रविदास जी की आरती – Ravidas Ji Ki Aarti

रविदास जी की आरती हृदय में भक्ति जागृत करती है। जो इसका नित्य गायन करता है उसकी सारी इच्छाएँ पूरी हो जाती हैं। संत रविदास जी की आरती (Ravidas Ji Ki Aarti) अन्तःकरण को शुद्ध कर देती है और जीवन दैवीय भावों से परिपूर्ण हो जाता है। पूरे विश्व में संत रविदास का चरित्र और कृतित्व पूजनीय है। वे ऐसे प्रकाशपुंज हैं, जिससे सारा जगत प्रकाशित हो रहा है। वे हिंदू धर्म के श्रेष्ठ भावों के मूर्तिमान स्वरूप हैं। जो भी अपना और समाज का कल्याण करना चाहता है, उसे संत रविदास के आध्यात्मिक विचारों की शरण में जाना ही पड़ता है। पढ़ें रविदास जी की आरती–

नामु तेरो आरती भजनु मुरारे,
हरि के नाम बिनु झूठे सगल पसारे।

नाम तेरा आसनो नाम तेरा उरसा,
नामु केसरो ले छिटकारो।

नाम तेरा अंभुला नाम तेरा चंदनोघसि,
जपे नाम ले तुझहि कउ चारे।

नाम तेरा दीवा नाम तेरो बाती,
नाम तेरो तेल ले माहि पसारे।

नाम तेरे की ज्योति जगाई,
भइलो उजिआरो भवन सगलारे।

नाम तेरो तागा नाम फूल माला,
भार अठारह सगल जूठारे।

तेरो कियो तुझ ही किया अरपउ,
नाम तेरो तुही चंवर ढोलारे।

इस अठा अठसठे चारे खानी,
इहै वरतणि है सगल संसारे।

कहै रविदास नाम तेरो आरती,
सतिनाम है हरिभोग तुम्हारे।

महात्मा रविदास की चालीसा पढ़ने के लिए कृपया यहाँ जाएँ – संत रविदास चालीसा

सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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