बीरबल की चतुरता

बीरबल की चतुरता के क़िस्से तो मशहूर ही हैं। अकबर-बीरबल की इस कहानी में बीरबल के उसी तेज़ दिमाग़ को दिखाया गया है, जो बीमारी वग़ैरह से भी कभी धीमा नहीं होता था। पढ़िए यह रोचक कहानी और आनन्द लीजिए। अन्य कहानियाँ पढ़ने के लिए कृपया यहाँ जाएँ – अकबर बीरबल की कहानियां

एक बार आश्विन के महीने में बीरबल बीमार पड़ा। जिस कारण वह महीनों दरबार में नहीं आया। एक दिन बादशाह को उसे देखने की इच्छा हुई। वह दो कर्मचारियों के साथ उसके मकान पर गया। बीरबल बादशाह को देखकर बड़ा प्रसन्न हुआ और उसका कुम्हिलाया हुआ हृदय-कमल कुछ खिल-सा गया।

अकबर-बीरबल आपस में बड़ी देर तक वार्तालाप करते रहे। न बीरबल बादशाह अकबर को छोड़ना चाहता था और न बादशाह बीरबल को ही। बातचीत में कई घंटों का समय व्यतीत हो गया। इसी बीच बीरबल को पाखाना मालूम हुआ। ऐसी विवशता के कारण वह बादशाह से कुछ देर की मुहलत लेकर बगल की एक कोठरी में पाखाना फिरने गया।

इस बीच बादशाह के जी में बीरबल के बुद्धि की परीक्षा की बात समाई। उसने ख्याल किया कि बीरबल महीनों से बीमार है; शायद उसकी चतुरता में कुछ कमी पड़ गयी हो। जानना चाहिये कि अब यह कितना चतुर रह गया है। नौकरों द्वारा उसके पलंग के चारों पायों तले चार कागज के टुकड़े रखवाकर अकबर खामोश रहा। थोड़ी देर बाद बीरबल पाखाने से लौटकर आया और अपने पलंग पर लेट गया।

बादशाह अकबर उसकी परीक्षा के अभिप्राय से इधर-उधर की बातें छेड़कर उसे झुलावा देने लगा। बीरबल एक तरफ बादशाह की बात सुनता जाता था, दूसरी तरफ किसी चीज की खोज में व्यस्त था। वह ऊपर नीचे इस प्रकार से देख रहा था मानो किसी चीज का अनुसंधान कर रहा हो।

बादशाह ने उसकी उसक-पुसक का कारण पूछा। बीरबल ने कहा, “पृथिवीनाथ! जान पड़ता है कि यहाँ पर कुछ रक्को-बदल हो गया है? बादशाह अकबर अनजान-सा मुँह बनाकर बोले, “क्या रक्को-बदल हुआ है?” बीरबल ने उत्तर दिया, “मुझे मालूम होता है कि या तो इस मकान की दीवाल कागज भर नीचे को दब गई है या मेरी पलंग एक कागज ऊँची हो गई है।”

बादशाह ने कहा, “हाँ… हाँ… अक्सर देखा जाता है कि बीमारी की दशा में निर्बलता के कारण लोगों के दिमाग़ में तुम्हारे समान ही फितूर आ जाता है। परन्तु दरअसल में यह बात ठीक नहीं रहती।” बीरबल ने उत्तर दिया, “पृथिवीनाथ! ऐसा नहीं हो सकता। मैं बीमार हूँ, तो मेरी बुद्धि बीमार नहीं है।”

बादशाह अकबर बीमारी में भी बीरबल की पहले ही सी चतुरता देखकर बड़े प्रसन्न हुए और उससे असली भेद प्रकट कर दिया।

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