Author: सन्दीप शाह

कविता

राष्ट्र पर्व (15 अगस्त 1959)

“राष्ट्र पर्व” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी कविता है। आज़ादी के बाद की विसंगतियों की चर्चा इस कविता में की गयी है। अवश्य पढ़ें।

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कविता

इतिहास नया बनने को है (15 अगस्त 1958)

“इतिहास नया बनने को है” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी खड़ी बोली की कविता है। इसमें देशवासियों को बाधाएँ पार कर आगे बढ़ने का संदेश है।

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कविता

सभ्य हो जायेंगे

“सभ्य हो जायेंगे” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया की हिंदी खड़ी बोली में रचित कविता है। इस कविता में सभ्यता के स्वरूप और दशा का चित्रण है।

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कविता

आजादी का आदि पर्व (15 अगस्त 1947)

“आजादी का आदि पर्व” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया हिंदी खड़ी बोली में रचित कविता है। इस कविता की एक-एक पंक्ति देशभक्ति का जज़्बा जगाती है।

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कविता

सोने वालो जागो

“सोने वालो जागो” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया द्वारा हिंदी खड़ी बोली में रचित कविता है। इसमें निद्रा को छोड़ देश के नवनिर्माण का आह्वान किया है।

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हिंदी पथ
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