जनतंत्र जवान हो गया (26 जनवरी 1986)
“जनतंत्र जवान हो गया” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें संविधान लागू होने के 20 वर्ष होने पर आयी परिपक्वता का वर्णन है।
Read More“जनतंत्र जवान हो गया” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें संविधान लागू होने के 20 वर्ष होने पर आयी परिपक्वता का वर्णन है।
Read More“आजादी पाई” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें संविधान के माध्यम से सच्ची स्वतंत्रता पाने का सुंदर वर्णन है।
Read More“दर्द ने मुझे पुकारा है” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी रचित कविता है। इसमें अपनों के हाथों देश ने जो धोखा खाया, उसका वर्णन है।
Read More“सौ-सौ नमन करो” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने वालों के प्रति कृतज्ञता झलकती है।
Read More“वर्षगाँठ आजादी की” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया ‘नवल’ द्वारा हिंदी खड़ी बोली में रचित कविता है। इसमें आज़ादी का मूल्य समझाने की चेष्टा झलकती है।
Read More“जौहर दिखलाओ” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। यह पाकिस्तान आक्रमण के समय की रचना है। इसमें देशवासियों से वीरता का आह्वान है।
Read More“मंगलमय त्यौहार” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें आज़ादी की क़ीमत पहचानने और भारत को आगे बढ़ाने की अपील परिलक्षित होती है।
Read More“सूरज चमका” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें चीन युद्ध में मिली हार की चर्चा और फलस्वरूप जागने का आवाहन है।
Read More“लिखो नया इतिहास” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया ‘नवल’ द्वारा हिंदी खड़ी बोली में रचित कविता है। इसमें देश के पुनर्निमाण का आह्वान झलकता है।
Read More“स्वतंत्रता की कीमत” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें आज़ादी का मूल्य पहचानने और तदनुरूप व्यवहार का आह्वान किया गया है।
Read More