सूरह रहमान की तिलावत – अर-रहमान (सूरह 55)

सूरह रहमान की तिलावत से पहले इससे संबंधित कुछ बुनियादी बातें समझना ज़रूरी है। यह कुरान शरीफ का पचपनवाँ अध्याय है। इसमें 78 आयतें हैं। सूरह रहमान की तिलावत के बेशुमार फायदे हैं। कहते हैं कि जो हर रोज़ इसे सुनता है, उसकी बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं। यह भी माना जाता है कि रोज़ाना एक ही जगह 21 दिनों तक सूरह रहमान की तिलावत से बेटी की शादी अगर न हो रही हो, तो हो जाती है। आइए, करते हैं सूरह रहमान की तिलावत (Surah Rahman in Hindi)–

शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है।

रहमान ने, कुरान की तालीम दी। उसने इंसान को पैदा किया। उसे बोलना सिखाया। सूरज और चांद के लिए एक हिसाब है। और सितारे और दरख्त सज्दा करते हैं। और उसने आसमान को ऊंचा किया और उसने तराज़ू रख दी। कि तुम तोलने में ज़्यादती न करो। और इंसाफ़ के साथ सीधी तराज़ू तोलो और तोल में न घटाओ। (1-9)

और ज़मीन को उसने ख़ल्क़ (प्राणियों) के लिए रख दिया। उसमें मेवे हैं और खजूर हैं जिनके ऊपर गिलाफ़ होता है। और भुस वाले अनाज भी हैं और ख़ुशबूदार फूल भी। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। उसने पैदा किया इंसान को ठीकरे की तरह खंखनाती मिट्टी से और उसने जिन्नात को आग की लपट से पैदा किया। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। वह मालिक है दोनों मश्रिक़ (पूर्व) का और दोनों मग्रिब (पश्चिम) का। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। उसने चलाए दो दरिया, मिलकर चलने वाले। दोनों के दर्मियान एक पर्दा है जिससे वे आगे नहीं बढ़ते। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। उन दोनों से मोती और मूंगा निकलता है। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। और उसी के हैं जहाज़ समुद्र में ऊंचे खड़े हुए जैसे पहाड़, फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। (10-25)

जो भी ज़मीन पर है वह फ़ना होने वाला है। और तेरे रब की ज़ात बाक़ी रहेगी, अज़्मत वाली और इज़्ज़त वाली। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे | उसी से मांगते हैं जो आसमानों और ज़मीन में हैं। हर रोज़ उसका एक काम है। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। (26-30)

हम जल्द ही फ़ारिग़ होने वाले हैं तुम्हारी तरफ़ से, ऐ दो भारी क्राफ़िलो। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। ऐ जिन्‍नों और इंसानों के गिरोह, अगर तुमसे हो सके कि तुम आसमानों और ज़मीन की हदों से निकल जाओ तो निकल जाओ, तुम नहीं निकल सकते बगैर सनद के। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। तुम पर छोड़े जाएंगे आग के शोले और धुवां तो तुम बचाव न कर सकोगे। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। (31-36)

फिर जब आसमान फटकर खाल की मानिंद सुर्ख़ हो जाएगा। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। पस उस दिन किसी इंसान या जिन्‍न से उसके गुनाह की बाबत पूछ न होगी। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। मुजरिम पहचान लिए जाएंगे अपनी अलामतों से, फिर पकड़ा जाएगा पेशानी के बाल से और पांव से। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। यह जहन्नम है जिसे मुजरिम लोग झूठ बताते थे। वे फिरेंगे उसके दर्मियान और खौलते पानी के दर्मियान। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। (37-45)

और जो शख्स अपने रब के सामने खड़ा होने से डरे उसके लिए दो बाग हैं। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। दोनों बहुत शाख़ों वाले। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। उनके अंदर दो चशमे (स्रोत) जारी होंगे। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। दोनों बाग़ों में हर फल की दो क़िस्में | फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। वे तकिया लगाए ऐसे बिछौनों पर बैठे होंगे जिनके अस्तर दबीज़ (गाढ़े) रेशम के होंगे। और फल उन बाग़ों का झुक रहा होगा। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। उनमें नीची निगाह वाली औरतें होंगी। जिन्हें उन लोगों से पहले न किसी इंसान ने छुवा होगा न किसी जिन्‍न ने। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। वे ऐसी होंगी जैसे कि याक़ूत (लालमणि) और मरजान (मूंगा)। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। नेकी का बदला नेकी के सिवा और क्या है। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। (46-61)

और उनके सिवा दो बाग़ और हैं। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे | दोनों गहरे सब्ज़ स्याही मायल | फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। उनमें दो चशमे (स्रोत) होंगे उबलते हुए। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। उनमें फल और खजूर और अनार होंगे। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। उनमें ख़ूबसीरत (सुशील), खूबसूरत औरतें होंगी। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। हूरें ख़ेमों में रहने वालियां। फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। उनसे पहले उन्हें न किसी इंसान ने हाथ लगाया होगा और न किसी जिन्‍न ने | फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। तकिया लगाए सब्ज़ मस्नदों (हरित आसनों) पर और क़ीमती नफ़ीस बिछौने पर | फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे। बड़ा बाबरकत है तेरे रब का नाम बड़ाई वाला और अज़्मत वाला। (62-78)

सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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