बीरबल गाय राँधत

बीरबल गाय राँधत बहुत ही रोचक कहानी है। इस कहानी में बीरबल अपनी वाक्पटुता से अकबर को निरुत्तर कर देता है। कहानी समझने के लिए “राँधना” शब्द समझना ज़रूरी है, जिसका अर्थ होता है “पकाना”। बाक़ी कहानियाँ पढ़ने के लिए कृपया यहाँ जाएँ – अकबर बीरबल की कहानियां

ऐसा देखा जाता है कि बादशाह अकबर को हँसी मजाक से बड़ा प्रेम था। इसी कारण बात-बात में उससे और बीरबल से हँसी हो जाया करती थी। हँसी-हँसी में अक्सर बादशाह क्रुद्ध भी हो जाता, परन्तु बीरबल कभी क्रोधित नहीं होता था। इस बात को मन में विचार कर अकबर ने बीरबल को क्रोधित करने की एक नई युक्ति निकाली।

अकबर ने बीरबल से कहा, “बीरबल गाय राँधत।”

तब उत्तर में बीरबल ने कहा, “बादशाह शूकर खाय।”

बीरबल तो अकबर के मुख से उपरोक्त पहेली के निकलते ही उसका अर्थ समझकर क्रोधित न हुआ, परन्तु बादशाह अकबर क्रोधित हो गया और बीरबल से बोला, “तुम मुझे मजाक के बहाने सूअर खिलाना चाहते हो।”

बीरबल बोला, “आप भी तो मुझको गाय खिलाते हैं।”

बादशाह अपने काफिये का अर्थ बदल कर बोला, “मैंने तो तुम्हें राँधते वक्त गाने को कहा था। बीरबल गाय राँधत मतलब बीरबल पकाते हुए गाता है।”

बीरबल ने उत्तर दिया, “ग़रीबपरवर! भला मैंने शूकर राँधने को कब कहा था। मैं तो कह रहा था कि बादशाह शुक रखाय यानी कि आप शुक (तोते) की रखवाली करते हैं। आप बिना अर्थ समझे अकारण क्रोधित होते हैं।”

बीरबल की हाज़िरजवाबी से बादशाह निरुत्तर होकर हँसने लगा।

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