विवेकानंद जी के संग में – Talks with Swami Vivekananda

“विवेकानंद जी के संग में” पुस्तक स्वामी जी के शिष्य श्री शरच्चन्द्र चक्रवर्ती के साथ उनके संवादों का संग्रह है।

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श्रीरामकृष्ण परमहंस की मूर्ति की प्रतिष्ठा – विवेकानंद जी के संग में

नवगोपाल बाबू के भवन में श्रीरामकृष्ण की मूर्ति की प्रतिष्ठा – स्वामीजी की दीनता – नवगोपाल बाबू की सपरिवार श्रीरामकृष्ण में भक्ति आदि।

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ब्रह्म, ईश्वर, माया व जीव के स्वरूप

ब्रह्म, ईश्वर, माया व जीव के स्वरूप – “अहं ब्रह्म” इस प्रकारज्ञान न होने पर मुक्ति नहीं होती – काम-कांचन-अवतार तत्त्व आदि।

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स्वामी जी में अद्भुत शक्ति का विकास – विवेकानंद जी के संग में

विषय – स्वामी जी में अद्भुत शक्ति का विकास – स्वामीजी के दर्शनके निमित्त कलकत्ते के अन्तर्गत बड़े बाजार के

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शिष्य का प्रथम परिचय – विवेकानंद जी के संग में

विषय – स्वामीजी के साथ शिष्य का प्रथम परिचय – ‘मिरर’ सम्पादकश्रीयुत नरेन्द्रनाथ सेन के साथ वार्तालाप – इंग्लैण्ड और

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चेतना का लक्षण – विवेकानंद जी के संग में

चेतना का लक्षण – जीवन संग्राम में पटुता -धर्म अनुभूति का विषय – मनष्यजाति की जीवनीशक्ति- देश में रजोगुण का उद्दीपन कराने का प्रयोजन आदि।

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उपसंहार – स्वामी विवेकानंद (भक्तियोग)

उपसंहार अध्याय स्वामी विवेकानंद की पुस्तक भक्ति योग का अन्तिम अध्याय है। इसमें स्वामी जी बता रहे हैं कि प्रेम

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प्रेममय भगवान स्वयं अपना प्रमाण हैं – स्वामी विवेकानंद (भक्तियोग)

“प्रेममय भगवान स्वयं अपना प्रमाण हैं” नामक यह अध्याय स्वामी विवेकानन्द की प्रसिद्ध पुस्तक भक्ति योग से लिया गया है।

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प्रेम त्रिकोणात्मक – स्वामी विवेकानंद (भक्तियोग)

“प्रेम त्रिकोणात्मक” नामक यह अध्याय स्वामी विवेकानंद की प्रसिद्ध किताब भक्तियोग से लिया गया है। इसमें स्वामी जी बता रहे

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पराविद्या और पराभक्ति दोनों एक हैं – स्वामी विवेकानंद (भक्तियोग)

“पराविद्या और पराभक्ति दोनों एक हैं” नामक यह अध्याय स्वामी विवेकानंद कृत भक्ति योग से लिया गया है। इसमें स्वामी

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