आजादी का आदि पर्व (15 अगस्त 1947)

“आजादी का आदि पर्व” स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया ‘नवल’ द्वारा हिंदी खड़ी बोली में रचित कविता है। इस कविता की विशेषता यह है कि इसकी रचना 15 अगस्त 1947 के ऐतिहासिक दिन की गयी थी। इस कविता की एक-एक पंक्ति देशभक्ति का जज़्बा जगाती है। पढ़ें यह कविता–

यह आजादी का आदि पर्व, यह महा पर्व बलिदानों का।
यह रक्त भरा इतिहास खोज लाया है वीर जवानों का |
जिनका जीवन ही विप्लव था, जो कफन लपेटे आए थे ।
आज़ादी के हित मिटने की, जो मरकर जीने आए थे।

झाँसी की रानी के कर में, तलवार दुधारी चमक उठी।
रण में मुख की आकृति उसकी, रणचण्डी-सी दमक उठी ।
वाणी में विद्युत की गर्जन, श्वासों में थी झंझा की लय ।
प्राणों में सिन्धु मचलता था, भृकुटी थी दोनों महाप्रलय।

उसने वीरों को ललकारा प्यारी आज़ादी रखने को।
उसने वीरों को ललकारा बलिवेदी पर मर मिटने को।
सुनकर उसकी हुंकार प्रबल, सबने लड़ने की ठानी थी।
जाने क्यों इतनी एक साथ पागल हो उठी जवानी थी।

सुन्दर-मुन्दर को साथ लिए वह रण करने को निकली थी।
वह काली अति विकाराली थी, घन गर्जन थी या बिजली थी।
नाना अजीम भी कूद पड़े, आजादी के समरांगण में।
जाने कितना रक्त बहा, बलिवेदी के इस प्रांगण में।

झाँसी की रानी को लखकर, टीपू भी था बौखला उठा।
सुनकर जिसको फिर ब्रिटिश राज्य डगमग डगमग डगमगा उठा।
जाने कितनी अबलाओं ने, सबला बन करके काम किया।
जाने कितने कंकालों ने शोणित देकर के नाम किया।

जाने कितनी माताओं ने अपने लालों को खोया था।
जिनकी स्मृति में हिमगिरि भी फिर सिसक-सिसक कर रोया था ।
भारत माता के पैरों की पर बेड़ी टूट न पाई थी।

पर सत्तावन तो एक नया इतिहास बनाने आया था।
आज़ादी पर मर मिटने को वह मार्ग दिखाने आया था ।
जिसके बल पर ही मिट-मिट कर हमने यह आज़ादी पाई।
जिसके बल ही आज, देखने को यह स्वर्ण घड़ी आई ॥

नवल सिंह भदौरिया

स्व. श्री नवल सिंह भदौरिया हिंदी खड़ी बोली और ब्रज भाषा के जाने-माने कवि हैं। ब्रज भाषा के आधुनिक रचनाकारों में आपका नाम प्रमुख है। होलीपुरा में प्रवक्ता पद पर कार्य करते हुए उन्होंने गीत, ग़ज़ल, मुक्तक, सवैया, कहानी, निबंध आदि विभिन्न विधाओं में रचनाकार्य किया और अपने समय के जाने-माने नाटककार भी रहे। उनकी रचनाएँ देश-विदेश की अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। हमारा प्रयास है कि हिंदीपथ के माध्यम से उनकी कालजयी कृतियाँ जन-जन तक पहुँच सकें और सभी उनसे लाभान्वित हों। संपूर्ण व्यक्तित्व व कृतित्व जानने के लिए कृपया यहाँ जाएँ – श्री नवल सिंह भदौरिया का जीवन-परिचय

सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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