दुर्गा चालीसा – Durga Chalisa in Hindi

Shri Durga Chalisa by Anuradha Paudwal – अनुराधा पौडवाल द्वारा गायी दुर्गा चालीसा

दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa) माँ का आशीर्वाद पाने का अचूक उपाय है। मां अपने भक्तों के सारे कष्ट, सभी दुःख दूर करने वाली हैं। दुर्गा चालीसा पाठ (Maa Durga Chalisa) भक्त के जीवन को दैवीय ऊर्जा से परिपूर्ण कर देता है। उसका हृदय साहस, श्रद्धा आदि दैवीय गुणों भर जाता है। शुद्ध अन्तःकरण से किया गया दुर्गा चालीसा का पाठ मनोवांछित फल देने वाला है। पढ़ें दुर्गा चालीसा हिंदी में (Shri Durga Chalisa in Hindi)–

नमो नमो दुर्गे सुख करनी,
नमो नमो अम्बे दुःख हरनी।

निराकार है ज्योति तुम्हारी,
तिहूं लोक फैली उजियारी।

शशि ललाट मुख महा विशाला,
नेत्र लाल भृकुटि विकराला।

रूप मातु को अधिक सुहावे,
दरश करत जन अति सुख पावे।

तुम संसार शक्ति मय कीना,
पालन हेतु अन्न धन दीना।

अन्नपूरना हुई जग पाला,
तुम ही आदि सुन्दरी बाला।

प्रलयकाल सब नाशन हारी,
तुम गौर शिव शंकर प्यारी।

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें,
बह्या विष्णु तुम्हें नित ध्यावै।

रूप सरस्वती को तुम धारा,
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा।

धरा रूप नरसिंह को अम्बा,
परगट भई फाड़कर खम्बा।

रक्षा करि प्रहलाद बचायो,
हिरणाकुश को स्वर्ग पठायो।

लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं,
श्री नारायण अंग समाहीं॥

क्षीरसिंधु में करत विलासा,
दयासिंधु दीजै मन आसा।

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी,
महिमा अमित न जात बखानी॥

मातंगी धूमावति माता,
भुवनेश्वरि बगला सुख दाता।

श्री भैरव तारा जग तारिणी,
क्षिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥

केहरि वाहन सोहे भवानी,
लांगुर वीर चलत अगवानी।

कर में खप्पर खड्ग विराजे,
जाको देख काल डर भाजे॥

सोहे अस्त्र और त्रिशूला,
जाते उठत शत्रु हिय शूला।

नाग कोटि में तुम्हीं विराजत,
तिहुं लोक में डंका बाजत॥

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे,
रक्तबीज शंखन संहारे।

महिषासुर नृप अति अभिमानी,
जेहि अधिभार मही अकुलानी॥

रूप कराल काली को धारा,
सेना सहित तुम तिहि संहारा।

परी गाढ़ संतन पर जब-जब,
भई सहाय मात तुम तब-तब॥

अमरपुरी औरों सब लोका,
तब महिमा सब रहे अशोका।

बाला में है ज्योति तुम्हारी,
तुम्हें सदा पूजें नर नारी॥

प्रेम भक्ति से जो जस गावें,
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवै।

ध्यावें जो नर मन लाई,
जन्म मरण ताको छुट जाई॥

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी,
योग नहीं बिन शक्ति तुम्हारी।

शंकर अचारज तप कीनो,
काम अरु क्रोध सब लीनो॥

निशदिन ध्यान धरो शंकर को,
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको।

शक्ति रूप को मरम न पायो,
शक्ति गई तब मन पछितायो॥

शरणागत हुई कीर्ति बखानी,
जय जय जय जगदम्ब भवानी।

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा,
दई शक्ति नहिं कीन विलंबा।

मोको मातु कपट अति घेरो,
तुम बिन कौन हरे दुःख मेरो।

आशा तृष्णा निपट सतावे,
रिपु मुरख भोहि अति डरपावे॥

शत्रु नाश कीजै महारानी,
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी।

करो कृपा हे मातु दयाला,
ऋद्धि सिद्धि दे करहु निहाला।।

जब लगि जियौं दया फल पाऊं,
तुम्हरो जस मैं सदा सुनाऊं।
दुर्गा चालीसा जो गावै,

सब सुख भोग परम पद पावें॥
देवीदास शरण निज जानी,

करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥

॥ दोहा ॥

शरणागत रक्षा करे,
भक्त रहे निःशंक।
मैं आया तेरी शरण में,
मातु लीजिए अंक॥

सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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