Author: सन्दीप शाह

कविता

जनतंत्र जवान हो गया (26 जनवरी 1986)

“जनतंत्र जवान हो गया” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें संविधान लागू होने के 20 वर्ष होने पर आयी परिपक्वता का वर्णन है।

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कविता

आजादी पाई (26 जनवरी 1961)

“आजादी पाई” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें संविधान के माध्यम से सच्ची स्वतंत्रता पाने का सुंदर वर्णन है।

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कविता

दर्द ने मुझे पुकारा है (15 अगस्त 1980)

“दर्द ने मुझे पुकारा है” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी रचित कविता है। इसमें अपनों के हाथों देश ने जो धोखा खाया, उसका वर्णन है।

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कविता

सौ-सौ नमन करो (15 अगस्त 1972)

“सौ-सौ नमन करो” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने वालों के प्रति कृतज्ञता झलकती है।

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कविता

वर्षगाँठ आजादी की (15 अगस्त 1970)

“वर्षगाँठ आजादी की” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया ‘नवल’ द्वारा हिंदी खड़ी बोली में रचित कविता है। इसमें आज़ादी का मूल्य समझाने की चेष्टा झलकती है।

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कविता

जौहर दिखलाओ

“जौहर दिखलाओ” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। यह पाकिस्तान आक्रमण के समय की रचना है। इसमें देशवासियों से वीरता का आह्वान है।

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कविता

मंगलमय त्यौहार (स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 1964)

“मंगलमय त्यौहार” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें आज़ादी की क़ीमत पहचानने और भारत को आगे बढ़ाने की अपील परिलक्षित होती है।

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कविता

सूरज चमका (राष्ट्र पर्व 15 अगस्त 1963)

“सूरज चमका” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें चीन युद्ध में मिली हार की चर्चा और फलस्वरूप जागने का आवाहन है।

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कविता

लिखो नया इतिहास (राष्ट्र पर्व 15 अगस्त 1960)

“लिखो नया इतिहास” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया ‘नवल’ द्वारा हिंदी खड़ी बोली में रचित कविता है। इसमें देश के पुनर्निमाण का आह्वान झलकता है।

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कविता

स्वतंत्रता की कीमत (राष्ट्र पर्व 15 अगस्त 1960)

“स्वतंत्रता की कीमत” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। इसमें आज़ादी का मूल्य पहचानने और तदनुरूप व्यवहार का आह्वान किया गया है।

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