स्वामी विवेकानंद के पत्र – श्री प्रमदादास मित्र को लिखित (21 फरवरी, 1889)
स्वामी विवेकानंद ने यह पत्र वराहनगर, से श्री प्रमदादास मित्र को 21 फरवरी, 1889 को लिखा था। पढ़ें स्वामी विवेकानंद जी का यह पत्र हिंदी में।
Read Moreस्वामी विवेकानंद का संपूर्ण साहित्य
स्वामी विवेकानंद ने यह पत्र वराहनगर, से श्री प्रमदादास मित्र को 21 फरवरी, 1889 को लिखा था। पढ़ें स्वामी विवेकानंद जी का यह पत्र हिंदी में।
Read Moreस्वामी विवेकानंद ने यह पत्र आँटपुर से श्री महेन्द्रनाथ गुप्त को 7 फरवरी, 1889 को लिखा था। पढ़ें स्वामी विवेकानंद जी का यह पत्र हिंदी में।
Read Moreस्वामी विवेकानंद ने यह पत्र वराहनगर, कलकत्ता से श्री प्रमदादास मित्र को 4 फरवरी, 1889 को लिखा था। पढ़ें विवेकानंद जी का यह पत्र हिंदी में।
Read Moreस्वामी विवेकानंद ने यह पत्र वराहनगर, कलकत्ता से श्री प्रमदादास मित्र को 28 नवंबर, 1888 को लिखा था। पढ़ें विवेकानंद जी का यह पत्र हिंदी में।
Read Moreस्वामी विवेकानंद ने यह पत्र वराहनगर मठ से श्री प्रमदादास मित्र को 19 नवंबर, 1888 को लिखा था। पढ़ें स्वामी विवेकानंद जी का यह पत्र हिंदी में।
Read Moreस्वामी विवेकानंद ने यह पत्र वृन्दावन से श्री प्रमदादास मित्र को 20 अगस्त, 1888 को लिखा था। पढ़ें विवेकानंद जी की यह चिठ्ठी हिंदी में।
Read Moreअयोध्या से वृन्दावन धाम पहुँचने पर स्वामी विवेकानंद ने यह पत्र श्री प्रमदादास मित्र को 12 अगस्त, 1888 को लिखा था।
Read More“कलकत्ता-अभिनन्दन का उत्तर” नामक व्याख्यान में स्वामी विवेकानंद धर्म के मूल तत्त्वों को समझने और उन्हें फैलाने का आह्वान युवकों से कर रहे हैं।
Read More“दान” नामक चेन्नई में दिए गए इस व्याख्यान में स्वामी विवेकानंद दान की पात्रता और यह किसे देना चाहिए – इस विषय की विवेचना कर रहे हैं।
Read More“भारत का भविष्य” नामक इस व्याख्यान में स्वामी विवेकानंद नए भारत के सृजन तथा उन्नति के सूत्रों पर चर्चा कर रहे हैं। पढ़ें स्वामीजी का चिंतन।
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