भगवान सुपार्श्वनाथ की आरती – Suparshvanath Aarti

भगवान सुपार्श्वनाथ की आरती (Suparshvanath Aarti) जो भी नियमित रूप से करता है उसे सभी सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। सुपार्श्वनाथ भगवान जैन धर्म के 7 वें तीर्थंकर हैं, इन्होंने हमेशा सत्यता के मार्ग का दिखाया है। भगवान सुपार्श्वनाथ की आरती उनकी अनुयायियों को अहिंसा, धर्म और न्याय के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है। भगवान सुपार्श्वनाथ की आरती पढ़ने से सभी बिगड़े काम बनते हैं। कहते हैं कि भगवान सुपार्श्वनाथ की आरती मनवांछित फलदायक है।

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आओ सभी मिल आरति करके,
श्री सुपार्श्व गुणगान करें।
मुक्ति रमापति की आरति,
सब भव्यों का कल्याण करें॥टेक॥

आओ सभी मिल आरति करके,
श्री सुपार्श्व गुणगान करें।
मुक्ति रमापति की आरति,
सब भव्यों का कल्याण करें॥टेक॥

धनपति ने आ नगर बनारस,
में रत्नों की वर्षा की,
गर्भ बसे भादों सुदि षष्ठी,
पृथ्वीषेणा माँ हरषीं,
गर्भकल्याणक की वह तिथि भी,
मंगलमय भगवान करें।
मुक्ति रमापति की आरति,
सब भव्यों का कल्याण करें॥१॥

ज्येष्ठ सुदी बारस जिनवर का,
सुरगिरि पर अभिषेक हुआ,
उस ही तिथि दीक्षा ली प्रभु ने,
राज-पाट सब त्याग दिया,
फाल्गुन वदि षष्ठी शुभ तिथि में,
केवलज्ञान कल्याण करें।
मुक्ति रमापति की आरति,
सब भव्यों का कल्याण करें॥२॥

फाल्गुन वदि सप्तमि को प्रभुवर,
श्री सम्मेदशिखर गिरि से,
मुक्तिरमा को वरने हेतू,
चले सिद्धिपति बन करके,
कर्मनाश शिव वरने वाले,
हमको सिद्धि प्रदान करें।
मुक्ति रमापति की आरति,
सब भव्यों का कल्याण करें॥३॥

रत्नथाल में मणिमय दीपक,
को प्रज्वलित किया स्वामी,
मोहतिमिर के नाशन हेतू,
तव शरणा आते प्राणी,
इसी हेतु ‘‘चंदनामती’’,
हम भी तेरा गुणगान करें।
मुक्ति रमापति की आरति,
सब भव्यों का कल्याण करें॥४॥

विदेशों में बसे कुछ हिंदू स्वजनों के आग्रह पर भगवान सुपार्श्वनाथ की आरती (Suparshvanath Aarti) को हम रोमन में भी प्रस्तुत कर रहे हैं। हमें आशा है कि वे इससे अवश्य लाभान्वित होंगे। पढ़ें भगवान सुपार्श्वनाथ की आरती रोमन में–

āo sabhī mila ārati karake,
śrī supārśva guṇagāna kareṃ।
mukti ramāpati kī ārati,
saba bhavyoṃ kā kalyāṇa kareṃ॥ṭeka॥

dhanapati ne ā nagara banārasa,
meṃ ratnoṃ kī varṣā kī,
garbha base bhādoṃ sudi ṣaṣṭhī,
pṛthvīṣeṇā mā~ haraṣīṃ,
garbhakalyāṇaka kī vaha tithi bhī,
maṃgalamaya bhagavāna kareṃ।
mukti ramāpati kī ārati,
saba bhavyoṃ kā kalyāṇa kareṃ॥1॥

jyeṣṭha sudī bārasa jinavara kā,
suragiri para abhiṣeka huā,
usa hī tithi dīkṣā lī prabhu ne,
rāja-pāṭa saba tyāga diyā,
phālguna vadi ṣaṣṭhī śubha tithi meṃ,
kevalajñāna kalyāṇa kareṃ।
mukti ramāpati kī ārati,
saba bhavyoṃ kā kalyāṇa kareṃ॥2॥

phālguna vadi saptami ko prabhuvara,
śrī sammedaśikhara giri se,
muktiramā ko varane hetū,
cale siddhipati bana karake,
karmanāśa śiva varane vāle,
hamako siddhi pradāna kareṃ।
mukti ramāpati kī ārati,
saba bhavyoṃ kā kalyāṇa kareṃ॥3॥

ratnathāla meṃ maṇimaya dīpaka,
ko prajvalita kiyā svāmī,
mohatimira ke nāśana hetū,
tava śaraṇā āte prāṇī,
isī hetu ‘‘caṃdanāmatī’’,
hama bhī terā guṇagāna kareṃ।
mukti ramāpati kī ārati,
saba bhavyoṃ kā kalyāṇa kareṃ॥4॥

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सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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