स्वामी विवेकानंद के पत्र – कुमारी मेरी हेल को लिखित (सितम्बर, 1899)

(स्वामी विवेकानंद का कुमारी मेरी हेल को लिखा गया पत्र)

रिजले मॅनर
सितम्बर, १८९९

प्रिय मेरी,

हाँ, मैं पहुँच गया। ग्रीनेकर से मुझे ईसाबेल का एक पत्र मिला था। आशा है कि मैं शीघ्र ही हैरिएट एवं उससे मिलूँगा। हैरिएट डब्ल्यू. समान रूप से मौन रहे हैं। चिन्ता मत करो मैं अपने अवसर की प्रतीक्षा करूँगा और श्री वूली के करोड़पति बन जाते ही अपने पैसे की माँग करूँगा। तुमने मदर चर्च एवं फादर पोप के विषय में कोई बात नहीं लिखी, केवल मेरे विषय में समाचार पत्रों में प्रकाशित कुछ खबरें लिखी हैं। बहुत पहले से मैंने समाचार-पत्रों में दिलचस्पी लेना छोड़ दिया, वे मुझे केवल जनता के सम्मुख बनाये रखते हैं और इससे किसी तरह, जैसा तुमने लिखा है, मेरी किताबों की कुछ बिक्री हो जाती है। क्या तुम जानती हो कि मैं अब क्या करने का प्रयत्न कर रहा हूँ। पुनः फ़्रेंच सीखने जा रहा हूँ। अगर इस वर्ष ऐसा करने में मैं असफल हुआ, तो अगले वर्ष मैं पेरिस-प्रदर्शनी ढंग से देख नहीं पाऊँगा। यहाँ मैं अधिक फ़्रेंच सीखने की आशा करता हूँ, जहाँ नौकर भी फ़्रेंच में बातचीत करते हैं।

तुमने क्या कभी श्रीमती लेगेट से मुलाकात की? वह तो एकदम भव्य हैं। उनके अतिथि के रूप में मैं अगले साल पेरिस जा रहा हूँ, जैसे कि मैं पहली बार गया था।

कार्य-संचालन के केन्द्र के रूप में तथा दर्शन-शिक्षा एवं धर्म के तुलनात्मक अध्ययन के लिए अब मैंने गंगा-तट पर एक मठ की स्थापना कर ली है।

इधर तुम क्या करती रहीं? पढ़ती रही हो? लिखती रही हो? तुमने कुछ नहीं किया। इस समय तक तुम बहुत कुछ लिख सकती थीं। अगर तुम केवल मुझे फ़्रेंच ही पढ़ा पातीं, तो अब तक मैं बहुत अंशों में फ़्रेंच हो गया होता और तुमने यह नहीं किया, केवल मुझे बकवास करने की प्रेरणा दी। तुम कभी ग्रीनेकर भी नहीं गयीं। आशा है कि वह हर वर्ष पुष्ट होता जा रहा है।

ईसाई-विज्ञान के २४ फ़ुट और ६०० पौण्डों की तुम अपनी चिकित्सा से मुझे अच्छा नहीं कर पायीं। तुम्हारी चिकित्सा-शक्ति के प्रति मैं अपना विश्वास खोता जा रहा हूँ। सैम (र्एीस्) कहाँ है? इधर सारे समय शक्तिभर सावधान रह सकने वाला वह, कितना सुशील बालक है, उसके हृदय के लिए साधुवाद।

शीघ्रता से मेरे बाल सफ़ेद हो रहे थे, लेकिन किसी तरह रुक गये। मुझे खेद है कि अब कुछ थोड़े से ही सफेद बाल हैं, यद्यपि अनुसंधान करने से बहुत से प्रकाश में आ जायेंगे। मैं इसको पसन्द करता हूँ और बकरे की तरह एक लम्बा सफ़ेद नूर उगाने जा रहा हूँ। यूरोप में मदर चर्च एवं फादर पोप अच्छे ढंग से समय बिता रहे हैं। स्वदेश लौटते समय मैंने इसका कुछ आभास पाया और तुम शिकागो में सिण्डा – रेला नृत्य में व्यस्त हो – यह तुम्हारे लिए कितनी अच्छी बात है। इन बूढ़ों को अगले साल पेरिस जाने और तुमको अपने साथ ले लेने के लिए राजी करो। वहाँ देखने के लिए बहुत से अद्भुत दृश्य होंगे। दुकान बंद करने के पूर्व फ्रांसीसी अन्तिम एवं महान प्रयत्न कर रहे हैं – ऐसा लोग कहते हैं।

