भारतीय जीवन में वेदान्त का प्रभाव – स्वामी विवेकानंद
“भारतीय जीवन में वेदान्त का प्रभाव” नामक इस भाषण में स्वामी विवेकानंद वेदांत का अर्थ और उसका व्यावहारिक क्रियान्वयन समझा रहे हैं।
Read More“भारतीय जीवन में वेदान्त का प्रभाव” नामक इस भाषण में स्वामी विवेकानंद वेदांत का अर्थ और उसका व्यावहारिक क्रियान्वयन समझा रहे हैं।
Read More“मेरी क्रान्तिकारी योजना” नामक भाषण स्वामी विवेकानंद ने मद्रास में दिया था। इसमें वे भारत-उन्नति की अपनी योजना की चर्चा कर रहे हैं।
Read More“मद्रास-अभिनन्दन का उत्तर” नामक इस व्याख्यान में स्वामी विवेकानंद समझा रहे हैं कि धर्म ही भारतीय जीवन का आधार है।
Read More“वेदान्त का उद्देश्य” नामक व्याख्यान में स्वामी विवेकानंद जीवन में वेदांत तथा विशेषतः अद्वैत को उपयोग में लाने का आह्वान कर रहे हैं।
Read More“मदुरा-अभिनन्दन का उत्तर” में स्वामी विवेकानंद स्वामी विवेकानंद बता रहे हैं कि धर्म ही हमारा मूल है व साक्षात्कार कर हमें स्वयं ऋषि होना होगा।
Read More“परमकुड़ी-अभिनन्दन का उत्तर” नामक व्याख्यान में स्वामी विवेकानंद वेदांत व अद्वैत के अनुसार निर्भयता को जीवन में उतारने की शिक्षा दे रहे हैं।
Read More“रामनाद-अभिनन्दन का उत्तर” को “भारत में विवेकानंद” नामक पुस्तक से लिया गया है। इसमें स्वामी जी बता रहे हैं कि धर्म ही भारत का मेरुदंड है।
Read More“पाम्बन-अभिनन्दन का उत्तर” को “भारत में विवेकानंद” पुस्तक से लिया गया है। इसमें स्वामी विवेकानंद बता रहे हैं कि धर्म भारतीय जीवन का केंद्र है।
Read More“धरा पर चरन तो धरो” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया ‘नवल’ द्वारा हिंदी भाषा में रचित कविता है। कवि यथार्थ को देखने का आह्वान कर रहा है।
Read More“पैर न अब तक रुक पाये” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया ‘नवल’ द्वारा हिंदी भाषा में रचित कविता है। इसमें कवि मंज़िल को पाने के जज़्बे को दर्शा रहा है।
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