अधिकार बना रहने दो
“अधिकार बना रहने दो” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया ‘नवल’ द्वारा हिंदी खड़ी बोली में रचित कविता है। इसमें कवि वेदना के स्वरों को मुखरित कर रहा है।
Read More“अधिकार बना रहने दो” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया ‘नवल’ द्वारा हिंदी खड़ी बोली में रचित कविता है। इसमें कवि वेदना के स्वरों को मुखरित कर रहा है।
Read More“तुम्हारी शपथ में तुम्हारा रहूँगा” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया ‘नवल’ द्वारा हिंदी भाषा में रचित कविता है।
Read More“कौन धरा पर उतरा है” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। यह कविता बासंती ऋतु के आगमन और उसके स्वागत का सुंदर वर्णन करती है।
Read More“ऋतु आई बासंती प्यारी” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इस कविता में बसंत ऋतु मनभावन रूप का बड़ा ही सुंदर वर्णन है।
Read More“ऋतु बासंती आई” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया ‘नवल’ द्वारा हिंदी खड़ी बोली में रचित कविता है। यह कविता वसन्त के मनोहारी रूप को दिखलाती है।
Read More“बसंती समीकरण” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। कवि के ये छंद बसन्त ऋतु के मनमोहक स्वरूप को समर्पित हैं।
Read More“गीत” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। यह वासंतीव गीत प्रकृति के नव विस्तार और उसमें हो रहे नव प्राण-संचार को दर्शाता है।
Read More“प्यार के देवता” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें कवि अपने विरह की भावनाओं को शब्दों के माध्यम से व्यक्त कर रहा है।
Read More“सभ्यता के शिखर पर” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें बताया है कि आज की दौड़ में हम सच्ची सभ्यता से दूर हो चुके हैं।
Read More