श्री भागवत भगवान की आरती

श्री भागवत भगवान की आरती कथा के अंत करने से सब कष्टों का हरण हो जाता है और कथा में हुए दोषों का परिमार्जन भी होता है। श्रीमद्भागवत् की कथा उस अमृत की तरह है, जिसका पान तन-मन को आनन्द-लहरियों में डुबो देता है। कलयुग में सारे पाप-ताप से छूटने का सरल उपाय है श्रीमद्भागत का पाठ। फिर भी पाठ या पूजन के दौरान असावधानीवश त्रुटि होना संभव ही है। श्री भागवत भगवान की आरती (Shri Bhagwat Bhagwan Ki Hai Aarti) उन्हीं भूलों का परिमार्जन करती है और कथा का पूर्ण फल प्रदान कराती है। पढ़ें श्री भागवत भगवान की आरती–

आरति अतिपावन पुरान की,
धर्मभक्ति-विज्ञान-खानकी ॥ टेक ॥

महापुराण भागवत निर्मल।
शुक-मुख-विगलित निगम-कल्प-फल।
परमानन्दसुधा-रसमय कल।
लीला-रति-रस-रसनिधान की॥
आरति अतिपावन पुरान की…

कलिमल-मथनि त्रिताप-निवारिणि।
जन्ममृत्युमय भव-भयहारिणि।
सेवत सतत सकल सुखकारिणि।
सुमहौषधि हरि-चरित गानकी॥
आरति अतिपावन पुरान की…

विषय-विलास-विमोह-विनाशिनि।
विमल विराग विवेक विकाशिनि।
भगवत्-तत्त्व-रहस्य-प्रकाशिनि।
परम ज्योति परमात्मज्ञानकी॥
आरति अतिपावन पुरान की…

परमहंस-मुनि-मन-उल्लासिनि।
रसिक-हृदय रस-रास-विलासिनि।
भुक्ति-मुक्ति-रति-प्रेम-सुदासिनि।
कथा अकिञ्चन प्रिय सुजानकी॥
आरति अतिपावन पुरान की…

विदेशों में बसे कई लोगों ने हमसे इस आरती को रोमन में उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है। इसे ध्यान में रखते हुए हम यह आरती यहाँ रोमन में दे रहे हैं–

ārati atipāvana purāna kī,
dharma-bhakti-vijñāna-khānakī ॥ ṭeka ॥

mahāpurāṇa bhāgavata nirmala।
śuka-mukha-vigalita nigama-kalpa-phala।
paramānandasudhā-rasamaya kala।
līlā-rati-rasa-rasanidhāna kī॥
ārati atipāvana purāna kī…

kalimala-mathani tritāpa-nivāriṇi।
janmamṛtyumaya bhava-bhayahāriṇi।
sevata satata sakala sukhakāriṇi।
sumahauṣadhi hari-carita gānakī॥
ārati atipāvana purāna kī…

viṣaya-vilāsa-vimoha-vināśini।
vimala virāga viveka vikāśini।
bhagavat-tattva-rahasya-prakāśini।
parama jyoti paramātmajñānakī॥
ārati atipāvana purāna kī…

paramahaṃsa-muni-mana-ullāsini।
rasika-hṛdaya rasa-rāsa-vilāsini।
bhukti-mukti-rati-prema-sudāsini।
kathā akiñcana priya sujānakī॥
ārati atipāvana purāna kī…

सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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