झूलेलाल चालीसा – Jhulelal Chalisa

झूलेलाल चालीसा अत्यन्त चमत्कारी तथा शक्तिपूर्ण स्तोत्र है। जो भक्त श्रद्धापूर्ण हृदय से इसका पाठ करता है उसे जीवन में उन्नति की राह अवश्य प्राप्त होती है तथा उसके मार्ग में जो भी बाधाएँ व रुकावटें हों वे स्वयमेव समाप्त हो जाती हैं। भगवान झूलेलाल वरुण देव के अवतार हैं। विशेषतः सिंधी हिंदू समाज में वे इष्ट देव के रूप में पूजे जाते हैं। उनका प्राकट्य दिवस ही चेटीचंड के रूप में हर्षोल्लास से मनाया जाता है। मिरखशाह के अत्याचारों से लोगों को मुक्ति दिलाने वाले भगवान झूलेलाल इस श्री झूलेलाल चालीसा (Shri Jhulelal Chalisa) के पाठ से प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा-वृष्टि अवश्य करते हैं। पढ़ें श्री झूलेलाल चालीसा–

यह भी पढ़ें – झूलेलाल आरती

॥ दोहा ॥
जय जय जल देवता,
जय ज्योति स्वरूप।
अमर उडेरो लाल जय,
झुलेलाल अनूप॥

॥ चौपाई ॥
रतनलाल रतनाणी नंदन,
जयति देवकी सुत जग वंदन।
दरियाशाह वरुण अवतारी,
जय जय लाल साईं सुखकारी।
जय जय होय धर्म की भीरा,
जिन्दा पीर हरे जन पीरा॥

संवत दस सौ सात मंझरा,
चैत्र शुक्ल द्वितिया भगऊ वारा।
ग्राम नसरपुर सिंध प्रदेशा,
प्रभु अवतरे हरे जन कलेशा॥

सिन्धु वीर ठट्ठा राजधानी,
मिरखशाह नऊप अति अभिमानी।
कपटी कुटिल क्रूर कूविचारी,
यवन मलिन मन अत्याचारी॥

धर्मान्तरण करे सब केरा,
दुखी हुए जन कष्ट घनेरा।
पिटवाया हाकिम ढिंढोरा,
हो इस्लाम धर्म चाहुँओरा॥

सिन्धी प्रजा बहुत घबराई,
इष्ट देव को टेर लगाई।
वरुण देव पूजे बहुंभाती,
बिन जल अन्न गए दिन राती॥

सिन्धी तीर सब दिन चालीसा,
घर घर ध्यान लगाये ईशा।
गरज उठा नद सिन्धु सहसा,
चारो और उठा नव हरषा॥

वरुणदेव ने सुनी पुकारा,
प्रकटे वरुण मीन असवारा।
दिव्य पुरुष जल ब्रह्मा स्वरुपा,
कर पुष्तक नवरूप अनूपा॥

हर्षित हुए सकल नर नारी,
वरुणदेव की महिमा न्यारी।
जय जय कार उठी चाहुँओरा, 
गई रात आने को भौंरा॥ 

मिरखशाह नऊप अत्याचारी,
नष्ट करूँगा शक्ति सारी।
दूर अधर्म, हरण भू भारा,
शीघ्र नसरपुर में अवतारा॥

रतनराय रातनाणी आँगन,
खेलूँगा, आऊँगा शिशु बन।
रतनराय घर ख़ुशी आई,
झुलेलाल अवतारे सब देय बधाई॥

घर घर मंगल गीत सुहाए,
झुलेलाल हरन दुःख आए।
मिरखशाह तक चर्चा आई,
भेजा मंत्री क्रोध अधिकाई॥

मंत्री ने जब बाल निहारा,
धीरज गया हृदय का सारा।
देखि मंत्री साईं की लीला,
अधिक विचित्र विमोहन शीला॥

बालक धीखा युवा सेनानी,
देखा मंत्री बुद्धि चाकरानी।
योद्धा रूप दिखे भगवाना,
मंत्री हुआ विगत अभिमाना॥

झुलेलाल दिया आदेशा,
जा तव नऊपति कहो संदेशा।
मिरखशाह नऊप  तजे गुमाना,
हिन्दू मुस्लिम एक समाना॥

बंद करो नित्य अत्याचारा,
त्यागो धर्मान्तरण विचारा।
लेकिन मिरखशाह अभिमानी,
वरुणदेव की बात न मानी॥

एक दिवस हो अश्व सवारा,
झुलेलाल गए दरबारा।
मिरखशाह नऊप ने आज्ञा दी,
झुलेलाल बनाओ बन्दी॥

किया स्वरुप वरुण का धारण,
चारो और हुआ जल प्लावन।
दरबारी डूबे उतराये,
नऊप के होश ठिकाने आये॥

नऊप तब पड़ा चरण में आई,
जय जय धन्य जय साईं।
वापिस लिया नऊपति आदेशा,
दूर दूर सब जन क्लेशा।
संवत दस सौ बीस मंझारी,
भाद्र शुक्ल चौदस शुभकारी॥

