स्वामी विवेकानंद के पत्र – खेतड़ी के महाराज को लिखित (17 सितम्बर, 1898)

(स्वामी विवेकानंद का खेतड़ी के महाराज को लिखा गया पत्र)

द्वारा ऋषिवर मुकर्जी
चीफ जज, काश्मीर
१७ सितम्बर, १८९८

महाराज,

मैं यहाँ दो सप्ताह बहुत अस्वस्थ रहा। अब अच्छा हो रहा हूँ। मेरे पास पैसे नहीं हैं। यद्यपि मेरे अमेरिकन मित्र सामर्थ्य के अनुसार मेरी यथायोग्य सहायता कर रहे हैं – मुझे हमेशा उन लोगों के आगे हाथ पसारने में लाज आती है – खासकर बीमारी के दवादारू, पथ्य वगैरह के लिए। संसार में मुझे एक ही आदमी के सामने हाथ पसारने में कभी लज्जा का अनुभव नहीं होता और वह आप हैं। आप दें या नहीं – कोई बात नहीं। यदि संभव हो तो कृपया कुछ रुपये भेजिए। आप कैसे हैं? मैं अक्तूबर के मध्य तक नीचे उतर रहा हूँ।

जगमोहन से कुमार साहब के पूर्ण आरोग्य लाभ का संवाद सुनकर प्रसन्न हुआ। अब वे मजे में हैं; आशा है, आप भी सानंद हैं।

सदैव आपका,
विवेकानन्द

सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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