पंचतंत्र की कहानी – अनजान से बचो

“अनजान से बचो” कथा पंचतंत्र की पिछली कहानी बुद्धिमान ही बलवान है को आगे बढ़ाती है। इस कहानी में बड़े ही रोचक ढंग से बताया गया है कि अनजान से हमेशा सजग क्यों रहना चाहिए। बाक़ी कहानियाँ पढ़ने के लिए कृपया यहाँ देखें – पंचतंत्र की कहानियां

एक राजा के सोने के कमरे में एक सफेद जूं रहती थी। एक तो राजा के सुन्दर महल, दूसरे राजा का मजेदार खून – जूं को भला और क्या चाहिए था। महलों में रहने वालों का तो जीवन वैसे ही सुखी होता है।

किसी प्रकार से उस कमरे में एक खटमल घुस आया। जूं ने जैसे ही खटमल को राजा के पलंग में घुसते देखा, तो कहा – अरे भाई! तुम राजा के बिस्तर में कैसे घुस आए? कहीं राजा को पता चल गया तो हम दोनों की खैर नहीं। इसलिए तुम यहां से शीघ्र चले जाओ।

खटमल बड़ा चालाक था। उसने दोनों हाथ जोड़ते हुए कहा – हे बहन! देख, लोग घर आए शत्रु के साथ भी ऐसा व्यवहार नहीं करते। कहा भी गया है–

आइये, विराजिये, यह आसन है, दम लीजिए, बहुत दिनों बाद आये, कहां रहे, कहो कुशल से रहे – ऐसे शब्दों से घर आए मेहमान का स्वागत करते हैं। विद्वानों द्वारा गृहस्थों का यह सर्वदाता छोटा धर्म कहा गया है।

और मैंने आज तक अनेक प्रकार के छोटे-बड़े इन्सानों का खून पीया है, जिसमें खट्टा-मीठा, कड़वा सभी प्रकार के खून थे। किन्तु आज तक मैंने किसी राजा का खून नहीं पीकर देखा। यदि तुम कहो तो मैं कुछ दिनों के लिए तुम्हारा मेहमान बन कर राजा के खून का आनन्द ले लूं।

खटमल की मीठी-मीठी बातों में जूं आ गई थी। उसने कहा – देखो भाई, मैं इस राजा का खून बड़े ही विचित्र ढंग से और प्यार से चूसती हूं। जब राजा सो जाता है तो मैं इतने प्यार से खून चूसती हूं कि इसे बिल्कुल पता नहीं चलता। इसलिए तुम्हें भी इतनी ही होशियारी से यह काम करना होगा।

“मेरी बहन! तुम किसी प्रकार की चिन्ता मत करो। मैं राजा का खून उसी समय चूसना आरम्भ करूंगा, जब तुम उसका खून पी लोगी।”

वे दोनों ये बातें कर ही रहे थे कि इतने में राजा भी अपने कमरे में आ गया। जैसे ही राजा पलंग पर बैठा तो खटमल के मुंह में पानी भर आया और उसने झट से राजा को काट खाया और उसका खून चूसने लगा। किसी ने ठीक कहा है –

उपदेश से स्वभाव नहीं बदलता। पानी को जितना मर्जी गर्म कर लो, वह फिर से ठंडा हो जाएगा। चाहे आग ठंडी हो जाए और शीतल किरणों वाला चांद जलने वाला बन जाए, तो भी मनुष्य का स्वभाव नहीं बदला जा सकता।

उधर जैसे ही राजा को खटमल ने काटा, तो वह तड़प कर उस पलंग से उठ खड़ा हुआ और चीख कर बोला – इस पलंग में जूं अथवा खटमल जरूर हैं जिन्होंने मुझे काटा है।

राजा के नौकर उसकी बात सुनकर भागे हुए आए और पलंग पर से बिस्तर उठा कर देखने लगे। चूंकि खटमल बड़ा होशियार था, वह झट से किसी लकड़ी की दरार में घुस गया। जूं बेचारी कपड़े की सीवन में चिपकी हुई थी। वह झट से उन नौकरों को नजर आ गई। बस फिर क्या था। नौकरों ने जूं को हाथ में लेते हुए उसे मसल कर सदा के लिए समाप्त कर दिया। जूं बेचारी तो मर गई, चालाक खटमल बच गया।

इसलिए तो आपसे कहता हूं महाराज, आप अपनी बिरादरी के लोगों पर विश्वास करो। बाहर के लोगों से और अनजान से बचो। बाहर के लोगों से ही आदमी धोखे में मारा जाता है। जैसा कि आपने राजा कमुद्रम के बारे में सुना ही होगा।

“मैंने नहीं सुना मित्र, तुम ही बता दो उस राजा की कहानी”, शेर बोला।

महाराज, तो सुनिए वह कहानी – नीला गीदड़

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