बहुत,बहुत दिनों से तुमने मेरे पास कोई पत्र नहीं भेजा, ठीक है न। इस पत्र को पाने की तुम पात्री नहीं हो, लेकिन तुम जानती ही हो कि मैं कितना भला हूँ – और विशेषतया इसलिए कि मृत्यु करीब आ रही है, मैं किसी से झगड़ा करना नहीं चाहता। ईसाबेल एवं हैरियट से मिलने के लिए मैं मर रहा हूँ। मुझे यह आशा है कि ग्रीनेकर सराय में उन लोगों की रोग-निवारण की शक्ति और बढ़ गयी है और वे मुझे इस वर्तमान अवनति से उबारने में सहायता करेंगी। मेरे जमाने में इस सराय में आध्यात्मिक आहार अधिक मात्रा में मौजूद थे और भौतिक सामग्री की मात्रा कम थी। अस्थि-चिकित्सा विज्ञान के विषय में क्या तुम कुछ जानती हो? यहाँ न्यूयार्क में एक ऐसे व्यक्ति हैं, जो सचमुच अद्भुत कार्य कर रहे हैं।

एक सप्ताह के भीतर मैं उनसे अपनी हड्डियों की परीक्षा कराने जा रहा हूँ। कुमारी ‘हो’ कहाँ है? वह कितनी भद्र और कितनी अच्छी मित्र हैं। हाँ, तो मेरी, यह कितनी विचित्र बात है कि तुम्हारे परिवार, मदर चर्च और उनके पादरी ने – मठवासी और लौकिक दोनों प्रकार के – मेरे ऊपर किसी अन्य परिवार की अपेक्षा, जिसे मैं जानता हूँ, अधिक प्रभाव डाला है। ईश्वर सतत् तुम्हारा कल्याण करे। इस समय मैं आराम कर रहा हूँ और लेगेट-दम्पत्ति कितने उदार हैं कि मुझे घर जैसा लग रहा है। ड्यूई-जूलूस देखने के लिए मैं न्यूयार्क जाने की सोच रहा हूँ। मैंने वहाँ के अपने मित्रों से मुलाकात नहीं की है।

अपने विषय में सब बातें मुझे बताना। मैं सुनने के लिए बहुत इच्छुक हूँ। तुम ‘जो’ को तो जानती हो। मैंने अपनी लगातार बीमारी से उनकी भारत-यात्रा में विघ्न उपस्थित कर दिया, किन्तु वे बहुत ही क्षमाशील एवं सज्जन हैं। वर्षों से श्रीमती बुल और वे मेरी अभिभावक देवदूत रही हैं। आगामी सप्ताह में श्रीमती बुल के यहाँ आने की आशा है।

वे यहाँ पहले आ गयी होतीं, लेकिन उनकी पुत्री (ओलिया) को बीमारी का दौरा चलता रहा। उसने बहुत कष्ट झेला, लेकिन अब खतरे से बाहर है। यहाँ पर श्रीमती बुल ने लेगेट के कुटीरों में से एक ले रखा है और यदि शीत ऋतु का आगमन समय से पहले नहीं होता, तो हम यहाँ अभी एक महीने तक आनन्द उठा सकते हैं। स्थान कितना मनोरम है – उपवनों एवं लॉनों से सुयुक्त।

एक दिन मैंने गोल्फ खेलने का प्रयत्न किया, मुझे यह बिल्कुल ही मुश्किल नहीं जान पड़ता है – केवल इसके लिए अच्छे अभ्यास की आवश्यकता है। क्या तुम अपने ‘गॉल्फिंग’ मित्रों से मिलने के लिए कभी फिलाडेलफिया नहीं गयीं? तुम्हारी योजनाएँ क्या हैं? अपने शेष जीवन में क्या करने की सोच रही हो? क्या किसी कार्य के लिए तुमने विचार किया है? मुझे एक लम्बा पत्र लिखना। लिखोगी? जब मैं नेपुल्स के मार्गों से गुजर रहा था, मैंने एक महिला को देखा, जो तीन और महिलाओं के साथ जा रही थीं, वे निश्चय ही अमेरिकी थीं। वह तुमसे इतना मिलती-जुलती थीं कि मैं उनसे कुछ कहने ही जा रहा था, किन्तु जब मैं नजदीक गया मुझे अपनी गलती मालूम हो गयी। सम्प्रति विदा। शीघ्र लिखना।

सतत तुम्हारा प्यारा भाई,
विवेकानन्द

सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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