पितरों की आरती – Pitar Ji Ki Aarti

पितरों की आरती गाना न केवल पूर्वजों की कृपा प्राप्त करने का साधन है, बल्कि यह हमारा कर्तव्य भी है। हमारे पितृगण सदैव हमारी सहायता करने के लिए तत्पर रहते हैं। ऐसा होना स्वाभाविक भी है, क्योंकि उनका हमारे ऊपर स्वाभाविक स्नेह है। आवश्यकता है तो बस उन्हें सच्चे दिल से याद करने की। यही स्मरण और पितरों की आरती का गायन हमें उनकी कृपा का भाजन बना देता है। पढ़ें पितर जी की आरती (Pitar Ji Ki Aarti)–

जय जय पितर जी महाराज,
मैं शरण पड़यों हूँ थारी।
शरण पड़यो हूँ थारी बाबा,
शरण पड़यो हूँ थारी॥

आप ही रक्षक आप ही दाता,
आप ही खेनवहारे।
मैं मूरख हूँ कछु नहि जाणू,
आप ही हो रखवारे॥
जय जय पितर जी महाराज…

आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी,
करने मेरी रखवारी।
हम सब जन हैं शरण आपकी,
है ये अरज गुजारी॥
जय जय पितर जी महाराज…

देश और परदेश सब जगह,
आप की करो सहाई।
काम पड़े पर नाम आपको,
लगे बहुत सुखदाई॥
जय जय पितर जी महाराज…

भक्त सभी हैं शरण आपकी,
अपने सहित परिवार।
रक्षा करो आप ही सबकी,
रटू मैं बारम्बार॥
जय जय पितर जी महाराज…

शास्त्रीय विधान के अनुसार पितरों की आरती प्रायः पितृ पूजन के बाद गायी जाती है। ऐसी मान्यता है कि अन्त में आरती गाने से पूजा में हुई किसी भी गलती का परिहार स्वतः हो जाता है।

सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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