Author: सन्दीप शाह

धर्म

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग – Mallikarjun Jyotirling

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का दर्शन-पूजन अर्चन करने वाले भक्तों की सभी सात्त्विक मनोकामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं। सभी बाधाएँ समाप्त हो जाती हैं।

Read More
धर्म

सोमनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंग – Somnath Temple Jyotirling

सोमनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंग के दर्शन से लौकिक-पारलौकिक सारे कृत्य अनायास सफल हो जाते हैं। पढ़ें सोमनाथ का महत्व तथा ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा।

Read More
कविता

तुम्हें पुकार रहा हूँ

“तुम्हें पुकार रहा हूँ” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। कवि अपनी गुहार सुने जाने की प्रतीक्षा के समय भावों को व्यक्त कर रहा है।

Read More
कविता

दृग नीर चढ़ाऊँ

“दृग नीर चढ़ाऊँ” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें कवि अमूर्त प्रिय के वियोग को व्यक्त कर रहा है। पढ़े और आनंद ले इस कविता का।

Read More
कविता

आज नहीं तो कल आओगे

“आज नहीं तो कल आओगे” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें कवि झंझावतों को पार कर अन्ततः प्रेमपूर्ण विजय की कामना कर रहा है।

Read More
कविता

अर्घ्य चढ़ाऊँ

“अर्घ्य चढ़ाऊँ” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया ‘नवल’ द्वारा हिंदी खड़ी बोली में रचित कविता है। इसमें कवि विरह की अकुलाती वेदना व्यक्त कर रहा है।

Read More
कविता

साध अधूरी

“साध अधूरी” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें कवि अधूरी ख़्वाहिश की व्यथा को दर्शा रहा है। पढ़ें और आनंद लें इस कविता का–

Read More
कविता

खाली ही लौटा मंदिर से

“खाली ही लौटा मंदिर से” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया ‘की हिंदी कविता है। कवि अपने स्नेहमय विरोध को अमूर्त जीवनरूपी प्रिय से व्यक्त कर रहा है।

Read More
कविता

तेरा चित्र नहीं बन पाया

“तेरा चित्र नहीं बन पाया” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। कवि अपने स्नेहमय विरोध को अमूर्त जीवनरूपी प्रिय से व्यक्त कर रहा है।

Read More
कविता

पीड़ा का जग में नाम नहीं होता – स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया

“पीड़ा का जग में नाम नहीं होता” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। कवि परिश्रम और लगन के गुणों को विकसित करने का आह्वान कर रहा है।

Read More
हिंदी पथ
error: यह सामग्री सुरक्षित है !!