मनसा देवी की आरती – Mansa Devi Ki Aarti

मनसा देवी की आरती (Mansa Devi Ki Aarti) जो भी गाता है, निश्चित ही वह मनुष्य मैया की कृपा को पाता है। पढ़ें मनोवांछित फल देने वाली मनसा माता की आरती–

जय मनसा माता, मैया जय मनसा माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥ टेक

जरत्कारु मुनि पत्नि, तुम बासुक भगनी,
मैया तुम बासुक भगनी।
कश्यप की तुम कन्या, आस्तिक की माता,
मैया आस्तिक की माता॥

गर्व-धन्वन्तरी-नाशिनी, हंसवाहिनी देवी,
मैया हंसवाहिनी देवी।
सुर-नर-मुनि-गण ध्यावत,
जय मनसा माता।
मैया जय मनसा माता॥

पर्वतवासिनी, संकटनाशिनी, अक्षय धनदात्री,
मैया अक्षय धनदात्री।
पुत्र-पौत्रादि प्रदायनी, मनवांछित फलदाता,
मैया मनवांछित फल दाता॥

मनसा जी की आरती जो कोई नर गाता,
मैया जो कोई नर गाता।
कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पति पाता,
मैया सब कुछ है पाता॥

मनसा देवी की आरती के नियम

मान्यता है कि माता मनसा देवी सर्पदंश और अन्य सभी प्रकार के रोगों से रक्षा करती हैं। जो भी सच्चे मन से उनकी उपासना करता है वह जीवन में समृद्धि और निरोगी काया पाता है। विशेषतः नाग पंचमी के दिन उनकी पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है, क्योंकि नागों को उनके अधीन माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा जीवन में स्वास्थ्य और धन-धान्य देने वाली मानी गयी है। मनसा माता की आरती (Mansa Mata Ki Aarti) पूजा के पश्चात त्रुटियों के परिहार के लिए गायी जाती है। शास्त्रों का मत है कि इससे मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों को उत्तम स्वास्थ्य व सफलता प्रदान करती हैं। उनकी आरती के समय निम्नलिखित नियमों का पालन करना चाहिए–

  1. सबसे पहले तीन बार माता को पुष्प चढ़ाएँ।
  2. इसके बाद मैया को दीपक दिखाएँ।
  3. शुद्ध पात्र में घी या कपूर से आरती करें।
  4. इसके लिए विषम संख्या में बत्तियाँ जलाने का विधान है। सामान्यतः पाँच बत्तियाँ उपयोग में लायी जाती हैं, जिसे पंचप्रदीप भी कहते हैं।
  5. आरती के बाद भावना करें कि यह माता की प्रसन्नता के लिए है।

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