कितनी चूड़ियाँ – अकबर-बीरबल की कहानी

“कितनी चूड़ियाँ” कहानी वहाँ से शुरू होती है, जहाँ पिछली अकबर-बीरबल की कहानी चुप्पा सबसे भला समाप्त होती है। इस कहानी में बीरबल अपनी हाज़िरजवाबी से अकबर के प्रश्न का समाधान कर देता है। अन्य कहानियाँ यहाँ पढ़ें – अकबर-बीरबल की कहानियां

एक दिन बादशाह अकबर दरबार के कामों से निपटकर संध्या के समय आराम बाग में बीरबल से मनोरंजन की बातें कर रहा था।

इसी बीच अकबर ने बीरबल की परीक्षा लेने के लिए पूछा, “बीरबल! तुमने अनेकों बार अपनी स्त्री के हाथ-से-हाथ मिलाया होगा। क्या बतला सकते हो कि उसके हाथ में कितनी चूड़ियाँ हैं?”

बीरबल ने उत्तर दिया, “ग़रीबपरवर! इधर बहुत दिनों से मुझे अपनी पत्नी के हाथ से हाथ मिलाने का सुअवसर नहीं मिला। फिर भी मैं विश्वास के साथ कहने को तैयार हूँ कि आप जिस दाढ़ी पर अपना हाथ नित्य फेरते हैं और उसे देखा करते हैं, उसके सौवें हिस्से के बराबर मेरी स्त्री के हाथ में चूड़ियाँ हैं। यदि आपको विश्वास न हो तो उन्हें गिनकर अपनी शंका समाधान कर लें।”

बीरबल की वाक्पटुता देखकर अकबर हँसने को मजबूर हो गया।

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