वो आम लोगों की जुबान पर चढ़ गया। देश के लोगों ने इस वाक्य के अपने-अपने मतलब निकाले और इस वाक्य का अपने-अपने तरीके से उपयोग किया। लेकिन इन सब के बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस वाक्य को ही बदल दिया और आपदा में अवसर के बीच वे लोगों के लिए आपदा में ईश्वर सरीखे हो गए।

पूनम गुप्ता भी उन्हीं में से एक हैं। स्कॉटलैंड में रह रही जानी मानी ब्रिटिश कारोबारी पूनम गुप्ता ने दूसरी लहर के मारक होते ही स्कॉटलैंड से मोर्चा संभाला और कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत में तीन हजार से ज्यादा ऑक्सीजन कंसनट्रेटर भेजे। इनमें से करीब 500 खुद अपनी कंपनी के जरिए जबकि 2500 से ज्यादा अलग अलग एनजीओ को मदद के जरिए पहुंचाए गए। पूनम कहती हैं–

“21-22 अप्रैल के आसपास मुझे लगा कि भारत में हाल खराब हो रहे हैं और लोगों को ऑक्सीजन मिलने में दिक्कत हो रही है। मैंने अपने संपर्क के जरिए सैकड़ों ऑक्सीजन कंसनट्रेटर जुटाए और फौरन भारत भेजे। कुछ दिनों बाद मुझे समझ आया कि कई एनजीओ पीड़ितों की मदद करना चाहते हैं लेकिन उन्हें ऑक्सीजन कंसनट्रेटर मिल नहीं रहे। इस वक्त मैंने अपने अंतरराष्ट्रीय संपर्को का लाभ उठाकर उन्हें कंसनट्रेटर समेत जरुरी सामान दिलाया।”

गौरतलब है कि पूनम जानी मानी पेपर कंपनी पीजी पेपर्स की सीईओ हैं, और उन्हें ‘पेपर क्वीन’ के नाम से जाना जाता है।

दिल्ली में पली-बढ़ी पूनम, भारत में अपनी ज़िंदगी के 25 साल बिताने के बाद स्कॉटलैंड चली गईं थी। वहाँ अपना बिज़नस शुरू किया, मेहनत की, पारिवारिक रिश्ते निभाए, बीमारी से लड़ीं, सम्मान पाया और जब बुलंदियों पर पहुंची तो हमेशा इस कोशिश में रहीं कि जितना स्वदेश से पाया था उससे ज्यादा स्वदेश को लौटाया जाए। आज की तारीख में पूनम गुप्ता दुनिया भर में ‘पेपर क्वीन’ के नाम से जानी जाती हैं। उनकी कंपनी पीजी पेपर्स दुनिया की मुख्य कंपनियों में शुमार है। पूनम गुप्ता ने अपनी शुरुआत पढ़ाई दिल्ली से ही की। कॉमर्स की तरफ उनका झुकाव था तो दसवीं के बाद डीपीएस मथुरा रोड से स्कॉलरशिप पाकर कॉमर्स की पढ़ाई की। फिर दिल्ली के मशहूर लेडी श्रीराम कॉलेज में इकोनॉमिक्स से ऑनर्स किया। आगे एमबीए की पढ़ाई की और साल 2002 में दिल्ली में 25 साल गुजारने के बाद वे स्कॉटलैंड चली गईं।

स्कॉटलैंड में साल 2003 में पूनम गुप्ता ने स्कॉटलैंड सरकार की तरफ से चलाये जा रहे स्टार्टअप इनीशिएटिव में हिस्सा लिया और अपने बिज़नस मॉड्यूल से उन्हें प्रभावित करने में कामयाब रहीं। आज उनका व्यापार 50 से ज्यादा देशों में फैल चुका है।

लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो चाहे आसमान में कितनी भी ऊंचाइयों तक पहुंच जाएं, उनके पैर जमीन पर ही टिके रहते हैं। उन्हें अपनी जड़ों का, अपने इतिहास का पता होता है। उन्हें ये याद रहता है कि वो कहाँ से उठे थे। पूनम गुप्ता भी उन्हीं में से एक हैं।

कोरोना महामारी के दौरान पूनम गुप्ता के प्रयासों ने उन्हें बड़े कारोबारियों की उस लीक में खड़ा कर दिया है, जो कारोबार से ज्यादा समाजसेवा को महत्व देती हैं,क्योंकि जिस दौरान पूनम और उनकी कंपनी लोगों को मदद पहुंचा रही थीं, वो खुद मोर्चे पर डटी रहीं। उन्होंने जरुरतमंदों से खुद बात की और तेजी से मदद पहुंचाने का काम किया।

लेकिन ये पहली दफा नहीं है कि पूनम गुप्ता ने भारत के लिए कुछ किया हो। वे पहले भी भारत में सामाजिक कार्य करती रही हैं। साल 2019 में उन्होंने यमुना नदी को साफ करने का अभियान शुरू किया था। इसके अलावा वो बच्चों के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनिसेफ में भी दान करती रही हैं। साथ ही बच्चों की मदद के लिए ब्रिटेन में चलाये जाने वाले “एक्शन फॉर चिल्ड्रन” नमक चैरिटी अभियान में प्रमुख दान करने वालों में से एक रहीं हैं। साल 2017 में पूनम गुप्ता तब चर्चा में आईं जब उन्होंने विराट कोहली के द्वारा बच्चों के तस्करी को रोकने के लिए चलाये गए चैरिटी अभियान में साशा जाफरी की पेंटिंग की सबसे ऊंची बोली लगाते हुए लगभग 2.9 करोड़ रुपये में खरीद लिया था। इसके अलावा महिला सशक्तिकरण को लेकर भी पूनम गुप्ता का योगदान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहनीय रहा है।

अपने इन्हीं सराहनीय कार्यों की वजह से पूनम ने काफी सम्मान भी हासिल किया। साल 2017 में पूनम गुप्ता को ब्रिटिश सरकार ने ‘ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एंपायर‘ यानी ‘ओबीई’ सम्मान से भी नवाजा। पूनम गुप्ता इसे अपनी ज़िंदगी के सुखद आश्चर्यों में से एक बताती हैं। वो एक साक्षात्कार में देश के लिए काम करने की वजह पूछे जाने पर कहती हैं कि ये उनकी ड्यूटी है। वो आगे कहती हैं कि इस देश ने उन्हें जितना दिया है, उसे लौटाना भी तो होगा। जब उनसे ये पूछा जाता है कि वो भारत की महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए क्या संदेश देना चाहेंगी तो पूनम गुप्ता कहती हैं–

“मैं उनसे कहना चाहूंगी कि किसी को ये मत बताने दो कि ये तुम नहीं कर सकती। खुद पर भरोसा रखो और अपना काम करो। इसके अलावा सब बहानेबाजी है”।

2 thoughts on “जितना पाया, उससे ज़्यादा स्वदेश को लौटाया जाए : पूनम गुप्ता

  • August 15, 2021 at 9:44 pm
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    Very nice. Much appreciative work done by Poonam Maam

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    • September 20, 2021 at 12:41 pm
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      Rashid Ji, thank you for your comment. Poonam Ji, indeed, is an inspiring personality and her mission to help her country and humanity is worth praising. Keep reading HindiPath.

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