सफलता के लिए जीवनदृष्टि व संबंधों की कला सिखाने वाली सर्वश्रेष्ठ पुस्तक

भुवनेश शर्मा
भुवनेश शर्मा

भुवनेश शर्मा हिन्दी के पुराने ब्लॉगर्स में से एक हैं। वे पेशे से अधिवक्ता हैं और पठन-पाठन में गहरी रुचि रखते हैं। भुवनेश ने हिन्दी की कई चर्चित ई-पुस्तकों को एकत्रित कर इंटरनेट पर जन-सामान्य के लिए उपलब्ध कराने का काम किया है। वे अपने विचारों को हिन्दी पन्ना पर लिपिबद्ध करते हैं, हालाँकि अब लंबे अरसे से यहाँ सन्नाटा छाया हुआ है। इस लेख में भुवनेश अपनी प्रिय हिंदी पुस्तक के बारे में चर्चा कर रहे हैं।

यूं तो किताबें पढ़ना पिछले कुछ समय में कम हुआ है, पहले जहां कुछ भी जो उपलब्‍ध हुआ पढ़ लेते थे वहीं अब चुनिंदा पुस्‍तकें ही पढ़ता हूं। चुनिंदा पुस्‍तकें मैं उन्‍हें मानता हूं जिन्‍होंने वाकई जीवन को, सोचने के तरीके को गहरे तौर पर प्रभावित किया है और जिनमें लिखी बातों की प्रासंगिकता समय गुजरने के बावजूद कायम रहती है, जब भी उनको पलटें तब पढ़ते पढ़ते कितना समय बीत गया पता ही नहीं लगता।

आज मैं उन्‍हीं चुनिंदा पुस्‍तकों में से अपनी एक पसंदीदा पुस्‍तक के बारे में लिखूंगा। वैसे तो मैंने बहुत सी बेस्‍टसेलर श्रेणी में आने वाली पुस्‍तकें पढ़ी हैं पर जब इस पुस्‍तक को पढ़ा तो समझ में आया कि क्‍यों ये पुस्‍तक प्रकाशित होने के लगभग अस्‍सी वर्ष बाद भी सर्वाधिक पढ़े जाने वाली और बिकने वाली पुस्‍तकों में गिनी जाती है। विदेशी लेखकों की श्रेणी में मैं इन्‍हें अपना पसंदीदा लेखक मानता हूं। हालांकि विदेशी शब्‍द का यहां प्रयोग करना ठीक तो नहीं है क्‍योंकि कोई भी लेखक किसी देश-विशेष या भाषा-विशेष भर से ही संबंध नहीं रखता। उसकी कही बातें सभी सीमाओं से परे और सबके लिए उपयोगी होती हैं।

चलिए बात करते हैं उस पुस्‍तक की जिसका नाम है- ‘हाउ टू विन फ्रेंड्स एण्‍ड इनफ्लुएंस पीपुल’ और इसके लेखक हैं डेल कारनेगी। इस पुस्‍तक के हिन्‍दी अनुवाद की प्रति मेरे पास सबसे पहले एक मित्र के माध्‍यम से पहुंची। वह मित्र मार्केटिंग की नौकरी किया करते थे और खास बात कि उनकी पुस्‍तकें या साहित्‍य पढ़ने में कोई रुचि मैंने नहीं देखी। जब उनके यहां इस पुस्‍तक को मैंने देखा तो मुझे आश्‍चर्य हुआ। उन्‍होंने इस पुस्‍तक की प्रशंसा की और मुझे भी इसे पढ़ने को दिया। उसके बाद से उनसे मुलाकातें बहुत कम हुईं और पुस्‍तक मेरे पास ही रखी रही। वे मित्र कहीं बाहर रहने लगे परंतु उनकी पुस्‍तक अब तक एक अनमोल तोहफे के रूप में रखी है जो कि अनजाने में ही मेरे पास रह गई। बाद में इस पुस्‍तक की मूलभाषा अंग्रेजी में भी मैंने ये पुस्‍तक खरीदी हालांकि आज भी मैं इसे हिन्‍दी में ही पढ़ता हूं।

