श्री विंध्येश्वरी की आरती – Vindhyeshwari Aarti

श्री विंध्येश्वरी की आरती पाप-ताप शांत कर मन मांगी मुराद पूरी करने वाली है। माँ का शुद्ध हृदय से स्मरण मात्र ही त्रिलोक में सब कुछ देने में सक्षम है। ऐसे में जो भक्त अन्तःकरण को श्रद्धा से भरकर श्री विंध्येश्वरी की आरती (Vindhyeshwari Aarti) गाता है, उसे इच्छा के अनुसार फल की प्राप्ति सहज ही हो जाती है। जो भी उनका ध्यान करता है, मैया से सहायता जरूर पाता है। पढ़िए श्री विंध्येश्वरी की आरती–

सुन मेरी देवी पर्वत वासिनी,
तेरा पार न पाया॥ टेक ॥

पान सुपारी ध्वजा नारियल,
ले तेरी भेंट चढ़ाया॥

सुवा चोली तेरे अंग विराजै,
केसर तिलक लगाया।

नंगे पग अकबर आया,
सोने का छत्र चढ़ाया॥

ऊँचे ऊँचे पर्वत भयो देवालय,
नीचे शहर बसाया।

सतयुग, त्रेता, द्वापर मध्ये,
कलियुग राज सवाया।

धूप दीप नैवेद्य आरती,
मोहन भोग लगाया।

ध्यानू भगत मैया तेरे गुण गावैं,
मनवांछित फल पावै॥

विन्ध्येश्वरी माता सब दुःखों का नाश कर भक्तों पर हर तरह की कृपा बरसाती हैं। उनकी ममतामयी दृष्टि भक्त के सारे दुःख-दर्द दूर करने में सक्षम है। जरूरत है तो केवल साफ दिल और श्रद्धा की। बड़े-से-बड़ा राजा और साधारण-से-साधारण रंक उनकी शरण में आकर अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने में सफल होते हैं। कृपया श्री विंध्येश्वरी चालीसा पढ़ने के लिए यहाँ जाये – श्री विंध्येश्वरी चालीसा

सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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