रुरु और सर्प-यज्ञ की कथा – महाभारत का बारहवाँ अध्याय (पौलोमपर्व)

“रुरु और सर्प-यज्ञ की कथा” महाभारत के अन्तर्गत आदिपर्व के पौलोमपर्व में आती है। यह पौलोम पर्व का अन्तिम अध्याय

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डुण्डुभ की आत्मकथा व उपदेश – महाभारत का ग्यारहावाँ अध्याय (पौलोमपर्व)

“डुण्डुभ की आत्मकथा व अहिंसा का उपदेश” नामक यह कथा महाभारत में आदि पर्व के अन्तर्गत पौलोम पर्व में आती

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डुण्डुभ की प्राण-रक्षा – महाभारत का दसवाँ अध्याय (पौलोम पर्व)

“डुण्डुभ की प्राण-रक्षा” अध्याय महाभारत के आदि पर्व में पौलोम पर्व के अन्तर्गत आता है। पिछली कथा में प्रमद्वरा के

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प्रमद्वरा का जीवित होना – महाभारत का नवम अध्याय (पौलोमपर्व)

प्रमद्वरा का जीवित होना असंभव-सा प्रतीत होता था। पिछले अध्याय में प्रमद्वरा की साँप के काटने से मृत्यु हो चुकी

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प्रमद्वरा को सर्पदंश – महाभारत का आठवाँ अध्याय (पौलोमपर्व)

“प्रमद्वरा को सर्पदंश” नामक यह कथा महाभारत का अष्टम अध्याय है। यह कथा आदिपर्व के अन्तर्गत पौलोम पर्व में आती

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अग्नि के शाप का मोचन – महाभारत का सातवाँ अध्याय (पौलोमपर्व)

“अग्नि के शाप का मोचन” नामक यह कथा महाभारत के आदिपर्व के अन्तर्गत पौलोमपर्व में आती है। यह महाभारत का

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भृग का अग्निदेव को शाप – महाभारत का छठा अध्याय (पौलोम पर्व)

“भृग का अग्निदेव को शाप” नामक यह कथा महाभारत के आदिपर्व के अन्तर्गत पौलोमपर्व में आती है। यह पौलोम पर्व

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पुलोमा और अग्नि का संवाद – महाभारत का पाँचवाँ अध्याय (पौलोमपर्व)

पुलोमा और अग्नि का संवाद महाभारत की आरंभिक कहानी है। यह कथा बड़ी ही रोचक है। यह आदि पर्व के

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