इस पुस्‍तक का हिन्‍दी अनुवाद ‘लोक व्‍यवहार’ के नाम से उपलब्‍ध है। हालांकि हिन्‍दी में पढ़ते हुए कहीं से ये नहीं लगता कि इसे मूलत: किसी और भाषा में लिखा गया है। इतनी सरल भाषा और इतनी आसानी से समझ में आने वाली यह पुस्‍तक उन लोगों को भी आकर्षित करती है जो पढ़ने के शौकीन नहीं जैसा कि मेरे मित्र के साथ भी हुआ। इस पुस्‍तक की असल खासियत है इसकी उपयोगिता। इस पुस्‍तक को पढ़ने का सुझाव मेरे कार्यक्षेत्र में बहुत ही उम्रदराज मेरे सीनियर ने भी दिया था जिन्‍होंने लगभग आधी सदी पहले इसे पढ़ा होगा। इसी बात से अंदाजा लग जाता है कि इसमें कुछ तो खास है जो इतना समय गुजरने के बावजूद ये पुरानी नहीं लगती।

हम अपने जीवन में किस तरह लोगों से व्‍यवहार करते हैं, उनसे बातचीत करते हैं ये ऐसा विषय है जो हमारे संबंधों, कार्यक्षेत्र, हमारे पारिवारिक और सामाजिक जीवन को बहुत हद तक प्रभावित करता है। अमेरिका के सबसे सफल उद्योगपतियों में से एक जॉन डी. रॉकफेलर ने कहा था कि लोगों से व्‍यवहार करने की कला भी उसी तरह खरीदी जाने वाली एक वस्‍तु है जैसे कि शक्‍कर या कॉफी और मैं इस कला के लिए दुनिया की किसी भी चीज से ज्‍यादा कीमत देने को तैयार हूं।

डेल कारनेगी ने कहा है कि जो कला दुनिया की किसी भी चीज से ज्‍यादा कीमती है, उसे सिखाने के लिए दुनिया के हर कॉलेज में कोर्स चलने चाहिए परंतु मैंने ऐसे किसी कोर्स या कॉलेज का नाम नहीं सुना और जब उन्‍होंने स्‍वयं इस पर एक कोर्स बनाने के लिए पुस्‍तकों की खोज शुरू की तो उन्‍हें एक भी पुस्‍तक नहीं मिली और तभी इस विषय पर लिखने की जरूरत उन्‍हें महसूस हुई।

हमारे जीवन की सफलता और समृद्धि इस बात पर निर्भर करती है कि लोगों से हम किस तरह से व्‍यवहार कर रहे हैं। लोग सफल बनना चाहते हैं, लोकप्रिय बनना चाहते हैं, लोगों का चहेता बनना चाहते हैं, उनसे अपनी बात मनवाना चाहते हैं तो ऐसी कौन सी बातें हैं जो हमें अमल में लानी चाहिए इस विषय पर लिखी गई ये सबसे प्रेक्‍टीकल और सबसे बेहतरीन पुस्‍तक है। हम अक्‍सर बहस करते हैं, दूसरों की गलतियां निकालते हैं, उनकी आलोचना करते हैं पर फिर भी बात बनने की बजाय और बिगड़ती जाती है। ऐसे में दूसरे किस तरीके से सोचते हैं और क्‍या चाहते हैं ये हमें जानना बहुत जरूरी है बजाय इसके कि हम उनके बारे में क्‍या सोचते हैं।

मानवीय संबंधों के मनोविज्ञान को समझाने वाली इस आसान सी पुस्‍तक को पढ़ने का मैं सभी को सुझाव दूंगा। आप चाहे सार्वजनिक जीवन में हो, किसी भी व्‍यवसाय या क्षेत्र में काम करते हों, आप इसे पढ़कर अपने जीवन को निश्चित तौर पर बेहतर बनाने के गुर सीखेंगे और आपके संबंध चाहे निजी हों, पारिवारिक हों या सामाजिक पहले से अधिक प्रगाढ़ और मधुर होंगे।

— भुवनेश शर्मा

One thought on “सफलता के लिए जीवनदृष्टि व संबंधों की कला सिखाने वाली सर्वश्रेष्ठ पुस्तक

  • November 28, 2018 at 2:44 pm
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    बहुत ही सारगर्भित लेख है, वहुत खूब,

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