भक्तो की हर आधी व्याधि,
जल में ली जलदेव समाधि।
जो जन धरे आज भी ध्याना,
उनका वरुण करे कल्याणा॥

॥ दोहा ॥
चालीसा चालीस दिन,
पाठ करे जो कोय।
पावे मनवांछित फल,
अरु जीवन सुखमय होय॥

विदेशों में बसे कुछ हिंदू स्वजनों के आग्रह पर श्री झूलेलाल चालीसा (Shri Jhulelal Chalisa) को हम रोमन में भी प्रस्तुत कर रहे हैं। हमें आशा है कि वे इससे अवश्य लाभान्वित होंगे। पढ़ें श्री झूलेलाल चालीसा रोमन में–

dohā
jaya jaya jala devatā,
jaya jyoti svarūpa।
amara uḍero lāla jaya,
jhulelāla anūpa॥

caupāī
ratanalāla ratanāṇī naṃdana,
jayati devakī suta jaga vaṃdana।
dariyāśāha varuṇa avatārī,
jaya jaya lāla sāīṃ sukhakārī।
jaya jaya hoya dharma kī bhīrā,
jindā pīra hare jana pīrā ॥

saṃvata dasa sau sāta maṃjharā,
caitra śukla dvitiyā bhagaū vārā।
grāma nasarapura siṃdha pradeśā,
prabhu avatare hare jana kaleśā॥

sindhu vīra ṭhaṭṭhā rājadhānī,
mirakhaśāha naūpa ati abhimānī।
kapaṭī kuṭila krūra kūvicārī,
yavana malina mana atyācārī॥

dharmāntaraṇa kare saba kerā,
dukhī hue jana kaṣṭa ghanerā।
piṭavāyā hākima ḍhiṃḍhorā,
ho islāma dharma cāhu~orā॥

sindhī prajā bahuta ghabarāī,
iṣṭa deva ko ṭera lagāī।
varuṇa deva pūje bahuṃbhātī,
bina jala anna gae dina rātī॥

sindhī tīra saba dina cālīsā,
ghara ghara dhyāna lagāye īśā।
garaja uṭhā nada sindhu sahasā,
cāro aura uṭhā nava haraṣā॥

varuṇadeva ne sunī pukārā,
prakaṭe varuṇa mīna asavārā।
divya puruṣa jala brahmā svarupā,
kara puṣtaka navarūpa anūpā॥

harṣita hue sakala nara nārī,
varuṇadeva kī mahimā nyārī।
jaya jaya kāra uṭhī cāhu~orā,
gaī rāta āne ko bhauṃrā॥

mirakhaśāha naūpa atyācārī,
naṣṭa karū~gā śakti sārī।
dūra adharma, haraṇa bhū bhārā,
śīghra nasarapura meṃ avatārā॥

ratanarāya rātanāṇī ā~gana,
khelū~gā, āū~gā śiśu bana।
ratanarāya ghara kha़uśī āī,
jhulelāla avatāre saba deya badhāī॥

ghara ghara maṃgala gīta suhāe,
jhulelāla harana duḥkha āe।
mirakhaśāha taka carcā āī,
bhejā maṃtrī krodha adhikāī॥

maṃtrī ne jaba bāla nihārā,
dhīraja gayā hṛdaya kā sārā।
dekhi maṃtrī sāīṃ kī līlā,
adhika vicitra vimohana śīlā॥

bālaka dhīkhā yuvā senānī,
dekhā maṃtrī buddhi cākarānī।
yoddhā rūpa dikhe bhagavānā,
maṃtrī huā vigata abhimānā॥

jhulelāla diyā ādeśā,
jā tava naūpati kaho saṃdeśā।
mirakhaśāha naūpa taje gumānā,
hindū muslima eka samānā॥

baṃda karo nitya atyācārā,
tyāgo dharmāntaraṇa vicārā।
lekina mirakhaśāha abhimānī,
varuṇadeva kī bāta na mānī॥

eka divasa ho aśva savārā,
jhulelāla gae darabārā।
mirakhaśāha naūpa ne ājñā dī,
jhulelāla banāo bandī॥

kiyā svarupa varuṇa kā dhāraṇa,
cāro aura huā jala plāvana।
darabārī ḍūbe utarāye,
naūpa ke hośa ṭhikāne āye॥

naūpa taba paḍa़ā caraṇa meṃ āī,
jaya jaya dhanya jaya sāīṃ।
vāpisa liyā naūpati ādeśā,
dūra dūra saba jana kleśā।
saṃvata dasa sau bīsa maṃjhārī,
bhādra śukla caudasa śubhakārī॥

bhakto kī hara ādhī vyādhi,
jala meṃ lī jaladeva samādhi।
jo jana dhare āja bhī dhyānā,
unakā varuṇa kare kalyāṇā॥

dohā
cālīsā cālīsa,
dina pāṭha kare jo koya।
pāve manavāṃchita phala,
aru jīvana sukhamaya hoya॥

सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: यह सामग्री सुरक्षित है !!