स्वामी विवेकानंद के पत्र – श्री प्रमदादास मित्र को लिखित (2 अप्रैल, 1890)

(स्वामी विवेकानंद का श्री प्रमदादास मित्र को लिखा गया पत्र)

गाजीपुर,
२ अप्रैल, १८९०

पूज्यपाद,

जिस वैराग्य की आप मुझे सलाह देते हैं, वह मैं कहाँ से प्राप्त करूँ? उसीके लिए तो मैं पृथ्वी पर मारा मारा फिर रहा हूँ। यदि मुझे यह सच्चा वैराग्य कभी उपलब्ध होता है, मैं आपको सूचित करूँगा और यदि आपको इस प्रकार की कोई चीज प्राप्त हो, तो कृपया मुझे उसके साझी के रूप में याद करें।

आपका,
नरेन्द्र

सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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